रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट :भाजपा नेता राजेश बिष्ट का गुटबाजी पर बड़ा बयान नहीं चेते तो 2027 में फिर कांग्रेस की झोली में जा सकती है सीट
लोहाघाट भाजपा प्रवक्ता राजेश बिष्ट का गुटबाजी पर बड़ा बयान नहीं चेते तो 2027 में फिर कांग्रेस की झोली में जाएगी सीट

चंपावत जिले की लोहाघाट विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले भाजपा के भीतर चल रही कथित गुटबाजी को लेकर पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेश बिष्ट का बड़ा बयान सामने आया हैं । भाजपा प्रवक्ता राजेश बिष्ट ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में लोहाघाट विधानसभा सीट में पार्टी के भीतर एक से अधिक टिकट दावेदारों और उनके साथ चल रहे गुटों व गुटबाजी को लेकर चिंता जताई । उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर समय रहते गुटबाजी खत्म नहीं की गई तो 2027 में लोहाघाट विधानसभा सीट फिर से कांग्रेस की झोली में जा सकती है ।राजेश बिष्ट ने अपने बयान में कहा लोहाघाट विधानसभा में पिछले विधानसभा चुनाव से लेकर हालिया स्थानीय चुनावों तक भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा पार्टी के भीतर आत्ममंथन की जरूरत बताई । उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को गुटबाजी के चलते हार का सामना करना पड़ा । जबकि इसके बाद जिला पंचायत चुनाव में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया और जिला पंचायत अध्यक्ष भी निर्विरोध बना । लेकिन पाटी नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा को मिली हार ने संगठन के सामने एक अलग तस्वीर पेश कर दी । बिष्ट के मुताबिक इन घटनाक्रमों को केवल अलग-अलग चुनावों के परिणाम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए , बल्कि पार्टी के भीतर की स्थिति पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए । भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने लोहाघाट में टिकट के दावेदारों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की । उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दावेदार ऐसे लोगों को अपने साथ लेकर घूम रहे हैं , जिनके साथ चार लोग भी नहीं जुड़े हैं , लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी किसी हीरो से कम नहीं है । बिष्ट ने सवाल उठाया कि सिर्फ सोशल मीडिया पर लोकप्रिय दिखने वाले लोग क्या वास्तव में पार्टी को चुनावी सफलता की सीढ़ी चढ़ा सकते हैं । राजेश बिष्ट के बयान का सबसे ज्यादा राजनीतिक वजन उस हिस्से में नजर आया , जहां उन्होंने वोट काटने वाले लोगों को लेकर संगठन को चेताया । उनका कहना है कि अगर भाजपा को 2027 में लोहाघाट सीट जीतनी है तो ऐसे लोगों को चिन्हित कर उन्हें किनारे करना होगा । हालांकि , ये वोट कटर कौन हैं इस सवाल का जवाब फिलहाल खुद राजेश बिष्ट ने सार्वजनिक तौर पर नहीं दिया है । यही वजह है कि उनके बयान के बाद लोहाघाट भाजपा की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म होना तय माना जा रहा है ।बिष्ट ने साफ तौर पर आशंका जताई कि अगर भाजपा के भीतर गुटबाजी जारी रही और संगठन ने समय रहते स्थिति को नहीं संभाला तो इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है । यानी 2027 की चुनावी लड़ाई अभी दूर है , लेकिन लोहाघाट भाजपा में टिकट की दौड़ और अंदरूनी समीकरणों ने चुनावी तापमान अभी से बढ़ा दिया है । राजेश बिष्ट के बयान ने भाजपा के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं । आखिर वे कौन से गुट हैं , कौन से दावेदार हैं और कौन से लोग हैं जिन्हें वे वोट कटर मान रहे हैं ? क्या पार्टी संगठन इन संकेतों को गंभीरता से लेकर कोई कार्रवाई या रणनीति तैयार करेगा ? फिलहाल इतना जरूर है कि लोहाघाट विधानसभा में 2027 का चुनावी रण शुरू होने से पहले भाजपा के भीतर की कथित गुटबाजी सार्वजनिक बहस का मुद्दा बनती दिख रही है ।अब देखना होगा कि संगठन इस आंतरिक अलार्म को कितनी गंभीरता से लेता है । तो वहीं राजेश बिष्ट अपने को 2027 विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी के तौर पर भी पेश किया।
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