रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:एकल, परित्यक्ता और विधवा महिलाओं को गाँव में ही रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाएगी सरकार।
Laxman Singh Bisht
Fri, Jul 10, 2026
एकल, परित्यक्ता और विधवा महिलाओं को गाँव में ही रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाएगी सरकार।
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना से आत्मनिर्भर बनेंगी राज्य की महिलाएं, ₹2 लाख तक की परियोजनाओं पर मिलेगा 75% अनुदान*
14 अगस्त 2026 तक कर सकते है आवेदन

उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने और उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार करने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना' का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा उत्तराखंड राज्य की मूल व स्थायी निवासी एकल, परित्यक्ता और विधवा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल की गई है। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी पीसी बृजवाल ने बताया कि राज्य सरकार इन महिलाओं को उनके निवास स्थान अथवा गाँव में ही रोजगार सृजन के अवसर उपलब्ध कराने और उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार करने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना' का प्रभावी संचालन कर रही है। इसी क्रम में वर्ष 2026 के लिए पात्र और इच्छुक महिलाओं से आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं।जिला कार्यक्रम अधिकारी पी.सी. बृजवाल ने योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना का मुख्य ध्येय ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर उन्हें स्वावलंबी बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। योजना से जुड़े सामान्य दिशा-निर्देश, अनिवार्य अर्हताएं और आवेदन का निर्धारित प्रारूप विभागीय वेबसाइट www.wecd.uk.gov.in पर उपलब्ध है, जहाँ से इसे आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। बृजवाल ने बताया कि इच्छुक एवं पात्र महिलाओं को अपना पूर्ण रूप से भरा हुआ आवेदन पत्र आगामी 14 अगस्त 2026 तक जिला कार्यक्रम कार्यालय, बाल विकास, चम्पावत के पते पर भेजना होगा। यह विशेष रूप से ध्यान रखा जाए कि आवेदन पत्र केवल पंजीकृत डाक (Registered Post) के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे और अन्य किसी माध्यम से प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
*पात्रता और आय सीमा*
यह योजना उत्तराखंड के सभी जनपदों की मूल व स्थायी निवासी महिलाओं के लिए है, जिनकी आयु 21 से 50 वर्ष के बीच हो।
इसमें एकल (निराश्रित), विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा, किन्नर, एसिड अटैक/अपराध पीड़ित महिलाओं और अवयस्क बच्चों की अकेले जिम्मेदारी उठाने वाली माताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 72,000 रुपये या उससे कम होनी चाहिए। सरकारी/अर्द्धसरकारी कर्मचारी या किसी अन्य रोजगार योजना का लाभ ले रही महिलाएं इसके लिए अपात्र हैं।
*चयनित व्यवसाय और वित्तीय लाभ*
महिलाएं कृषि, बागवानी, कुक्कुट/मत्स्य/पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, कैंटीन, बुटीक, ब्यूटी पार्लर, कंप्यूटर वर्क और जनरल स्टोर जैसे निजी व्यवसायों को चुन सकती हैं। योजना के तहत अधिकतम 2 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जाते हैं, जिस पर सरकार द्वारा 75 प्रतिशत (अधिकतम 1.50 लाख रुपये) का अनुदान दिया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत लाभार्थी का स्वयं का अंशदान होता है।
अनुदान की शर्तें और रिकवरी
सरकार का 75 प्रतिशत अनुदान तीन किश्तों (50%, 30% और 20%) में मिलेगा, और हर किश्त के साथ लाभार्थी को अपना आनुपातिक हिस्सा जमा करना होगा. पहली किश्त मिलने के 6 महीने के भीतर रोजगार शुरू करना अनिवार्य है, ऐसा न करने पर दी गई राशि पर 1 प्रतिशत मासिक ब्याज के साथ भू-राजस्व बकाया की तरह वसूली की जाएगी।
*चयन प्रक्रिया और दस्तावेज*
लाभार्थियों का चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर और विभाग के वार्षिक लक्ष्य के अनुसार होता है। आवेदन के लिए निवास, आय, पहचान पत्र, शपथ पत्र, नोटराईज्ड स्वघोषणा पत्र और बैंक पासबुक की आवश्यकता होती है. इसके लिए विभाग द्वारा हर वर्ष नए आवेदन मांगे जाते हैं।जिला कार्यक्रम अधिकारी ने जनपद की सभी पात्र महिलाओं से अपील की है कि वे समय रहते विभागीय वेबसाइट से प्रारूप डाउनलोड कर अपनी योग्यताओं की जांच कर लें और अंतिम तिथि से पहले पंजीकृत डाक के माध्यम से अपना आवेदन सुनिश्चित करें, ताकि वे इस कल्याणकारी योजना से जुड़कर स्वरोजगार अपना सकें।