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: शिक्षा सत्र शुरू होने के एक माह बाद भी सरकारी स्कूलों के छात्र छात्राओं को नहीं मिली पुस्तकें जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ चंपावत के जिलाध्यक्ष ने बताया दुर्भाग्य

Laxman Singh Bisht

Sun, May 7, 2023
  हालांकि प्रदेश के शिक्षा मंत्री व शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को हर सुविधा उपलब्ध कराने की बात करता है और अपनी पीठ थपथपाता है पर कहानी इसके ठीक उल्टे है शिक्षा सत्र शुरू होने के एक माह बीत जाने के बाद भी चंपावत जिले में नहीं मिली सरकारी स्कूल के छात्र-छात्राओं को किताबें जिस कारण सीएम धामी के जिले चंपावत के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही है इस बात को लेकर चंपावत जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश देव ने कहां की प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था व बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2000 से नए नए प्रयोग किए जा रहे हैं लेकिन दुर्भाग्य है कि नवीन शिक्षा सत्र के एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी छात्र छात्राओं को सरकार द्वारा दी जाने वाली निशुल्क पाठ्य पुस्तकें अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई दूसरी ओर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों को एक अप्रैल से ही सारी किताबें उपलब्ध हो चुकी है देव ने कहा कि शिक्षा विभाग की शासन की उस नीति का हिस्सा है जिसमें बड़ी बड़ी बातें कर अपनी पीठ थपथपाना तथा धरातल पर कुछ न करना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली है देव ने कहा असल में शिक्षा विभाग में एक अनोखी परंपरा बनी है कि उच्च स्तर पर लिए गए बेतुके निर्णय का पालन अंतिम पायदान मे बैठे अधिकारी रिमोट की तरह करते है जिला अध्यक्ष देव ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यदि दूसरे शब्दों में कहें तो बात बात पर विद्यार्थी हित का राग अलापने वाला शिक्षा विभाग पढ़ाई के समय में छात्रों को समय पर निशुल्क पाठ्य पुस्तकें तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है उन्होंने कहा कि छात्र हितों को देखते हुए यह एक चिंतनीय विषय है इस व्यवस्था के सुधार के लिए अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों को एक जन आंदोलन की आवश्यकता है वही अभी तक छात्र छात्राओं को पुस्तकें उपलब्ध ना होने के कारण अभिभावकों में भी शिक्षा विभाग के खिलाफ काफी आक्रोश है अभी भाव को ने कहा यह जिला सीएम धामि र्का विधानसभा क्षेत्र है कुल मिलाकर पुस्तकें बच्चों को कब उपलब्ध होंगी इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है जिसके चलते सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं का भविष्य फिलहाल अंधकार में नजर आ रहा है तथा शिक्षा विभाग के दावे खोखले नजर आ रहे हैं

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