Friday 15th of May 2026

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बनबसा:30.45 ग्राम स्मैक के साथ नशा तस्कर गिरफ्तार चंपावत पुलिस ने नशा तस्करो पर कसा शिकंजा

चंपावत:खेतीखान पार गोशनी सड़क पर स्कबर में बना गड्डा दुर्घटनाओं को दे रहा दावत

लोहाघाट:लीसा डिपो में पलटा मुर्गियों से भरा वाहन चालक व पत्नी चोटिल कई मुर्गियों की मौत।

रुड़की:यूसीसी लागू होने के बाद देश में हलाल पर पहला मुकदमा दर्ज पति समेत नौ के खिलाफ मामला दर्ज

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कुमाऊँ का डिजिटल बाज़ार: अब नौकरी, सेवाएँ, खरीद-बिक्री और मैट्रिमोनियल सब कुछ एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर

उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए KumaonBazaar.com तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यह एक ऐसा लोकल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ नौकरी, बिज़नेस प्रमोशन, लोकल सेवाएँ, खरीद-बिक्री, पर्यटन और मैट्रिमोनियल जैसी कई सुविधाएँ एक ही जगह उपलब्ध हैं। Website: https://www.kumaonbazaar.com

आज के समय में लोग लोकल स्तर पर भरोसेमंद सेवाएँ और अवसर ढूँढना चाहते हैं। इसी जरूरत को समझते हुए KumaonBazaar.com ने कुमाऊँ के लोगों के लिए एक आसान और उपयोगी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया है।

युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम

कुमाऊँ क्षेत्र के युवाओं को अक्सर नौकरी खोजने के लिए बड़े शहरों या कई अलग-अलग वेबसाइट्स पर निर्भर रहना पड़ता है। अब यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है क्योंकि KumaonBazaar Jobs Section पर लोकल और विभिन्न क्षेत्रों की जॉब्स उपलब्ध कराई जा रही हैं। Jobs Link: https://www.kumaonbazaar.com/jobs

यहाँ कंपनियाँ और बिज़नेस अपने जॉब पोस्ट कर सकते हैं, जबकि नौकरी तलाश रहे उम्मीदवार आसानी से आवेदन कर सकते हैं। इससे लोकल टैलेंट को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

मैट्रिमोनियल सेवा से आसान रिश्ते

आजकल लोग सुरक्षित और भरोसेमंद मैट्रिमोनियल प्लेटफ़ॉर्म की तलाश में रहते हैं। KumaonBazaar Matrimony कुमाऊँ समाज के लोगों के लिए एक विशेष सुविधा लेकर आया है जहाँ परिवार अपनी प्रोफाइल बनाकर रिश्तों की तलाश कर सकते हैं। Matrimony Link: https://www.kumaonbazaar.com/matrimony

यह सेवा खासतौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है जो अपने समाज और क्षेत्र में अच्छे रिश्ते ढूँढना चाहते हैं।

लोकल सेवाओं और बिज़नेस को मिलेगा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म कुमाऊँ के छोटे व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के लिए KumaonBazaar Services एक बेहतरीन अवसर बनकर उभर रहा है। Services Link: https://www.kumaonbazaar.com/services

यहाँ इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, टूर सर्विस, एजेंसी, फ्रीलांसर, दुकानदार और अन्य सेवा प्रदाता अपनी सेवाओं को ऑनलाइन प्रमोट कर सकते हैं। इससे लोकल बिज़नेस को डिजिटल पहचान मिलने के साथ-साथ ग्राहकों तक पहुँचने में आसानी होगी। खरीद-बिक्री और लोकल विज्ञापन की सुविधा प्लेटफ़ॉर्म पर Buy & Sell सेक्शन भी उपलब्ध है जहाँ लोग अपने प्रोडक्ट्स या सामान को ऑनलाइन पोस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा बिज़नेस प्रमोशन और लोकल विज्ञापनों के लिए भी सुविधा दी जा रही है, जिससे छोटे व्यवसाय कम लागत में अपनी पहुँच बढ़ा सकते हैं। पर्यटन और लोकल जानकारी का भी केंद्र कुमाऊँ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। KumaonBazaar.com पर पर्यटन से जुड़ी जानकारी, होटल, ट्रैवल सेवाएँ और लोकल बिज़नेस की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों को लाभ मिल सकता है। डिजिटल उत्तराखंड की ओर एक कदम डिजिटल इंडिया के दौर में लोकल प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ रही है। KumaonBazaar.com कुमाऊँ क्षेत्र के लोगों, युवाओं और व्यापारियों को डिजिटल रूप से जोड़ने का काम कर रहा है। यह प्लेटफ़ॉर्म आने वाले समय में रोजगार, व्यापार और लोकल नेटवर्किंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : चम्पावत ज़िले की ऐपन गर्ल लक्षिता जोशी दे रही हैं लोक कला को नयी पहचान।।

Laxman Singh Bisht

Wed, Aug 6, 2025

चम्पावत ज़िले की ऐपन गर्ल लक्षिता जोशी दे रही हैं लोक कला को नयी पहचान।उत्तराखंड की पावन धरती सदा से ही कला, संस्कृति और परंपराओं की अमूल्य धरोहर को संजोती आई है। इन्हीं परंपराओं में से एक है “ऐपन कला” — एक ऐसी लोकचित्र शैली, जिसमें देवी-देवताओं, धार्मिक प्रतीकों और शुभ अवसरों के लिए विशेष चित्र बनाए जाते हैं। इस पारंपरिक कला को आज के युग में जीवित रखना और उसे नए रूप में प्रस्तुत करना जितना कठिन है, उतना ही आवश्यक भी।चम्पावत ज़िले के रेगडू लोहाघाट गाँव की बेटी लक्षिता जोशी ने इस कठिन कार्य को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। आज उन्हें लोग प्यार से “ऐपन गर्ल” कहकर पुकारते हैं — और यह उपाधि उन्होंने अपने हुनर, मेहनत और समर्पण से कमाई है।लक्षिता को ऐपन कला की ओर आकर्षण बचपन से ही था। जब दूसरे बच्चे खेलकूद में व्यस्त होते, तब लक्षिता चावल के आटे से बनी रेखाओं में रंग भरने में मग्न रहतीं। घर के आंगन, पूजा स्थल या किसी उत्सव के अवसर पर उनके बनाए चित्र सभी को मंत्रमुग्ध कर देते। समय के साथ उन्होंने इस कला को न सिर्फ सीखा, बल्कि उसमें अपनी कल्पनाओं और रचनात्मकता का अद्भुत संगम भी जोड़ा।क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता युवा शशांक पांडे ने बताया कुछ साल पहले तक लक्षिता जोशी का यह हुनर केवल उनके गांव और जानने वालों तक ही सीमित था। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने ऐपन कार्य को सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू किया, एक नई दुनिया उनके सामने खुल गई। उनके द्वारा बनाए गए ऐपन फ्रेम, करवाचौथ थालियाँ, पूजा थाली सेट, शुभ लाभ चौकी, और सांस्कृतिक प्रतीक देशभर के लोगों को बेहद पसंद आने लगे।पांडे ने बताया आज लक्षिता देश के कई राज्यों में अपने उत्पाद भेज रही हैं। उनके पास देश के कई स्थानों से ऑर्डर आते है जिनमें नवरात्रि, तीज, दीवाली, करवाचौथ जैसे पर्वों के लिए विशेष डिजाइन की मांग रहती है।लक्षिता के कार्य की सबसे खास बात यह है कि उसमें परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। वह पुराने पारंपरिक डिज़ाइनों को आधुनिक टच के साथ फ्रेम, सजावटी वस्तुओं और उपयोगी सामानों में ढालती हैं, जिससे ये उत्पाद न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि सजावट और उपहार के रूप में भी आदर्श बन जाते हैं।उनकी बनाई चीज़ें हर आयु वर्ग को आकर्षित करती हैं — चाहे वह गाँव की बुजुर्ग महिलाएं हों, या शहरों की युवा पीढ़ी।लक्षिता का यह प्रयास उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है। वह स्वयं ही डिज़ाइन बनाती हैं, सामग्री जुटाती हैं और डिलीवरी तक की प्रक्रिया संभालती हैं।लोक कला एवं संस्कृति प्रेमी शशांक पाण्डेय ने बताया कि ऐपन कला केवल एक चित्रकला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि लक्षिता जोशी इस पहचान को देशभर में पुनर्जीवित कर रही हैं। वह इस बात का उदाहरण हैं कि अगर सही दिशा में जुनून और लगन के साथ काम किया जाए तो कोई भी कला कभी नहीं मरती। शशांक ने कहा आज जब दुनिया डिजिटल और मशीन-निर्मित चीज़ों की ओर भाग रही है, ऐसे में लक्षिता जोशी जैसी युवा कलाकारें हस्तशिल्प और लोककला की आत्मा को जीवित रखे हुए हैं। वह नारी सशक्तिकरण, सांस्कृतिक चेतना और आत्मनिर्भर भारत की एक सशक्त मिसाल हैं।उनका कार्य यह भी सिद्ध करता है कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि रोज़गार, पहचान और गौरव का साधन भी बन सकती है।

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