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रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:दिगालीचौड़ के रवि शंकर जोशी ने पीएचडी की परीक्षा सफलतापूर्वक की पूर्ण परिवार एवं गुरुजनों के प्रति जताया आभा

Laxman Singh Bisht

Sat, Aug 1, 2026

दिगालीचौड़ के रवि शंकर जोशी ने पीएचडी की परीक्षा सफलतापूर्वक की पूर्ण परिवार एवं गुरुजनों के प्रति जताया आभार

चंपावत। सीमांत क्षेत्र दिगालीचौड़ के युवा शिक्षाविद एवं चंपावत परिसर में प्राध्यापक के रूप में कार्यरत डॉ. रवि शंकर जोशी ने दिनांक 31 जुलाई 2026 को अपनी पीएचडी की मौखिकी (Viva-Voce) सफलतापूर्वक संपन्न कर शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही उनका पीएचडी शोध कार्य विधिवत पूर्ण हो गया है।डॉ. रवि शंकर जोशी ने अपनी इस उपलब्धि का सर्वप्रथम श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कहा कि उनके संस्कार, आशीर्वाद एवं निरंतर प्रेरणा ही उनके जीवन की सबसे बड़ी शक्ति रहे हैं। उन्होंने अपने समस्त परिवारजनों के प्रति भी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की तथा विशेष रूप से अपने बड़े भाई एवं समाजसेवी श्री दीपक जोशी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर मार्गदर्शन, सहयोग, प्रोत्साहन और विश्वास ने इस कठिन शोध यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।डॉ. जोशी का शोध शिक्षाशास्त्र (Education) विषय में "Study of Career Aspiration in Relation to Self-Efficacy and Socio-Economic Status of Senior Secondary School Students" शीर्षक पर आधारित है। यह शोध वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की करियर आकांक्षाओं, आत्म-प्रभावकारिता (Self-Efficacy) तथा सामाजिक-आर्थिक स्तर (Socio-Economic Status) के मध्य संबंधों का महत्वपूर्ण अध्ययन प्रस्तुत करता है।इस शोध कार्य का सफल मार्गदर्शन डॉ. माया जोशी एवं प्रो. भीमा मनराल ने शोध निदेशक के रूप में किया। डॉ. रवि शंकर जोशी ने अपने दोनों शोध निदेशकों सहित समस्त गुरुजनों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सतत मार्गदर्शन, विद्वतापूर्ण सुझावों एवं प्रेरणा के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी।उन्होंने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. देवेंद्र सिंह बिष्ट के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका प्रोत्साहन एवं सहयोग सदैव प्रेरणादायी रहा।

साथ ही चंपावत परिसर के निदेशक प्रो. प्रवीण सिंह बिष्ट के प्रति भी उन्होंने विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कहा कि परिसर में उपलब्ध सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण एवं सहयोगात्मक कार्यसंस्कृति ने उनके शोध कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।चूँकि डॉ. रवि शंकर जोशी वर्तमान में चंपावत परिसर में प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, इसलिए उन्होंने परिसर के समस्त शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारियों एवं पूरे परिसर परिवार का भी हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उन सभी गुरुजनों, सहयोगियों, शुभचिंतकों एवं परिवारजनों के स्नेह, विश्वास और सहयोग का परिणाम है, जिन्होंने प्रत्येक चरण पर उनका उत्साहवर्धन किया।डॉ. रवि शंकर जोशी की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षाविदों, सहयोगियों, विद्यार्थियों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल शैक्षणिक एवं सामाजिक भविष्य की कामना की है।

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