Monday 27th of July 2026

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रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : बनबसा:यूजीसी के नए नियम समानता और सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ – आनंद सिंह माहरा

Laxman Singh Bisht

Thu, Jan 29, 2026

यूजीसी के नए नियम समानता और सामाजिक न्याय की मूल भावना के खिलाफ – आनंद सिंह माहराबनबसा:प्रदेश सचिव, कांग्रेस कमिटी उत्तराखंड आनंद सिंह माहरा ने कहा है कि 13 जनवरी से लागू किए गए यूजीसी के नए नियम भारतीय संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय और समावेशी शिक्षा की भावना के प्रतिकूल हैं। ये नियम न केवल शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज को जोड़ने के बजाय उसे बांटने का काम करेंगे।आनंद सिंह माहरा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 समान अवसर और समान शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करते हैं। लेकिन यूजीसी के नए नियम योग्यता के नाम पर सामाजिक संतुलन को कमजोर करने का प्रयास हैं। शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य समाज को सशक्त और एकजुट करना होना चाहिए, न कि असमानता और अविश्वास को जन्म देना।उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर समान, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा चाहती है। ऐसे में यूजीसी के ये नियम “सबका साथ, सबका विकास” और “सबका विश्वास” जैसे दावों के भी विरुद्ध हैं। यदि शिक्षा में ही असमानता को संस्थागत रूप दिया जाएगा तो सामाजिक न्याय की अवधारणा खोखली हो जाएगी।प्रदेश सचिव ने केंद्र सरकार से मांग की कि इन विवादित नियमों पर पुनर्विचार किया जाए, सभी हितधारकों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों से संवाद स्थापित किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि शिक्षा नीति पूरी तरह संवैधानिक, समावेशी और समान अवसरों पर आधारित हो।आनंद सिंह माहरा ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार के भेदभाव के खिलाफ मजबूती से खड़ी है और समानता, योग्यता व सामाजिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।

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