: चंपावत:सीसीटीवी फुटेज ने पहुंचाया खेतीखान के दोहरे हत्याकांड के आरोपी गार्ड को जेल की सलाखों के पीछे अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा पड़े कैसे हत्याकांड को अंजाम दिया था गार्ड ने आखिर क्या हुआ था उस दिन कई दिनों से हत्याकांड को अंजाम देने की सोच रहा था गार्ड बैंक मैनेजर की हत्या करने के इरादे से पहुंचा था गार्ड बैंक में
Laxman Singh Bisht
Mon, Jul 29, 2024
सीसीटीवी फुटेज ने पहुंचाया खेतीखान के दोहरे हत्याकांड के आरोपी गार्ड को जेल की सलाखों के पीछे अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा पड़े कैसे हत्याकांड को अंजाम दिया था गार्ड ने आखिर क्या हुआ था उस दिन कई दिनों से हत्याकांड को अंजाम देने की सोच रहा था गार्ड बैंक मैनेजर की हत्या करने के इरादे से पहुंचा था गार्ड बैंक में
यह दिल दहलाने वाली घटना 17 मार्च 2018 की है रोज की ही भांति चंपावत जिले के खेतीखान कस्बे का जिला सहकारी बैंक ठीक 10:00 खुला और बैंक के कैशियर ललित सिंह बिष्ट अनुसेवक राजेंद्र लाल वर्मा और गार्ड दिनेश सिंह बोहरा ने बैंक में प्रवेश किया जिसके बाद कैशियर ललित बिष्ट अपनी सीट में बैठ गए और अनुसेवक राजेंद्र वर्मा बैंक से 50 मीटर की दूरी पर एक दुकान के सामने बैठकर उस दिन का अखबार पढ़ने में मशगूल हो गए उन्हें इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि थोड़ी देर बाद उनके साथ क्या होने जा रहा है और बैंक मे बैंक का गार्ड दिनेश सिंह अपनी दो नाली बंदूक टांग कर बैंक की छत पर गया आज वह घर से ही खूनी कांड को अंजाम देने की सोच कर बैंक आया हुआ था इस समय बैंक में ग्राहकों का आना-जाना शुरू नहीं हुआ था और बैंक मैनेजर नरेश कुमार छुट्टी में थे लगभग 10:15 पर गार्ड अपनी दो नाली बंदूक के साथ बैंक के अंदर प्रवेश करता है तथा अपने काम में मशगूल कैशियर ललित बिष्ट के सर से बंदूक सटाकर अचानक गोली चला देता है गोली लगते ही कैशियर ललित बिष्ट फर्श पर गिर जाते हैं और उनकी मौके पर मौत हो जाती है लेकिन हत्यारा गार्ड दिनेश सिंह यह भूल जाता है कि यह घटना बैंक के भीतर लगे हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हो रही है बिष्ट को ठिकाने लगाने के बाद गार्ड हाथ में बंदूक लिए बैंक से 50 मीटर की दूरी पर अखबार पढ़ रहे अनुसेवक राजेंद्र लाल वर्मा के पास पहुंचता है और उनको गोली मार देता है गोली लगते ही वर्मा बेंच से नाली में गिर जाते हैं और उनकी भी मौके पर मौत हो जाती है और हत्यारा लोगों को बंदूक लहराकर धमकता हुआ अपने घर मानर पहुंच जाता है वहीं इस दौहरे हत्याकांड से पूरे खेतीखान क्षेत्र में दहशत फैल जाती है लोगों की समझ में यह नहीं आ रहा था अचानक यह क्या हो गया और डर से कई व्यापारी अपनी दुकान बंद कर अपने-अपने घरों को चले जाते हैं पूरे खेतीखान बाजार में सन्नाटा छा जाता है बैंक के भीतर कैसियर बिष्ट की खून से लथपथ लाश और 50 मीटर दूरी पर अनुसेवक वर्मा की लाश पड़ी होती है और दोहरे हत्याकांड की खबर आग की तरह पूरे चंपावत जिले में फैल जाती है इस कांड ने चंपावत जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था घटना की जानकारी मिलते ही तत्कालीन एसपी धीरेंद्र गुंज्याल पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचते हैं बैंक के अंदर का नजारा बेहद डरावना था ललित बिष्ट का खून बहकर बैंक के अंदर से बाहर तक पहुंच चुका था कोई भी हत्याकांड के बारे में बताने से डर रहा था इस दौरान बैंक के अधिकारी भी मौके पर पहुंच चुके थे एसपी के निर्देश पर पुलिस दोनों सवो को कब्जे में लेती है और पीएम के लिए लोहाघाट भेज देती है पुलिस लोगों से घटना की जानकारी लेती है लेकिन डर से कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं होता है थोड़ी देर में ललित बिष्ट और बर्मा के परिजन भी खेतीखान पहुंचते हैं इसके बाद दोपहर को एसपी धीरेंद्र गुंज्याल के निर्देश पर राजस्व पुलिस और पुलिस गार्ड को गिरफ्तार करने के लिए उसके घर पहुंचती हैं तब हत्यारा घर में बैठकर आराम से शराब पी रहा होता है उसे अपने द्वारा की गई दो हत्याओं का कोई भी अफसोस तक नहीं था पुलिस हत्यारे को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है तथा बंदूक को सील कर दिया जाता है एसपी गुंज्याल के निर्देश पर पुलिस घटना स्थल से सबूत जुटाती है तथा घटना के सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेती है जिसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचता है पुलिस 19 लोगों को बतौर गवाह न्यायालय में पेश करती है लेकिन घटना के समय मौजूद अधिकतर गवाह कोर्ट में मुकर जाते हैं और ऐसा लगने लगता है आरोपी साफ बच जाएगा लेकिन हत्यारे को सजा दिलाने में अहम गवाह बना बैंक के भीतर लगा सीसीटीवी कैमरा जिसमें पूरी घटना कैद हो गई थी अदालत ने सीसीटीवी कैमरे के डीवीआर को जांच के लिए हैदराबाद लैब भेजा जहां लैब ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा सीसीटीवी फुटेज के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं की गई है जिसके बाद अदालत ने सीसीटीवी फुटेज को हत्याकांड का अहम सबूत माना इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी हत्यारे को सजा दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई तथा कुछ गवाहों ने भी घटना के समय गार्ड को बैंक में होना साबित किया हालांकि गार्ड दिनेश सिंह ने अदालत में झूठ बोलते हुए कहा था कि वह उस दिन छुट्टी में था और बैंक नहीं आया था लेकिन सीसीटीवी फुटेज में गार्ड का झूठ पकड़ा गया लगभग 6 साल तक चले इस दिल दहला देने वाले कांड की अदालत मे सुनवाई के दौरान कई मोड़ आए एक और आरोपी के वकील आरोपी को निर्दोष सिद्ध करने में लगे हुए थे आखिर चंपावत के जिला सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने हत्यारोपी गार्ड दिनेश सिंह बोहरा को दोनों हत्याओं का कसूरवार ठहराया और 29 जुलाई सोमवार को हत्यारे को उसके द्वारा की गई दो निर्दोष लोगों की हत्या की सजा सुनाई अदालत ने हत्यारे गार्ड को कठोर आजीवन कारावास व डेढ़ लाख रुपए जुर्माना की सजा सुनाई और इस कांड में मारे गए दोनों बैंक कर्मियों के परिजनों को इंसाफ दिया वही हत्यारे गार्ड को सजा दिलाने में सरकारी वकील विद्याधर जोशी की अहम भूमिका रही जिन्होंने अपनी ठोस दलीलों से गार्ड को आरोपी सिद्ध करते हुए जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा और परिजनों को इंसाफ दिलाया वहीं सूत्रों के मुताबिक उस दिन हत्यारा तत्कालीन शाखा प्रबंधक नरेश कुमार की हत्या करने आया हुआ था लेकिन किस्मत से शाखा प्रबंधक उस दिन छुट्टी लेकर पिथौरागढ़ गए हुए थे और बच गए अन्यथा उस दिन यह दोहरा नहीं तिहरा हत्याकांड होता इस घटना से शाखा प्रबंधक इतनी दहशत में आ गए थे कि उन्होंने खेतीखान से अपना तबादला करवा लिया था वही हत्यारे को अंजाम तक पहुंचने में पुलिस व राजस्व पुलिस की अहम भूमिका रही यह दौहरा हत्याकांड इतना भयानक था जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था खेतीखान क्षेत्र के लोग कई दिनों तक इस घटना के बारे में सोच कर ही दहसत मे रहे थे कोई भी इस घटना पर बात करने तक को तैयार नहीं था आखिर अदालत ने न्याय किया और हत्यारे को उसके करतूत की कठोर सजा दी और परिजनों को इंसाफ दिलाया वहीं लोगो के मुताबिक़ गार्ड सनकी किस्म का था जिसके कंधों पर बैंक की रक्षा करने का भार था उसने ही अपने ही दो साथियों को मौत के घाट उतार दिया इस कांड के बाद प्रशासन जागा और गार्ड रखने के नियमों में कई बदलाव किए गए
यह दिल दहलाने वाली घटना 17 मार्च 2018 की है रोज की ही भांति चंपावत जिले के खेतीखान कस्बे का जिला सहकारी बैंक ठीक 10:00 खुला और बैंक के कैशियर ललित सिंह बिष्ट अनुसेवक राजेंद्र लाल वर्मा और गार्ड दिनेश सिंह बोहरा ने बैंक में प्रवेश किया जिसके बाद कैशियर ललित बिष्ट अपनी सीट में बैठ गए और अनुसेवक राजेंद्र वर्मा बैंक से 50 मीटर की दूरी पर एक दुकान के सामने बैठकर उस दिन का अखबार पढ़ने में मशगूल हो गए उन्हें इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि थोड़ी देर बाद उनके साथ क्या होने जा रहा है और बैंक मे बैंक का गार्ड दिनेश सिंह अपनी दो नाली बंदूक टांग कर बैंक की छत पर गया आज वह घर से ही खूनी कांड को अंजाम देने की सोच कर बैंक आया हुआ था इस समय बैंक में ग्राहकों का आना-जाना शुरू नहीं हुआ था और बैंक मैनेजर नरेश कुमार छुट्टी में थे लगभग 10:15 पर गार्ड अपनी दो नाली बंदूक के साथ बैंक के अंदर प्रवेश करता है तथा अपने काम में मशगूल कैशियर ललित बिष्ट के सर से बंदूक सटाकर अचानक गोली चला देता है गोली लगते ही कैशियर ललित बिष्ट फर्श पर गिर जाते हैं और उनकी मौके पर मौत हो जाती है लेकिन हत्यारा गार्ड दिनेश सिंह यह भूल जाता है कि यह घटना बैंक के भीतर लगे हुए सीसीटीवी कैमरे में कैद हो रही है बिष्ट को ठिकाने लगाने के बाद गार्ड हाथ में बंदूक लिए बैंक से 50 मीटर की दूरी पर अखबार पढ़ रहे अनुसेवक राजेंद्र लाल वर्मा के पास पहुंचता है और उनको गोली मार देता है गोली लगते ही वर्मा बेंच से नाली में गिर जाते हैं और उनकी भी मौके पर मौत हो जाती है और हत्यारा लोगों को बंदूक लहराकर धमकता हुआ अपने घर मानर पहुंच जाता है वहीं इस दौहरे हत्याकांड से पूरे खेतीखान क्षेत्र में दहशत फैल जाती है लोगों की समझ में यह नहीं आ रहा था अचानक यह क्या हो गया और डर से कई व्यापारी अपनी दुकान बंद कर अपने-अपने घरों को चले जाते हैं पूरे खेतीखान बाजार में सन्नाटा छा जाता है बैंक के भीतर कैसियर बिष्ट की खून से लथपथ लाश और 50 मीटर दूरी पर अनुसेवक वर्मा की लाश पड़ी होती है और दोहरे हत्याकांड की खबर आग की तरह पूरे चंपावत जिले में फैल जाती है इस कांड ने चंपावत जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था घटना की जानकारी मिलते ही तत्कालीन एसपी धीरेंद्र गुंज्याल पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचते हैं बैंक के अंदर का नजारा बेहद डरावना था ललित बिष्ट का खून बहकर बैंक के अंदर से बाहर तक पहुंच चुका था कोई भी हत्याकांड के बारे में बताने से डर रहा था इस दौरान बैंक के अधिकारी भी मौके पर पहुंच चुके थे एसपी के निर्देश पर पुलिस दोनों सवो को कब्जे में लेती है और पीएम के लिए लोहाघाट भेज देती है पुलिस लोगों से घटना की जानकारी लेती है लेकिन डर से कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं होता है थोड़ी देर में ललित बिष्ट और बर्मा के परिजन भी खेतीखान पहुंचते हैं इसके बाद दोपहर को एसपी धीरेंद्र गुंज्याल के निर्देश पर राजस्व पुलिस और पुलिस गार्ड को गिरफ्तार करने के लिए उसके घर पहुंचती हैं तब हत्यारा घर में बैठकर आराम से शराब पी रहा होता है उसे अपने द्वारा की गई दो हत्याओं का कोई भी अफसोस तक नहीं था पुलिस हत्यारे को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है तथा बंदूक को सील कर दिया जाता है एसपी गुंज्याल के निर्देश पर पुलिस घटना स्थल से सबूत जुटाती है तथा घटना के सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेती है जिसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचता है पुलिस 19 लोगों को बतौर गवाह न्यायालय में पेश करती है लेकिन घटना के समय मौजूद अधिकतर गवाह कोर्ट में मुकर जाते हैं और ऐसा लगने लगता है आरोपी साफ बच जाएगा लेकिन हत्यारे को सजा दिलाने में अहम गवाह बना बैंक के भीतर लगा सीसीटीवी कैमरा जिसमें पूरी घटना कैद हो गई थी अदालत ने सीसीटीवी कैमरे के डीवीआर को जांच के लिए हैदराबाद लैब भेजा जहां लैब ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा सीसीटीवी फुटेज के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं की गई है जिसके बाद अदालत ने सीसीटीवी फुटेज को हत्याकांड का अहम सबूत माना इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी हत्यारे को सजा दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई तथा कुछ गवाहों ने भी घटना के समय गार्ड को बैंक में होना साबित किया हालांकि गार्ड दिनेश सिंह ने अदालत में झूठ बोलते हुए कहा था कि वह उस दिन छुट्टी में था और बैंक नहीं आया था लेकिन सीसीटीवी फुटेज में गार्ड का झूठ पकड़ा गया लगभग 6 साल तक चले इस दिल दहला देने वाले कांड की अदालत मे सुनवाई के दौरान कई मोड़ आए एक और आरोपी के वकील आरोपी को निर्दोष सिद्ध करने में लगे हुए थे आखिर चंपावत के जिला सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल की अदालत ने हत्यारोपी गार्ड दिनेश सिंह बोहरा को दोनों हत्याओं का कसूरवार ठहराया और 29 जुलाई सोमवार को हत्यारे को उसके द्वारा की गई दो निर्दोष लोगों की हत्या की सजा सुनाई अदालत ने हत्यारे गार्ड को कठोर आजीवन कारावास व डेढ़ लाख रुपए जुर्माना की सजा सुनाई और इस कांड में मारे गए दोनों बैंक कर्मियों के परिजनों को इंसाफ दिया वही हत्यारे गार्ड को सजा दिलाने में सरकारी वकील विद्याधर जोशी की अहम भूमिका रही जिन्होंने अपनी ठोस दलीलों से गार्ड को आरोपी सिद्ध करते हुए जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा और परिजनों को इंसाफ दिलाया वहीं सूत्रों के मुताबिक उस दिन हत्यारा तत्कालीन शाखा प्रबंधक नरेश कुमार की हत्या करने आया हुआ था लेकिन किस्मत से शाखा प्रबंधक उस दिन छुट्टी लेकर पिथौरागढ़ गए हुए थे और बच गए अन्यथा उस दिन यह दोहरा नहीं तिहरा हत्याकांड होता इस घटना से शाखा प्रबंधक इतनी दहशत में आ गए थे कि उन्होंने खेतीखान से अपना तबादला करवा लिया था वही हत्यारे को अंजाम तक पहुंचने में पुलिस व राजस्व पुलिस की अहम भूमिका रही यह दौहरा हत्याकांड इतना भयानक था जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था खेतीखान क्षेत्र के लोग कई दिनों तक इस घटना के बारे में सोच कर ही दहसत मे रहे थे कोई भी इस घटना पर बात करने तक को तैयार नहीं था आखिर अदालत ने न्याय किया और हत्यारे को उसके करतूत की कठोर सजा दी और परिजनों को इंसाफ दिलाया वहीं लोगो के मुताबिक़ गार्ड सनकी किस्म का था जिसके कंधों पर बैंक की रक्षा करने का भार था उसने ही अपने ही दो साथियों को मौत के घाट उतार दिया इस कांड के बाद प्रशासन जागा और गार्ड रखने के नियमों में कई बदलाव किए गए