रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चम्पावत में जिला स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) गठित
Laxman Singh Bisht
Wed, Aug 12, 2026
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में चम्पावत में जिला स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) गठित
राजस्व विभाग के कब्जे वाली आरक्षित वन भूमि के गैर-वानिकी प्रयोजन हेतु आवंटन की होगी जांच

माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के आदेशों के अनुपालन में जनपद चम्पावत में राजस्व विभाग के कब्जे वाली आरक्षित वन भूमि, जिसे किसी निजी व्यक्ति अथवा संस्थान को गैर-वानिकी प्रयोजन हेतु आवंटित किया गया है, की जांच के लिए जिला स्तरीय विशेष जांच दल (Special Investigation Team-SIT) का गठन किया गया है।उच्चतम न्यायालय द्वारा राज्य सरकारों को आरक्षित वन भूमि के ऐसे प्रकरणों की जांच करने तथा नियमानुसार भूमि का कब्जा वापस लेकर वन विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जहां व्यापक जनहित में कब्जा वापस लिया जाना संभव न हो, वहां संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था से भूमि की लागत वसूल कर उक्त धनराशि का उपयोग वन विकास के कार्यों में किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होगी SIT
जनपद स्तर पर गठित विशेष जांच दल में जिलाधिकारी अध्यक्ष, अपर जिलाधिकारी सदस्य सचिव, उप जिलाधिकारी/वन बंदोबस्त अधिकारी सदस्य, जनपद के संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी सदस्य तथा अध्यक्ष द्वारा संबंधित विभागों से नामित अधिकारी विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे।
*राजस्व एवं वन विभाग के अभिलेखों की होगी विस्तृत जांच*
जिला स्तरीय एसआईटी द्वारा राजस्व विभाग, वन विभाग सहित संबंधित अन्य विभागों के अभिलेखों की विस्तृत जांच की जाएगी। इसमें विशेष रूप से ऐसे प्रकरणों की पहचान की जाएगी, जहां राजस्व विभाग के अधीन आरक्षित वन भूमि किसी निजी व्यक्ति अथवा संस्थान को गैर-वानिकी प्रयोजन के लिए आवंटित की गई हो।एसआईटी द्वारा तहसील, विकासखंड एवं ग्राम स्तर पर ऐसे आवंटनों का विवरण, आवंटित भूमि का क्षेत्रफल तथा आवंटन संबंधी आदेशों की प्रतियां संकलित की जाएंगी। साथ ही, ऐसे प्रकरणों की भी जानकारी जुटाई जाएगी, जिनमें आवंटित भूमि का कब्जा वापस लेना व्यापक जनहित में उचित न हो।इसके अतिरिक्त, संबंधित भूमि आवंटन से जुड़े न्यायालय में लंबित वादों एवं याचिकाओं की सूचना भी संकलित की जाएगी।जिला स्तरीय विशेष जांच दल की बैठक प्रत्येक सप्ताह आयोजित की जाएगी तथा शासन द्वारा निर्धारित प्रारूप में समस्त सूचनाओं का संकलन कर दो माह के भीतर राज्य स्तरीय समिति के सदस्य सचिव/सचिव, वन, उत्तराखण्ड शासन को उपलब्ध कराया जाएगा।जिलाधिकारी मनीष कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में सभी संबंधित अभिलेखों की गंभीरता एवं प्राथमिकता के साथ जांच करते हुए निर्धारित समय सीमा में तथ्यात्मक एवं पूर्ण रिपोर्ट तैयार की जाए।