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: चंपावत:प्रधान पति के हत्या आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी बचाव पक्ष के अधिवक्ता राम सिंह बिष्ट की दमदार पेरवी 

Laxman Singh Bisht

Tue, Jul 2, 2024
प्रधान पति के हत्या आरोपियों को कोर्ट ने किया बरी बचाव पक्ष के अधिवक्ता राम सिंह बिष्ट की दमदार पेरवी दिनांक 1.10.2021 को चंपावत जिले के नौलापानी निवासी गणेशराम ने चलथी चौकी में तहरीर देते हुए बताया 14.9.2021 कि रात को उसके चचेरे भाई प्रेम राम के पोते की नामकरण पार्टी में प्रेम राम के पुत्र कमल राम, महेश राम व नवीन राम के द्वारा उसके पुत्र जीवन लाल(प्रधान पति)को बुरी तरह लात घूसो से पीटा गया जिससे वह गम्भीर रूप से घायल हो गया जिसे गांव वालों की मदद से टनकपुर अस्पताल ले जाएगा जहां से उसे सुशीला तिवारी हल्द्वानी पहुंचाएगा तहरीर में बताया 16/ 9/ 2021 को हल्द्वानी से घर वापस लाते समय उसके बेटे जीवनलाल की मौत हो गई तहरीर पर चलथी चौकी पुलिस ने जांच कर आरोपी कमल राम व महेश राम के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा 304 आईपीसी 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपीयो को गिरफ्तार किया तथा तीसरा आरोपी नाबालिग होने से उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में चल रहा है इसके बाद मामला 26/11/ 2021 को चंपावत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई के लिए पहुंचा जरूरी कार्रवाई के बाद मामला जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में आया जहां विद्वान न्यायाधीश ने आईपीसी 302 के तहत वादी के विद्वान जिला शासकीय अधिवक्ता बी डी जोशी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता राम सिंह बिष्ट की दलीलों को सुना जिला शासकीय अधिवक्ता बीडी जोशी ने अपनी बहस में दलीलें रखते हुए कहा घटना अभियुक्त के घर पर ही घटी है, मृतक द्वारा अस्पताल ले जाते समय अपने पिता /वादी को बताया कि अभियुक्तगणों द्वारा उसे मारा गया है जहां चुटेल/ मृतक ने चोटे आना बताया वह गवाह ने पुष्ट किया है मेडिकल रिपोर्ट से स्पष्ट है की मृत्यु चोटे लगने के कारण हुई है अभियोजन द्वारा उक्त घटना अभियुक्त गणों द्वारा किया जाना साबित किया है अभियोजन द्वारा परीक्षित ,मौखिक साक्ष्य एवं दस्तावेज साक्ष्य से अभियुक्त गण के विरुद्ध आरोप संदेह से परे साबित होता है तथा अभियुक्त गण को दोष दोषी करार देते हुए कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग अदालत से की गई वहीं अभियुक्तों के विद्वान न्याय मित्र अधिवक्ता राम सिंह बिष्ट द्वारा बहस के दौरान निम्न बिंदुओं की ओर अदालत का ध्यान खींचा उन्होंने कहा वादी मुकदमा की तहरीर में अभियुक्त गण द्वारा घटना करने के किसी दुरासय या दुश्मनी का कोई उल्लेख नहीं किया गया है ,अभियुक्त गण अपने घर बुलाकर मृतक जो प्रधान पति था को क्यों मारेंगे ,प्रथम सूचना रिपोर्ट काफी विलंब से सोच विचार कर लिखी गई है तथा विलंब का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है अभियोजन द्वारा आज तक भी अभियुक्त गण द्वारा घटना कारित करने का कोई आशय दर्शित नहीं किया गया है तथा मौके पर 35/40 लोगों की उपस्थिति है पर कोई स्वतंत्र साक्षी पेश नहीं किया गया किसी भी गवाह ने अभियुक्त गणों को मृतक के साथ मारपीट करते हुए नही देखा पत्रावली पर अभियुक्त गणों के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं है अभियोजन अभियुक्त गण के विरुद्ध आरोप साबित नहीं कर सका है अपनी मजबूत दलीलों से अधिवक्ता राम सिंह बिष्ट ने अपने मुवकिल्लो को दोष मुक्त किए जाने की मांग अदालत से की वहीं विद्वान जिला सत्र न्यायाधीश अनुज कुमार संगल ने दोनों विद्वान अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला देते हुए कहा घटना में अभियोजन पक्ष कोई भी चश्मदीद गवाह पेश नहीं कर पाया नाही हत्या के कारण को साबित कर पाया वादी के मौखिक कथनों के अतिरिक्त कोई साक्ष्य अभियुक्त गणों के विरुद्ध नहीं है वादी घटना का साक्षी नहीं है वह जो साक्ष्य दे रहा है वह सुनी बातों के आधार पर दे रहा है उसके कथनों के समर्थन में कोई साक्ष्य पत्रावली पर नहीं है पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से अभियुक्त गण द्वारा मृतक के साथ मारपीट किए जाने के अभियोजन के कथानक की पुष्टि नहीं होती है तथा अभियोजन अभियुक्त गण के विरुद्ध अपने कथानक को साबित करने में सफल नहीं रहा है इसलिए न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि अभियुक्त कमलराम व महेश राम के विरुद्ध आरोप सिद्ध नहीं हुआ है इसलिए अदालत इन्हें दोष मुक्त किए जाने योग्य मानती इसलिए इन्हें बरी किया जाता है

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