रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट : पाटन-कनेड़ा में दुकान में घुसे साँप का वन विभाग ने किया सफल रेस्क्यू, सुरक्षित जंगल में छोड़ा
Laxman Singh Bisht
Fri, Jul 31, 2026
लोहाघाट : पाटन-कनेड़ा में दुकान में घुसे साँप का वन विभाग ने किया सफल रेस्क्यू, सुरक्षित जंगल में छोड़ा।

लोहाघाट। विकासखंड लोहाघाट के अंतर्गत पाटन-कनेड़ा क्षेत्र स्थित चौधरी जनरल स्टोर में उस समय हड़कंप मच गया, जब अचानक एक बड़ा साँप दुकान के अंदर घुस आया। दुकान में मौजूद ग्राहक और आसपास के लोग साँप को देखकर घबरा गए। हालांकि, स्थानीय लोगों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या नुकसान पहुँचाने का प्रयास नहीं किया और स्थानीय शशांक पांडेय ने इसकी सूचना वन विभाग को दी।

सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हुई। कुछ ही देर में टीम घटनास्थल पर पहुँची और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान शुरू किया। प्रशिक्षित कर्मचारियों ने बिना किसी अफरा-तफरी के अत्यंत धैर्य और पेशेवर तरीके से साँप को सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू के दौरान टीम ने यह सुनिश्चित किया कि न तो किसी व्यक्ति को कोई नुकसान पहुँचे और न ही वन्यजीव को किसी प्रकार की चोट आए।सफल रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम साँप को अपने साथ ले गई और उसके प्राकृतिक आवास के अनुकूल सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। इससे स्थानीय लोगों ने राहत की साँस ली, साथ ही वन्यजीव संरक्षण के प्रति विभाग की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी एक बार फिर सामने आई।घटना के बाद दुकान स्वामी अमित चौधरी ने वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और कार्यकुशलता की खुलकर सराहना की। लोगों का कहना था कि रेंजर रमेश जोशी के निर्देश पर विभाग की टीम ने समय पर पहुँचकर जिस शांत और व्यवस्थित तरीके से पूरे अभियान को पूरा किया, वह सराहनीय है। यदि घबराहट में कोई व्यक्ति स्वयं साँप को पकड़ने या मारने का प्रयास करता, तो कोई अप्रिय घटना भी हो सकती थी। ऐसे में वन विभाग की तत्परता ने एक बड़ी दुर्घटना को टाल दिया ।वन विभाग के अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि बरसात के मौसम में साँप और अन्य वन्यजीव भोजन तथा सुरक्षित स्थान की तलाश में रिहायशी क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। किसी भी वन्यजीव को मारने या स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें, क्योंकि यह न केवल जोखिम भरा है बल्कि वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से भी उचित नहीं है।पाटन-कनेड़ा की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जागरूक नागरिकों और सक्रिय वन विभाग के समन्वय से किसी भी संभावित खतरे को सुरक्षित तरीके से टाला जा सकता है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग की पूरी रेस्क्यू टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके कार्य की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।रेस्क्यू करने वाली टीम में रोहित मेहता,हिमांशु ढेक समेत पाटन के मनोज करायत,ललित अधिकारी,राजू बोहरा,कल्याण अधिकारी आदि लोग शामिल रहे ।