Friday 31st of July 2026

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लोहाघाट:आईटीबीपी 36वीं वाहिनी में स्थापित हुई औषधि वाटिका, हिमवीरों ने किया औषधीय पौधों का रोपण।

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रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:आईटीबीपी 36वीं वाहिनी में स्थापित हुई औषधि वाटिका, हिमवीरों ने किया औषधीय पौधों का रोपण।

Laxman Singh Bisht

Fri, Jul 31, 2026

आईटीबीपी 36वीं वाहिनी में स्थापित हुई औषधि वाटिका, हिमवीरों ने किया औषधीय पौधों का रोपण।

कैंसर का रोग जिसे लगा वहां ना व्यक्ति रह पाता है और ना ही धनपानी, जबकि प्रकृति ने हमारे आस-पास ही दी हुई है उसकी ओषधि।

लोहाघाट। आयुष विभाग एवं आईटीबीपी की 36वीं वाहिनी के संयुक्त प्रयास से शुक्रवार को वाहिनी परिसर में औषधि वाटिका (हर्बल गार्डन) की स्थापना की गई। इस दौरान सामूहिक रूप से विभिन्न औषधीय पौधों का रोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया गया। पौधारोपण अभियान का शुभारंभ कमांडेंट संजय कुमार ने किया।कमांडेंट ने कहा कि सीमा की सुरक्षा के दौरान हिमवीर कई बार ऐसी दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों के बीच से गुजरते हैं, जिनके गुणों की जानकारी के अभाव में उनका महत्व समझ नहीं पाते। उन्होंने कहा कि हर्बल गार्डन का उद्देश्य हिमवीरों और उनके परिवारों को औषधीय पौधों के गुणों की जानकारी देना, उनका संरक्षण करना तथा भविष्य में स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने इस पहल में सहयोग के लिए जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह, नोडल अधिकारी डॉ. सुधाकर गंगवार तथा उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह ने कहा कि औषधीय पौधों का ज्ञान प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं स्वस्थ रहने के साथ दूसरों के जीवन में भी स्वास्थ्य और खुशहाली ला सकता है। उन्होंने कमांडेंट संजय कुमार की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में औषधीय पौधों के संरक्षण के प्रति विशेष रुचि दिखाई जा रही है।उन्होंने बताया कि हरड़, बहेड़ा और आंवला के फल मिलकर त्रिफला बनाते हैं, जबकि सहजन (मोरिंगा) की पत्तियां रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती हैं। पत्थरचट्टा पथरी की समस्या में लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा किल्मोड़ा, गोखरू, कवैराल, अरंड, निर्गुंडी सहित अन्य औषधीय पौधों के गुणों की भी जानकारी दी गई।उन्होंने कहा कैंसर रोग के इलाज में परिवार उजड़ जाता है उसमें ना व्यक्ति रहता ना पैसा उन्होंने कहा कैंसर रोगी दवा हमारे आस पास प्रकृति ने दी है। नोडल अधिकारी डॉ. सुधाकर गंगवार ने कहा कि जड़ी-बूटियों का ज्ञान दिव्य ज्ञान के समान है और इस दिशा में आईटीबीपी द्वारा की गई पहल सराहनीय है।कार्यक्रम में द्वितीय कमान अधिकारी सुबे सिंह, उप सेनानी राजकुमार, सहायक सेनानी डॉ. शुभम मोहनपुरिया, डॉ. डीएस. गोवारी, एसी दीप सैनी, एसी अंकुर कुमार, एसी अक्षय गणपति, एसएम दिनेश बिष्ट सहित सभी हिमवीरों ने अपने-अपने नाम से औषधीय पौधे लगाए। आयुष विभाग की ओर से जिला फार्मेसी अधिकारी बी.पी. खनसाली, देवेंद्र पवार, अमन त्रिपाठी, उपेंद्र सिंह एवं महेंद्र चम्याल ने भी सहयोग किया।

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