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रिपोर्ट :लक्ष्मण बिष्ट : पाटी :पलायनग्रस्त गांव में तेंदुए की दहशत जनप्रतिनिधि नैन सिंह ने श्रमदान से बनाई मिसाल ।

Laxman Singh Bisht

Sun, Dec 7, 2025

पाटी पलायनग्रस्त गांव में तेंदुए की दहशत जनप्रतिनिधि नैन सिंह ने श्रमदान से बनाई मिसाल

बच्चों की सुरक्षा के लिए अकेले काटी लैंटाना की झाड़ियाँ, ग्रामीण समाज को दिया संदेश।पाटी। उत्तराखंड के पर्वतीय ग्रामीण अंचलों में जहाँ लगातार हो रहे पलायन के कारण कई गांव लगभग वीरान हो चुके हैं और सामाजिक सहयोग व श्रमदान की परंपराएं भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जा रही हैं, वहीं विकासखंड पाटी की ग्राम पंचायत बांस-बसवाड़ी से एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है।बीते कुछ दिनों से क्षेत्र में तेंदुए की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों और विशेषकर स्कूल जाने वाले बच्चों में भय का माहौल बना हुआ है। तेंदुए द्वारा गांव के दीपक सिंह की चार बकरियों तथा रेवती देवी की दुधारू गाय को अपना शिकार बनाए जाने के बाद यह भय और गहरा हो गया। इसी बीच ग्राम पंचायत स्थित राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय के चारों ओर लंबे समय से फैली लैंटाना (कुर्री) और जंगली झाड़ियों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी।विद्यालय परिसर और मुख्य मार्ग के आसपास उगी घनी झाड़ियों के कारण बच्चों को भय के वातावरण में आवागमन करना पड़ रहा था। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना था कि इन झाड़ियों के बीच छिपे जंगली जानवरों का खतरा हर समय बना रहता है, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा था।ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में विकासखंड पाटी के बांस-बसवाड़ी क्षेत्र से क्षेत्र पंचायत सदस्य, मात्र 30 वर्षीय नैन सिंह मेहता ने सामाजिक जिम्मेदारी का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने किसी सहायता की प्रतीक्षा किए बिना स्वयं ही विद्यालय के मुख्य मार्ग और परिसर के चारों ओर फैली लैंटाना की घनी झाड़ियों को काटकर साफ किया। उनका यह श्रमदान न केवल बच्चों के लिए राहत का कारण बना, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय भी बन गया।ग्रामीणों ने बताया कि जब अधिकांश युवा रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके हैं और सामूहिक श्रमदान जैसी परंपराएं लगभग समाप्तप्राय हो चुकी हैं, ऐसे समय में एक युवा जनप्रतिनिधि द्वारा अकेले आगे आकर जोखिम उठाना समाज के लिए प्रेरक संदेश है। नैन सिंह मेहता ने कहा कि बांस-बसवाड़ी क्षेत्र में लैंटाना जैसी झाड़ियाँ भूमि को बंजर बना रही हैं और साथ ही जंगली जानवरों के छिपने का सुरक्षित ठिकाना भी बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में ग्रामीणों को जागरूक कर इस कुर्री (लैंटाना) रूपी अभिशाप को जड़ से हटाने के लिए सामूहिक अभियान चलाया जाएगा, ताकि गांव और विद्यालय परिसर बच्चों तथा ग्रामीणों के लिए सुरक्षित बन सकें।आज जब ग्रामीण जीवन में सहयोग की भावना कमजोर पड़ती दिख रही है, ऐसे समय में नैन सिंह मेहता का यह प्रयास न केवल एक समस्या का समाधान है, बल्कि यह याद दिलाता है कि सार्थक नेतृत्व वही है जो संकट के समय सबसे पहले आगे खड़ा हो।प्रधानाध्यापक विनोद गिरी कहते हैं " आज के समय में यह सुखद आश्चर्य है एक युवा जनप्रतिनिधि स्वयं संज्ञान लेकर विद्यालय के प्रति संवेदनशील है और वित्तीय संसाधनों के अभाव सरकारी मदद का इंतजार किए बिना कुर्री की झाड़ियों को जड़ से उखाड़ कर बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करता है यह बहुत सुखद आश्चर्य है।

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