Wednesday 27th of May 2026

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लोहाघाट: पंचेश्वर घाटी क्षेत्र में तूफान का कहर आम व लीची के फलों को भारी नुकसान किसान मायूस।

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कुमाऊँ का डिजिटल बाज़ार: अब नौकरी, सेवाएँ, खरीद-बिक्री और मैट्रिमोनियल सब कुछ एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर

उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए KumaonBazaar.com तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यह एक ऐसा लोकल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ नौकरी, बिज़नेस प्रमोशन, लोकल सेवाएँ, खरीद-बिक्री, पर्यटन और मैट्रिमोनियल जैसी कई सुविधाएँ एक ही जगह उपलब्ध हैं। Website: https://www.kumaonbazaar.com

आज के समय में लोग लोकल स्तर पर भरोसेमंद सेवाएँ और अवसर ढूँढना चाहते हैं। इसी जरूरत को समझते हुए KumaonBazaar.com ने कुमाऊँ के लोगों के लिए एक आसान और उपयोगी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया है।

युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम

कुमाऊँ क्षेत्र के युवाओं को अक्सर नौकरी खोजने के लिए बड़े शहरों या कई अलग-अलग वेबसाइट्स पर निर्भर रहना पड़ता है। अब यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है क्योंकि KumaonBazaar Jobs Section पर लोकल और विभिन्न क्षेत्रों की जॉब्स उपलब्ध कराई जा रही हैं। Jobs Link: https://www.kumaonbazaar.com/jobs

यहाँ कंपनियाँ और बिज़नेस अपने जॉब पोस्ट कर सकते हैं, जबकि नौकरी तलाश रहे उम्मीदवार आसानी से आवेदन कर सकते हैं। इससे लोकल टैलेंट को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

मैट्रिमोनियल सेवा से आसान रिश्ते

आजकल लोग सुरक्षित और भरोसेमंद मैट्रिमोनियल प्लेटफ़ॉर्म की तलाश में रहते हैं। KumaonBazaar Matrimony कुमाऊँ समाज के लोगों के लिए एक विशेष सुविधा लेकर आया है जहाँ परिवार अपनी प्रोफाइल बनाकर रिश्तों की तलाश कर सकते हैं। Matrimony Link: https://www.kumaonbazaar.com/matrimony

यह सेवा खासतौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है जो अपने समाज और क्षेत्र में अच्छे रिश्ते ढूँढना चाहते हैं।

लोकल सेवाओं और बिज़नेस को मिलेगा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म कुमाऊँ के छोटे व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के लिए KumaonBazaar Services एक बेहतरीन अवसर बनकर उभर रहा है। Services Link: https://www.kumaonbazaar.com/services

यहाँ इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, टूर सर्विस, एजेंसी, फ्रीलांसर, दुकानदार और अन्य सेवा प्रदाता अपनी सेवाओं को ऑनलाइन प्रमोट कर सकते हैं। इससे लोकल बिज़नेस को डिजिटल पहचान मिलने के साथ-साथ ग्राहकों तक पहुँचने में आसानी होगी। खरीद-बिक्री और लोकल विज्ञापन की सुविधा प्लेटफ़ॉर्म पर Buy & Sell सेक्शन भी उपलब्ध है जहाँ लोग अपने प्रोडक्ट्स या सामान को ऑनलाइन पोस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा बिज़नेस प्रमोशन और लोकल विज्ञापनों के लिए भी सुविधा दी जा रही है, जिससे छोटे व्यवसाय कम लागत में अपनी पहुँच बढ़ा सकते हैं। पर्यटन और लोकल जानकारी का भी केंद्र कुमाऊँ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। KumaonBazaar.com पर पर्यटन से जुड़ी जानकारी, होटल, ट्रैवल सेवाएँ और लोकल बिज़नेस की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों को लाभ मिल सकता है। डिजिटल उत्तराखंड की ओर एक कदम डिजिटल इंडिया के दौर में लोकल प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ रही है। KumaonBazaar.com कुमाऊँ क्षेत्र के लोगों, युवाओं और व्यापारियों को डिजिटल रूप से जोड़ने का काम कर रहा है। यह प्लेटफ़ॉर्म आने वाले समय में रोजगार, व्यापार और लोकल नेटवर्किंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : पौड़ी :डॉक्टर दंपति ने उठाया स्थानांतरण व सेवा लाभ का मुद्दा, वीआरएस की मांग

Laxman Singh Bisht

Thu, Apr 2, 2026

पौड़ी :डॉक्टर दंपति ने उठाया स्थानांतरण व सेवा लाभ का मुद्दा, वीआरएस की मांग

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एक डॉक्टर दंपति ने अपनी तैनाती, स्थानांतरण नीति एवं सेवा संबंधी लाभों को लेकर शासन के समक्ष गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। इस संबंध में उन्होंने महा निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को एक विस्तृत प्रत्यावेदन सौंपते हुए न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित चिकित्सक ने पीजी (एमएस ऑर्थोपेडिक) पूर्ण करने के उपरांत शासनादेश संख्या 379892 दिनांक 17 मार्च 2026 के तहत उप जिला चिकित्सालय, कोटद्वार (पौड़ी) में तैनाती प्राप्त की। जबकि उन्होंने 01 जनवरी 2026 को ही दुर्गम क्षेत्र में तैनाती हेतु आवेदन किया था, जिस पर अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया।चिकित्सक का कहना है कि उन्होंने विभाग से विधिवत एनओसी लेकर पीजी कोर्स पूरा किया है। उनकी पत्नी वर्तमान में जिला चिकित्सालय, पौड़ी गढ़वाल में ईएनटी विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। ऐसे में उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुसार पति-पत्नी को एक ही स्थान पर तैनाती का लाभ मिलना चाहिए था, जो उन्हें नहीं दिया गया।गौरतलब है कि जिला चिकित्सालय, पौड़ी में आर्थोपेडिक विशेषज्ञ का पद वर्तमान में रिक्त है। इसके बावजूद संबंधित चिकित्सक की तैनाती वहां न कर उप जिला चिकित्सालय, कोटद्वार में की गई है, जिससे तैनाती प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।इसके अतिरिक्त, उपलब्ध जानकारी के अनुसार एनएचएम के अंतर्गत “यू-कोड वी पे” योजना के तहत एक आर्थोपेडिक चिकित्सक जिला चिकित्सालय पौड़ी में तथा दो चिकित्सक उप जिला चिकित्सालय कोटद्वार में पूर्व से कार्यरत हैं। वहीं, इन संविदा चिकित्सकों को 3-4 लाख रुपये प्रति माह तक का मानदेय दिया जा रहा है, जबकि नियमित चिकित्सकों को अपेक्षित लाभ एवं प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है।डॉक्टर दंपति ने यह भी उल्लेख किया है कि वे स्वयं 5-6 वर्षों तक दुर्गम क्षेत्र—जिला चिकित्सालय पौड़ी—में सेवाएं देने के इच्छुक हैं, बावजूद इसके उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के बावजूद मिलने वाले 50% अतिरिक्त वेतन (इंसेंटिव) से भी वंचित रखा गया है, जिससे उनके भविष्य के वेतन एवं अन्य लाभों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।दंपति ने अलग-अलग स्थानों पर तैनाती के कारण उत्पन्न मानसिक एवं पारिवारिक कठिनाइयों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इसका असर उनके कार्य प्रदर्शन पर पड़ रहा है। उन्होंने आर्थिक एवं मानसिक प्रताड़ना का हवाला देते हुए बांड की शर्तों में शिथिलता प्रदान कर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की अनुमति देने की भी मांग की है।

प्रत्यावेदन में शासन से तीन विकल्पों में से किसी एक पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया गया है—

1- आर्थोपेडिक चिकित्सक को दुर्गम क्षेत्र पौड़ी में पत्नी के साथ तैनाती देकर सभी संबंधित लाभ प्रदान किए जाएं।

2- वर्तमान तैनाती को यथावत रखते हुए दुर्गम क्षेत्र में मिलने वाले समस्त वित्तीय लाभ दिए जाएं।

3- उनकी पत्नी का स्थानांतरण कोटद्वार में ईएनटी विशेषज्ञ के रिक्त पद पर कर दोनों को एक ही स्थान पर तैनात किया जाए।

अंत में, डॉक्टर दंपति ने चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे।

कुल मिलाकर यह प्रकरण न केवल एक दंपति की व्यक्तिगत समस्या को दर्शाता है, बल्कि राज्य की स्थानांतरण नीति, सेवा न्याय एवं दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि शासन इस विषय में क्या निर्णय लेता है।

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