: सितारगंज:10 साल पहले मर चुके गैंगस्टर को पुलिस ने किया गिरफ्तार साथी की हत्या कर खुद का दिया रुप
Laxman Singh Bisht
Mon, Jul 1, 202410 साल पहले मर चुके गैंगस्टर को पुलिस ने किया गिरफ्तार साथी की हत्या कर खुद का दिया रुप
सितारगंज पुलिस ने दस वर्ष पूर्व अपने साथी की हत्या कर उसके शव का अपने नाम से पंचायतनामा करवाकर स्वयं का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले शातिर गैंगस्टर मुकेश यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके एक साथी को भी पकड़ा है। एसएसपी मंजुनाथ टी सी ने वारदात का खुलासा करने वाली टीम को 2500 रुपये इनाम देने की घोषणा की है। वही एसएसपी मंजूनाथ टीसी और एसपी सिटी मनोज कत्याल ने वारदात का खुलासा करते हुए बताया कि मुकेश यादव ने 29 जुलाई 2015 को अभियुक्त मुकेश यादव ने अपने ही गांव के रहने वाले मनिन्दर उर्फ मनी की सितारगंज क्षेत्र में हत्या कर शव को फिल्मी स्टाइल में वाहन से बूरी तरह से कुचलवा दिया। इसके बाद हत्या को दुर्घटना का रूप देकर अपनी पहचान मिटाने के लिए रचे गए षडयन्त्र मे परिजनों को शामिल कर लिया। शव को अपनी पहचान देने के लिये उसके कपड़ों में अपना आधार कार्ड व एक डायरी रखी। जिसमें अपने परिजनों का नम्बर दर्ज कर दिया। घटना की जानकारी के बाद परिजनों ने पूर्व नियोजित षडयंत्र के तहत मुकेश यादव के रूप में शव की पहचान की थी। पंचायतमाना व पोस्टमार्टम कराकर उसने स्वयं का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि मुकेश यादव पर कई कम्पनियों का कर्ज था। इसके अलावा उसके ऊपर यूपी में कई मुकदमे दर्ज थे। उस पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी हुई थी। उत्तर प्रदेश क्षेत्र में अपने ऊपर चल रहे विभिन्न अभियोगों को बन्द करवाने के उद्देश्य से उसने यह षडयन्त्र रचा जिसमें वह काफी हद तक सफल भी हुआ लेकिन कानून के लंबे हाथों से नहीं बच सका। बाद में उसने आधार कार्ड, ड्राईविंग लाइसेन्स, पासपोर्ट व अन्य अभिलेखों में अपना नाम मुनेश यादव दर्ज कराकर जिला शहजहाँपुर में रहने लगा।
सितारगंज पुलिस ने दस वर्ष पूर्व अपने साथी की हत्या कर उसके शव का अपने नाम से पंचायतनामा करवाकर स्वयं का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले शातिर गैंगस्टर मुकेश यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके एक साथी को भी पकड़ा है। एसएसपी मंजुनाथ टी सी ने वारदात का खुलासा करने वाली टीम को 2500 रुपये इनाम देने की घोषणा की है। वही एसएसपी मंजूनाथ टीसी और एसपी सिटी मनोज कत्याल ने वारदात का खुलासा करते हुए बताया कि मुकेश यादव ने 29 जुलाई 2015 को अभियुक्त मुकेश यादव ने अपने ही गांव के रहने वाले मनिन्दर उर्फ मनी की सितारगंज क्षेत्र में हत्या कर शव को फिल्मी स्टाइल में वाहन से बूरी तरह से कुचलवा दिया। इसके बाद हत्या को दुर्घटना का रूप देकर अपनी पहचान मिटाने के लिए रचे गए षडयन्त्र मे परिजनों को शामिल कर लिया। शव को अपनी पहचान देने के लिये उसके कपड़ों में अपना आधार कार्ड व एक डायरी रखी। जिसमें अपने परिजनों का नम्बर दर्ज कर दिया। घटना की जानकारी के बाद परिजनों ने पूर्व नियोजित षडयंत्र के तहत मुकेश यादव के रूप में शव की पहचान की थी। पंचायतमाना व पोस्टमार्टम कराकर उसने स्वयं का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि मुकेश यादव पर कई कम्पनियों का कर्ज था। इसके अलावा उसके ऊपर यूपी में कई मुकदमे दर्ज थे। उस पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी हुई थी। उत्तर प्रदेश क्षेत्र में अपने ऊपर चल रहे विभिन्न अभियोगों को बन्द करवाने के उद्देश्य से उसने यह षडयन्त्र रचा जिसमें वह काफी हद तक सफल भी हुआ लेकिन कानून के लंबे हाथों से नहीं बच सका। बाद में उसने आधार कार्ड, ड्राईविंग लाइसेन्स, पासपोर्ट व अन्य अभिलेखों में अपना नाम मुनेश यादव दर्ज कराकर जिला शहजहाँपुर में रहने लगा।