रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट महाविद्यालय में ऐपण लोक कला पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
Laxman Singh Bisht
Wed, Mar 18, 2026
लोहाघाट महाविद्यालय में ऐपण लोक कला पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित

लोहाघाट। स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय लोहाघाट में लोक अध्ययन केंद्र तथा कैरियर काउंसलिंग प्रकोष्ठ के तत्वावधान में कुमाऊँ की पारंपरिक ऐपण लोक कला पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ लोक कलाओं के माध्यम से स्वावलंबन की दिशा में प्रेरित करना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. संगीता गुप्ता ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की लोक कलाएँ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर हैं और युवाओं को इनके संरक्षण तथा संवर्धन में आगे आना चाहिए।कार्यशाला में अल्मोड़ा से पधारी मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध ऐपण कलाकार श्रीमती मीरा जोशी उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐपण कला की बारीकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए विभिन्न पारंपरिक आकृतियों और डिजाइनों से परिचित कराया तथा इस कला के माध्यम से स्वावलंबी बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सुश्री हेमलता वर्मा, सेवानिवृत्त प्रवक्ता एवं समाजसेवी भी उपस्थित रहीं, उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए अपनी प्रतिभा को पहचानने तथा पारंपरिक कलाओं के संरक्षण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।लोक अध्ययन केंद्र की संयोजक डॉ. ममता बिष्ट ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐपण केवल एक लोक कला नहीं बल्कि कुमाऊँ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है।कैरियर काउंसलिंग की ओर से डॉ. अर्चना त्रिपाठी और डॉ उमा कांडपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोक कलाओं में भी स्वरोजगार और रचनात्मकता की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमन पांडेय द्वारा किया गया। अंत में लोक अध्ययन केंद्र समिति की सदस्य डॉ. कमलेश शक्टा द्वारा सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण प्रो. अपराजिता, डॉ. लता कैडा, डॉ. रेखा जोशी, डॉ. सोनाली कार्तिक, डॉ. स्वाति कांडपाल, डॉ. रवि सनवाल सहित अन्य प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे। इस कार्यशाला में 25 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक कार्यशाला में भाग लेकर ऐपण कला की बारीकियों को सीखा। अंत में सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।