रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : उत्तराखंड:दायित्व धारी या सरकारी बोझ? जनता पूछ रही आखिर उपलब्धि क्या है?
Laxman Singh Bisht
दायित्व धारी या सरकारी बोझ? जनता पूछ रही आखिर उपलब्धि क्या है?
हूटर बजाती गाड़ियां मुख्यमंत्री के आगे पीछे दौरे और सरकारी सुविधा धरातल पर जनता के लिए किए गए काम का हिसाब कौन देगा?

उत्तराखंड में सत्ता की मेहरबानी से विभिन्न आयोगो, निगमो ,समितियो और संस्थानों में दायित्व पाने वालों को लेकर अब जनता के बीच सवाल उठने लगे हैं ।सरकार ने भरोसा जताकर इन लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी। लेकिन सवाल यह है कि इनमें से कितने दायित्वधारी वास्तव में जनता के लिए काम कर रहे हैं ?जनता की नाराजगी का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग अब खुले तौर पर पूछने लगे हैं भाजपा में किसी एक दायित्वधारी की ऐसी उपलब्धि बताइए जिससे आम जनता को सीधे लाभ मिला हो ।आरोप है कि कई दायित्व धारियो का काम सरकारी गाड़ियों में हूटर बजाते हुए दौरे करने, कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने, उदघाटन करने और मुख्यमंत्री के आसपास दिखाई देने तक सिमट गया है?सवाल यह है कि यदि जिम्मेदारी जनता की सेवा के लिए मिली है तो फिर जनता के बीच किए गए काम का रिपोर्ट कार्ड कहां है? इन दायित्वधारियों को मिलने वाली सुविधाओं पर सरकारी खजाने से हर माह बड़ी रकम खर्च होती है। वेतन ,मानदेय, वाहन, ईंधन, यात्रा ,आवास गनर ,कार्यालय और अन्य सुविधाओं को जोड़ तो एक दायित्वधारी पर हर माह लगभग 5 लाख रुपए से अधिक का खर्च होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल स्वाभाविक है सरकार के खजाने से लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं तो बदले में प्रदेश को क्या मिल रहा है? जनता का पैसा खर्च हो रहा है तो जनता को यह जानने का पूरा अधिकार भी होना चाहिए कि संबंधित दायित्वधारी ने अपने कार्यकाल में कितनी बैठक की कितने प्रस्ताव दिए कितने मामलों का समाधान कराया और सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में उनकी क्या भूमिका रही दायित्व से पहले और दायित्व मिलने के बाद। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिन लोगों पर भरोसा जताते हुए उन्हें दायित्व दिए हैं उनसे सरकार को भी अब जवाब देही तय करनी चाहिए ।दायित्व कोई राजनीतिक इनाम नहीं बल्कि जनता की सेवा की जिम्मेदारी है सरकार को प्रत्येक दायित्व धारी की की प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए। रिपोर्ट में साफ-साफ दर्ज होगी दायित्व मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति ने क्या काम जनता के लिए किया और उसके काम का जनता को क्या लाभ मिल रहा है। यदि कोई दायित्वधारी लगातार सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहा है लेकिन उसके खाते में कोई ठोस उपलब्धि नहीं है तो फिर ऐसे दायित्व पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रदेश की जनता अब सिर्फ सरकारी वाहनों के काफिले , हूटर और प्रोटोकॉल नहीं देखना चाहती है ।जनता देखना चाहती है कि उसके पैसे से नियुक्त किए गए दायित्वधारी ने उसके लिए किया क्या है? इसलिए धामी सरकार को चाहिए कि वह दायित्वधारी की उपलब्धियो की सार्वजनिक रिपोर्ट कार्ड जारी करें। इससे अच्छा काम करने वालो का सम्मान होगा और निष्क्रिय लोगों की जवाब देही भी तय होगी ।सवाल सिर्फ 5 लाख रुपए महीने के खर्च का नहीं है सवाल यह है कि जिस कुर्सी पर जनता के पैसे खर्च हो रहे हैं उस कुर्सी से जनता को मिला क्या ? ताकि हूटर की नहीं काम की आवाज सुनाई दे।
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