रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : उत्तर प्रदेश के मंत्रियों की तुलना में उत्तराखंड के मंत्रियों को रास नहीं आ रही है पहाड़ों की ठंडी आबो-हवा।
Laxman Singh Bisht
Fri, May 16, 2025
उत्तराखंड मंत्रिमंडल की तासीर एवं तामीर बदलने के लिए जरूरी है नए चेहरों को दिया जाए अवसर।
चंपावत। कल जिला योजना की बैठक जिले के बनबसा में आयोजित किए जाने के कारण सदा लोगों से गुलजार रहने वाला जिला कार्यालय व विकास भवन में दिनभर सन्नाटा छाया रहा । जिले के दुर्गम क्षेत्रों से आए उन लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा जिन्हें जिला योजना की बैठक की जानकारी नहीं थी। इसका असर टैक्सी संचालकों को भुगतना पड़ा। यहाँ आए लोगों की जुबान में कई सवाल तैर रहे थे। किसी को प्रभारी मंत्री रेखा आर्य के काम करने के तौर तरीकों पर तरस आ रहा था तो कोई कह रहा था कि उनका उत्तराखंड राज्य बनने के बाद मुख्यमंत्री को छोड़कर अपने निर्वाचन क्षेत्र में ही बंध कर रह गए हैं। इससे तो यूपी के मंत्री अच्छे थे जो न केवल यहां तसल्ली से दौरा कर आम लोगों की समस्या सुना करते थे और उसके परिणाम भी सामने आते थे। लेकिन अब उत्तराखंड में मंत्रियों का स्टाइल ही बदल गया है। लोगों ने मुख्यमंत्री के अलावा अन्य मंत्रियों के चेहरे मीडिया में भले ही देखे हो लेकिन उनसे मुखातिब होने का उन्हें अवसर बहुत ही कम मिलता है। जब प्रभारी मंत्री ही नहीं आती है तो और मंत्रियों के से क्या अपेक्षा की जा सकती है?युवा कांग्रेस के प्रान्तीय महामंत्री भुवन चौबे प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शंकर बोरा का कहना है कि मंत्रियों के रंग-ढंग के कारण आम लोगों को भारी कठिनाइयों के दौर से गुजरना पड़ रहा है। इन परिस्थितियों ने मुख्यमंत्री धामी के प्रस्तावित मंत्रिमंडल के विस्तार एवं पुनर्गठन को लेकर मौजूदा मंत्रियों में कुछ को छोड़कर शेष के स्थान पर नए चेहरे लाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इससे मंत्रिमंडल की तासीर व तामीर ही बदलने के साथ लोगों का जायका भी बदल जाएगा। चौबे का यह भी कहना है कि मंत्रियों की कार्य संस्कृति उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपो के कारण उनके प्रति लोगों का गुस्सा राख के अंदर छुपे अंगारो की तरह बना हुआ है। प्रभारी मंत्री ने तो सभी सीमाएं तोड़कर ऐसे स्थान में जिला योजना की बैठके कर ऐसी नई परंपरा शुरू की है जिसमें वह अपने खास लोगों को ही फायदा पहुंचा पाती है आम लोगों को नहीं। जब जिला योजना जैसी महत्वपूर्ण बैठक में विस्तृत चर्चा व परिचर्चा न होकर उसको यूही निपटा दिया जाए तो इससे लोगों को अंदाजा लगा लेना चाहिए कि माननीय मंत्री जी जिले को कैसा रूप देना चाहती है?