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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में कोविडकालीन ऑक्सीजन कंसंट्रेटर गायब! 130 मशीनें लौटकर नहीं आईं—जिम्मेदारी किसक

Laxman Singh Bisht

Sun, Nov 23, 2025

लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में कोविडकालीन ऑक्सीजन कंसंट्रेटर गायब!

130 मशीनें लौटकर नहीं आईं—जिम्मेदारी किसकी?

पीएम - सीएम फंड से मिली जीवनरक्षक मशीनें बिना लेखा-जोखा बांटी गईं, कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत।

पूर्व विधायक फर्त्याल ने भी जताई थी आपत्ति • ऑक्सीजन प्लांट और आईसीयू कोविड के बाद से बेकार पड़े।चंपावत। लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में कोविडकाल के दौरान मिले जीवनरक्षक ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों का कोई अता-पता नहीं है। यह खुलासा तब हुआ जब हाल में कुछ रोगियों ने कंसंट्रेटर की मांग की, लेकिन अस्पताल प्रशासन के पास देने के लिए एक भी मशीन उपलब्ध नहीं मिली। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री कोविड फंड से इस अस्पताल को 130 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराए गए थे, जिन्हें जरूरतमंद मरीजों को घर ले जाने की सुविधा दी गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ये मशीनें आज तक अस्पताल में वापस नहीं लौटीं।सरकारी संपत्ति, वह भी ऐसी जो सीधे जीवन बचाने से जुड़ी हो — आखिर किसने इतनी “दरियादिली” दिखाते हुए बांट दी? किसने इसके रिकॉर्ड तैयार किए? और किसकी जिम्मेदारी थी कि इन मशीनों को वापस लिया जाए? यह पूरा मामला अब गंभीर जांच का विषय बन गया है। यह भी प्रश्न उठ रहा है कि यदि किसी मरीज को आपात स्थिति में घर ले जाने की अनुमति दी गई थी तो उसके उपयोग के बाद उसे लौटाने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई? आखिर इन उपकरणों की निगरानी कौन करता था? मामले में पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने भी सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताते हुए इसे गंभीर लापरवाही बताया था। चर्चाएं यह भी हैं कि न केवल कंसंट्रेटर बल्कि कोविडकाल में मिले अन्य उपकरणों का भी चिकित्सा संस्थान में कोई ठोस लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है।इसी अवधि में अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट और आईसीयू भी स्थापित किए गए थे, लेकिन कोविड के बाद से ये भी उपयोग में नहीं आ रहे हैं। जबकि अस्पताल में निश्चेतक सहित आवश्यक चिकित्सकीय स्टाफ उपलब्ध है। विभाग समय-समय पर अस्पताल को बदहाल स्थिति से उबारने के दावे करता रहा है, लेकिन भीतर की वास्तविक स्थिति किसी “अंदरूनी हकीकत” की ओर इशारा करती है।

(सीएमएस ने माना कि आंक्सीजन कंसंट्रेटर गये है बाहर।)

चम्पावत। उप जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ बिराज रांठी ने माना कि आंक्सीजन कंसंट्रेटर चिकित्सालय के बाहर दिए गए हैं। लेकिन उन्हें उनका उपयोग होने के बाद वापिस नहीं लिया गया है। यह मामला उनके कार्यकाल का नहीं है अलबत्ता वे सारे कंसंट्रेटर चिकित्सालय में लाने का प्रयास कर रहे हैं।

(फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनने की चर्चाएं भी तेज।)

चंपावत। जिला चिकित्सालय में वर्ष 2021 से 2023 के बीच फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाए जाने की चर्चाएं भी लंबे समय से तैरती रही हैं। ये आरोप कितने सच हैं यह तो जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन लोहाघाट जैसे नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में डेमोग्राफिक परिवर्तन की चर्चाओं के बीच यह एक गंभीर संकेत माना जा रहा है। इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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