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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:किसान का बेटा ही मवेशीयों के मर्म व दर्द को जानता है डॉ जेपी यादव बने गाय के लिए देवदूत।

Laxman Singh Bisht

Sun, Feb 8, 2026

किसान का बेटा ही मवेशीयों के मर्म व दर्द को जानता है डॉ जेपी यादव बने गाय के लिए देवदूत।

रविवार की छुट्टी में भी निभाया धर्म, जटिल ऑपरेशन कर गर्भ में फंसे बछड़े को निकाल बचाई गाय की जान।कहते हैं कि मवेशियों का असली महत्व वही समझ सकता है, जो खुद किसान का बेटा हो। और जब वही किसान का बेटा डॉक्टर बन जाए, तो मनुष्य ही नहीं बल्कि बेजुबान जानवरों के प्रति भी उसका दायित्व और संवेदना स्वतः जागृत हो जाती है। ऐसा ही उदाहरण एक बार फिर लोहाघाट के राजकीय चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेपी यादव ने पेश किया, जिन्होंने रविवार की छुट्टी के दिन भी मानवता और पशु-प्रेम की मिसाल कायम की।रविवार को डॉ. जेपी यादव अपने घर खटीमा आए हुए थे। उसी दौरान चंपावत जिले के रमक गांव निवासी कार्तिक जोशी की गाय नानकमत्ता क्षेत्र की वर्कडंडी ग्राम सभा में प्रसव के दौरान गंभीर रूप से फंस गई। कई प्रयासों और उपचार के बाद भी गाय की हालत में कोई सुधार नहीं हो पाया। स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी और गाय की जान पर संकट मंडराने लगा।इसी बीच किसी ने सूचना दी कि संभवतः डॉ. जेपी यादव खटीमा में ही हैं। तत्काल उनसे संपर्क किया गया। सूचना मिलते ही डॉ. यादव ने बिना समय गंवाए मदद के लिए निकलने का निर्णय लिया। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि गाय के गर्भ में बछड़े की स्थिति अत्यंत गंभीर थी, आंखें अंदर की ओर फटी हुई थीं और उसे बाहर निकालना बेहद कठिन और जोखिम भरा था। हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, डॉ. यादव ने हिम्मत नहीं हारी। खून से कपड़े लथपथ हो जाने के बावजूद उन्होंने उसकी परवाह नहीं की और पूरी सावधानी व धैर्य के साथ जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। आखिरकार कई घंटे से जिंदगी और मौत से जूझ रही गाय के पेट से मरा हुआ बछड़ा बाहर निकाला गया, जिससे गाय की जान बच सकी।डॉ. यादव के अथक प्रयासों के बाद गाय अब पूरी तरह स्वस्थ है और चारा-दाना व पानी ले रही है। इस सफल उपचार से न केवल गाय को जीवनदान मिला, बल्कि उसके पालक कार्तिक जोशी और परिवार को भी बड़ी राहत मिली। भावुक पशुपालक के लिए शब्द कम पड़ गए और उन्होंने कहा “डॉक्टर साहब, आप मेरे लिए और मेरी गाय के लिए देवदूत बनकर आए हैं।”डॉ. जेपी यादव की यह पहल एक बार फिर साबित करती है कि सच्चा डॉक्टर वही होता है, जो अपने पेशे को केवल नौकरी नहीं बल्कि सेवा और धर्म मानता है।

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