रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:आदर्श चंपावत के लोहाघाट विधानसभा के सड़क विहीन शील गांव की दर्द भरी पुकार क्या हम भारत के नागरिक नहीं हैं
Laxman Singh Bisht
Tue, Jun 23, 2026
आदर्श चंपावत के लोहाघाट विधानसभा के सड़क विहीन शील गांव की दर्द भरी पुकार क्या हम भारत के नागरिक नहीं हैं
मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद नहीं पहुंची सड़क 10 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर ग्रामीण।

ग्रामीणों की मुख्यमंत्री, सांसद विधायक व डीएम चंपावत से गांव तक सड़क पहुंचाने की गुहार।
समय से अस्पताल न पहुंचने के कारण बच्चे की हो चुकी है मौत।
गर्भवती महिलाओं के जंगल में हो चुके हैं प्रसव के बावजूद भी नहीं ली जा रही सुध।
8 से 10 किलोमीटर पैदल चल बच्चे पहुंचते हैं स्कूल।

आज जहां देश चांद पर पहुंच चुका है पर वहीं आजादी के 76 साल बाद भी चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के शील गांव के ग्रामीण एक सड़क के लिए बरसों से संघर्ष कर रहे हैं। पर 3 साल पूर्व मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद आज तक गांव में सड़क नहीं पहुंच पाई है। जिसका खामियाजा ग्रामीण कई रूप में भुगत रहे है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी , सांसद अजय टम्टा, विधायक खुशाल सिंह अधिकारी, जिलाधिकारी चम्पावत, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण निर्माण विभाग तथा उत्तराखंड सरकार से उनकी आवाज़ सुनने की गुहार लगाई है कहा क्या हम भारत के नागरिक नहीं है। शील के ग्रामीणों ने कहा। शायद हमारी यह पुकार उन लोगों तक पहुँच जाए जिनके हाथों में फैसले लेने की शक्ति है। कहा आज देश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। जगह जगह नई सड़कें बन रही हैं, नए शहर बस रहे हैं, नई योजनाएँ शुरू हो रही हैं। लेकिन हमारा गाँव आज भी सड़क व अन्य बुनियादी सुविधाओ का इंतजार कर रहा है जो देश के अधिकांश लोगों को वर्षों पहले मिल चुकी है सड़क। ग्रामीणों ने कहा सबसे दुखद बात यह है कि हमारे गाँव तक कच्ची सड़क भी नहीं है। आज भी हमें मुख्य सड़क तक पहुँचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर पैदल जंगलों, पहाड़ों और कठिन रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। यह केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि हमारे जीवन का रोज़ का संघर्ष है।जब सुबह बच्चे स्कूल के लिए निकलते हैं तो उनके सामने लंबा पैदल सफर होता है जंगली जानवरों का डर सताता है। जब बुजुर्गों को दवा की जरूरत पड़ती है तो उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जब किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने ले जाते हैं तो उन्हें अपनी उपज सिर और पीठ पर ढोकर ले जानी पड़ती है। ग्रामीणों ने कहा लेकिन सबसे दर्दनाक स्थिति तब होती है जब कोई बीमार पड़ जाता है। रात के अंधेरे में किसी माँ की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, किसी बुजुर्ग को दिल का दौरा पड़ जाए, किसी बच्चे को तेज बुखार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ जाए। उस समय हमारे पास एम्बुलेंस नहीं पहुँच सकती कोई वाहन नहीं पहुँच सकता क्योंकि हमारे पास सड़क ही नहीं है।कई बार लोगों को चारपाई, डोली मे कंधों पर उठाकर जंगल और पहाड़ के रास्तों से दस किलोमीटर तक की खड़ी चढ़ाई पारकर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा यह केवल परेशानी नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच का संघर्ष है। ग्रामीणों ने कहा शील गाँव के लोग भी इस देश के नागरिक हैं। हम भी टैक्स देने वाले किसानों, मजदूरों और मेहनतकश परिवारों का हिस्सा हैं। हमारे बच्चों के भी सपने हैं। हमारी माताओं और बुजुर्गों को भी सुरक्षित जीवन का अधिकार है।फिर आखिर क्यों हमारा गाँव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है?क्या पहाड़ में रहने वाले लोगों का जीवन कम महत्वपूर्ण है?क्या जंगल के बीच बसे गाँवों को विकास का अधिकार नहीं है?
क्या हमें केवल चुनाव के समय याद किया जाएगा? ग्रामीणों ने कहा हम किसी से विशेष सुविधा नहीं मांग रहे। बल्कि हम अपना अधिकार मांग रहे हैं हम केवल इतना चाहते हैं कि हमारे गाँव को भी सड़क से जोड़ा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ वहीकठिनाइयाँ न झेलें जो हम वर्षों से झेलते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा मुख्यमंत्री उत्तराखंड के विकास के लिए अनेक कार्य किए हैं। हमें विश्वास है कि यदि आपकी नजर हमारे गाँव की इस समस्या पर पड़ेगी तो अवश्य समाधान निकलेगा। जबकि आप सड़क की घोषणा तीन वर्ष पूर्ण कर चुके हैं। ग्रामीणों ने सांसद अजय टम्टा, विधायक लोहाघाट से कहा आप लोग क्षेत्र की आवाज़ हैं। हम आपसे निवेदन करते हैं कि एक बार ग्राम शील के लोगों की पीड़ा को समझिए। एक बार इस 10 किलोमीटर पैदल रास्ते मे चलकर देखिए। तब आपको एहसास होगा कि सड़क हमारे लिए सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी व संबंधित विभागों से अनुरोध करते हुए कहा शील गाँव का स्थलीय निरीक्षण कर सड़क निर्माण की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करें। कहा हम हाथ जोड़कर केवल इतना कहना चाहते हैं हमें दया नहीं, हमारा अधिकार चाहिए। हमें वादे नहीं, सड़क चाहिए। हमें आश्वासन नहीं, विकास चाहिए। कहा ग्राम शील की यह पुकार केवल सड़क की मांग नहीं है, बल्कि सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य की मांग है।"जब तक सड़क नहीं, तब तक विकास अधूरा है।"ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपनी घोषणा अनुरूप गांव तक सड़क पहुंचने की मांग की है। कहा चंपावत आदर्श जनपद तब कहलाएगा जब गांव गांव सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा स्वास्थ्य की सुविधा पहुंचेगी। देखने वाली बात यह है कि आज से तीन से चार वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा सील गांव तक सड़क बनाने की घोषणा की गई थी जो फिलहाल अभी तक घोषणा ही साबित हो रही है। समय से अस्पताल न पहुंचने के कारण एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है पर उसके बावजूद शासन प्रशासन जागने को तैयार नहीं है। ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब देखना है सरकार कब ग्रामीणों की सुध लेती है।