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: चंपावत:रोड ना होने से बुजुर्ग की गई जान समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से रास्ते में तोड़ा दम/दस किलोमीटर डोली से लाए ग्रामीण / आदर्श चंपावत का दुर्भाग्य कब जागेगी सरकार

Laxman Singh Bisht

Thu, Feb 27, 2025
रोड ना होने से बुजुर्ग की गई जान समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से रास्ते में हुई मौत दस किलोमीटर डोली से लाए ग्रामीण आदर्श चंपावत का दुर्भाग्य कब जागेगी सरकार आदर्श जिला चंपावत में गांव में रोड ना होने का खामियाजा बुजुर्ग को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा मामला चंपावत जिले के पाटी ब्लॉक के दुरुस्त खेरकुड़ा का है जहां रमक के ग्राम पंचायत प्रशासक मंगल जोशी के पिता त्रिलोक चंद्र जोशी (67) की अचानक तबियत बिगड़ गई ग्रामीणों ने बुजुर्ग को खेरकूड़ा तोक से लगभग 10 किलोमीटर उबड़ खाबड़ रास्ते से डोली के सहारे रमक तक पहुंचाया जिसमें ग्रामीणों को 4 घंटे से अधिक का समय लग गया जिस कारण बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ने लगी रमक से वाहन के जरिए चंपावत जिला अस्पताल ले जाने के दौरान बुजुर्ग ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया क्षेत्र के ग्रामीण भुवन चंद्र ,नीलांबर अटवाल, नरेश चंद्र ,परमानंद, गिरीश जोशी , पानदेव जोशी ,मंगल जोशी आदि ने कहा अगर आज उनके गांव तक सड़क होती तो समय रहते वह लोग मरीज को अस्पताल पहुंचा पाते और समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच जाती लोगों ने कहा आजादी के 76 वर्ष बीत जाने के बावजूद उनके गांव में आज तक सड़क नहीं पहुंची उन लोगों के द्वारा कई बार सड़क की मांग शासन प्रशासन से की गई पर किसी के द्वारा भी उनकी कोई सुध नहीं ली गई रोड ना होने का खामियाजा वह लोग आए दिन भुगत रहे हैं कहा गांव की गर्भवती महिलाओं , मरीजो को उन्हें खतरनाक रास्तों से दस किलोमीटर डोली के सहारे रोड तक पहुंचाना पड़ता है सड़क की कमी के चलते गांव से बड़ी संख्या में पलायन हो चुका है पर सरकार व प्रशासन से कई बार गांव में सड़क बनाने की गुहार लगाई पर किसी के द्वारा भी समस्या का समाधान नहीं किया ग्रामीणों ने कहा यह मुख्यमंत्री का कैसा आदर्श चंपावत है जहां सड़क के अभाव में मरीज अपनी जान गवा रहे हैं और सरकार सोई हुई है ग्रामीणों ने कहा अगर जिले को आदर्श बनाना है तो पहले सरकार गांवो का विकास करें और गांव से पलायन को रोके मामले को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी है ग्रामीणों ने  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री अजय टम्टा से गांव तक सड़क पहुंचाने की मांग की है मालूम हो इस समय मुख्यमंत्री के आदर्श जिला चंपावत में कई गांव व तोक आज भी ऐसे हैं जहां आज भी ग्रामीण सड़क के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं पर सुनने को कोई तैयार नहीं है ना ही सरकार और ना अधिकारी ना मालूम कब बदलेगी इन गांवो की तस्वीर और तकदीर सड़क के अभाव में ना मालूम कितने लोगों को अभी और अपनी जान गंवानी पड़ेगी मामला काफी शर्मनाक है और धन्य है गांव के युवा जो डोली के सहारे मरीजो व गर्भवती महिलाओं को पहुंचाते हैं पिछले वर्ष भी आदर्श जिला चंपावत के बाराकोट ब्लॉक सील गांव के बच्चे की डोली के सहारे अस्पताल लाने के दौरान मौत हो गई थी लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद आज तक सील गांव के लिए सड़क नहीं बन पाई

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