: लोहाघाट:1962 एंबुलेंस सेवा गाय के लिए बनी देवदूत
Laxman Singh Bisht
Fri, Feb 7, 2025
1962 एंबुलेंस सेवा गाय के लिए बनी देवदूत
1962 एम्बुलैंस एक बार फिर गाय के लिए देवदूत बन सामने आई शुक्रवार दोपहर को लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत मडलक के मझपीपल निवासी आशा देबी ने 1962 मे फोन कर बताया उनकी गाय पिछले 18 दिन से बैठी हुई है और गाय का बच्चा होने वाला है वाली कॉल का तुरंत संज्ञान लेते हुए लोहाघाट पशु चिकित्सालय की 1962 एम्बुलेंस में तुरंत डॉ जतिन खर्कवाल , ट्रेनी डा0आरती मेहरा , विदुषी पुनेठा , पायलट गोविंद तिवारी तथा पंकज आर्या मचपीपल पहुंचे तथा गय का इलाज करना शुरू किया तो पता चला कि बच्चा पेट मे ही लगभग 6 घंटे पहले ही मर चुका है जिस कारण गाय की जान भी खतरे में आ चुकी थी मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ खर्कवाल की टीम ने बच्चा निकालने का काम शुरू किया गया और 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मरा हुए बछड़े को निकाला लिया गया तथा गाय की नाजुक स्थिति को देखते हुए गाय का इलाज शुरू किया गया वही गाय की मालकिन आशा देबी ने 1962 टीम को धन्यवाद देते हुए सरकार द्वारा चलाई गई इस योजना की सराहना की
1962 एम्बुलैंस एक बार फिर गाय के लिए देवदूत बन सामने आई शुक्रवार दोपहर को लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत मडलक के मझपीपल निवासी आशा देबी ने 1962 मे फोन कर बताया उनकी गाय पिछले 18 दिन से बैठी हुई है और गाय का बच्चा होने वाला है वाली कॉल का तुरंत संज्ञान लेते हुए लोहाघाट पशु चिकित्सालय की 1962 एम्बुलेंस में तुरंत डॉ जतिन खर्कवाल , ट्रेनी डा0आरती मेहरा , विदुषी पुनेठा , पायलट गोविंद तिवारी तथा पंकज आर्या मचपीपल पहुंचे तथा गय का इलाज करना शुरू किया तो पता चला कि बच्चा पेट मे ही लगभग 6 घंटे पहले ही मर चुका है जिस कारण गाय की जान भी खतरे में आ चुकी थी मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ खर्कवाल की टीम ने बच्चा निकालने का काम शुरू किया गया और 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मरा हुए बछड़े को निकाला लिया गया तथा गाय की नाजुक स्थिति को देखते हुए गाय का इलाज शुरू किया गया वही गाय की मालकिन आशा देबी ने 1962 टीम को धन्यवाद देते हुए सरकार द्वारा चलाई गई इस योजना की सराहना की