रिपोर्ट लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग ही नैतिक मूल्यों के संरक्षण का आधार: नरेश चंद्र जोशी।
Laxman Singh Bisht
Tue, Jan 20, 2026
सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग ही नैतिक मूल्यों के संरक्षण का आधार: नरेश चंद्र जोशी।
लोहाघाट। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान लोहाघाट में बदलते परिदृश्य एवं नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित दो दिवसीय रास्ट्रीय सेमिनार में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, पासम के सहायक अध्यापक और शैलेश मटियानी पुरुस्कार प्राप्त शिक्षक नरेश चंद्र जोशी ने अपने नवीनतम शोध पत्र "नैतिक मूल्यों पर सोशल मीडिया का प्रभाव" में वर्तमान डिजिटल युग में मानवीय संवेदनाओं और नैतिक आचरण के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया जहाँ सूचना और संवाद का सशक्त माध्यम है वहीं इसका असंतुलित उपयोग समाज की नैतिक नींव को कमजोर कर रहा है।अपने शोध में श्री जोशी ने बताया कि सोशल मीडिया के कारण सत्य और ईमानदारी जैसे मूल्यों में गिरावट आई है। भ्रामक सूचनाओं और झूठी खबरों का तेजी से फैलना समाज की सत्यनिष्ठा को प्रभावित कर रहा है, इसके साथ ही ट्रोलिंग, गाली-गलौज और नफरत भरी भाषा ने समाज की संवेदनशीलता और सहिष्णुता को घटा दिया है। वर्चुअल दुनिया में बढ़ते संबंधों के कारण वास्तविक मानवीय संपर्क कम हो रहा है, जिससे सहानुभूति और सम्मान जैसे गुण लुप्त होते जा रहे हैं। जोशी के शोध के अनुसार, सोशल मीडिया पर अश्लीलता और दिखावे के बढ़ते चलन से अनैतिक व्यवहार का सामान्यीकरण हो रहा है,साइबर बुलिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न युवाओं में मानसिक तनाव और उनके नैतिक विकास में गंभीर बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।हालाँकि नरेश जोशी ने सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि यदि इसका उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से किया जाए, तो यह सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनचेतना जगाने, मानवाधिकारों के संरक्षण और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का एक बेहतरीन मंच है। इसके माध्यम से परोपकार और सेवा भाव की प्रेरणादायक कहानियाँ लोगों को सकारात्मक आचरण के लिए प्रेरित कर सकती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि नैतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए डिजिटल साक्षरता, समय का संतुलित प्रबंधन और जीवन-मूल्य शिक्षा का समावेश अनिवार्य है,उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे बच्चों को सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करें ताकि एक संवेदनशील और सशक्त समाज का निर्माण हो सके।