रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:स्मृतियों से संवाद कराएगा जीआईसी लोहाघाट का पुरातन छात्र सम्मेलन-शशांक पाण्डेय
Laxman Singh Bisht
Mon, Feb 9, 2026
स्मृतियों से संवाद कराएगा जीआईसी लोहाघाट का पुरातन छात्र सम्मेलन-शशांक पाण्डेय
लोहाघाट क्षेत्र की शैक्षिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का पर्याय बन चुका बेनी राम पुनेठा राजकीय इंटर कॉलेज आज एक ऐसे ऐतिहासिक पड़ाव पर खड़ा है, जो केवल इस विद्यालय के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। स्थापना के 70 वर्षों से भी अधिक समय बाद, इस प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में 11 फ़रवरी को पहली बार पुरातन छात्र सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन स्मृतियों, मूल्यों, उपलब्धियों और भविष्य की आशाओं का जीवंत उत्सव है।यह वही विद्यालय है जिसने उस दौर में शिक्षा की मशाल थामी, जब न तो संसाधन प्रचुर थे और न ही सुविधाएँ सहज। उस समय उत्तराखण्ड राज्य का गठन भी नहीं हुआ था और यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के अंतर्गत आता था, फिर भी बेनी राम पुनेठा राजकीय इंटर कॉलेज अपनी गुणवत्ता, अनुशासन और परिणामों के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध हुआ करता था। पहाड़ के दुर्गम भूगोल और सीमित साधनों के बीच इस विद्यालय ने यह सिद्ध किया कि सच्ची शिक्षा भवनों या साधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि वह शिक्षक के समर्पण और छात्रों की लगन से जन्म लेती है।इस विद्यालय ने वर्षों के अपने सफर में समाज को असंख्य काबिल और कर्मठ नागरिक दिए हैं। यहाँ से पढ़कर निकले छात्र आज प्रशासनिक सेवाओं, सेना, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, न्यायपालिका, राजनीति, पत्रकारिता, कला-संस्कृति और समाजसेवा जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन सभी की सफलता के मूल में कहीं न कहीं इस विद्यालय के वे संस्कार, अनुशासन और मूल्य निहित हैं, जो कक्षा-कक्षों से आगे जीवन की हर परीक्षा में मार्गदर्शक बने।बेनी राम पुनेठा राजकीय इंटर कॉलेज की पहचान केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रही। इस विद्यालय ने सदैव चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रबोध को शिक्षा का अभिन्न अंग माना। यहाँ के शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने विद्यार्थियों को सोचने, प्रश्न करने और समाज के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा दी। यही कारण है कि इस विद्यालय से निकले विद्यार्थी जहाँ भी गए, उन्होंने अपने आचरण और कार्य से अपने शिक्षालय की गरिमा को बनाए रखा।अब, जब यह विद्यालय अपने गौरवपूर्ण इतिहास के सात दशक से अधिक पूरे कर चुका है, तो पुरातन छात्र सम्मेलन के माध्यम से अतीत की स्मृतियों को सहेजने और भविष्य की दिशा तय करने का यह एक अत्यंत सार्थक प्रयास है। यह सम्मेलन उन दिनों को याद करने का अवसर देगा, जब इन्हीं कक्षाओं में सपने बुने गए थे, इन्हीं प्रांगणों में मित्रताएँ गहरी हुई थीं और शिक्षकों के सान्निध्य में जीवन की दिशा तय हुई थी।11 फ़रवरी को आयोजित यह सम्मेलन पूर्व छात्रों, सेवानिवृत्त एवं वर्तमान शिक्षकों, तथा विद्यालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हर व्यक्ति को एक साझा मंच प्रदान करेगा। यह अवसर न केवल पुराने साथियों से मिलने का होगा, बल्कि नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को यह दिखाने का भी होगा कि एक विद्यालय किस प्रकार जीवन भर की पहचान बन जाता है। इस ऐतिहासिक आयोजन के माध्यम से यह संदेश भी दिया जा रहा है कि विद्यालय और उसके पूर्व छात्रों का रिश्ता केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह जीवन भर चलता है। पूर्व छात्रों के अनुभव, सुझाव और सहयोग आने वाले समय में इस विद्यालय को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।अतः बेनी राम पुनेठा राजकीय इंटर कॉलेज, लोहाघाट से शिक्षा प्राप्त कर चुके सभी पूर्व छात्र-छात्राओं से विनम्र आग्रह है कि वे 11 फ़रवरी को इस प्रथम पुरातन छात्र सम्मेलन में अवश्य सम्मिलित हों। आइए, अपनी स्मृतियों को फिर से जीवंत करें, अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और उस विद्यालय को सम्मान दें, जिसने हमें सोचने, समझने और आगे बढ़ने की दिशा दी।यह सम्मेलन अतीत को नमन और भविष्य को संकल्प का प्रतीक बने—यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
(लेखक लोहाघाट निवासी हैं एवं जीआईसी लोहाघाट के पूर्व में टॉपर रहे है)