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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : लोहाघाट:क्रांतिकारी छात्र नेता राज्य आंदोलनकारी निर्मल पंडित को उनकी 27 वी पुण्यतिथि में किया गया याद।

Laxman Singh Bisht

Fri, May 16, 2025

क्रांतिकारी छात्र नेता राज्य आंदोलनकारी निर्मल पंडित को उनकी पुण्यतिथि में किया गया याद। शराब विरोधी आंदोलन मे किया था आत्मदाह।जब उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करता था उस दौर में उत्तराखंड राज्य आंदोलन सहित विभिन्न आंदोलनों में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले युवा और क्रांतिकारी छात्र नेता निर्मल पंडित जो सदैव ही जन आंदोलनों में अपनी अग्रणीय भूमिका निभाया करते थे।पिथौरागढ़ में शराब विरोधी आंदोलन में सरकार और प्रशासन के रवैए से खिन्न होकर उन्होंने आत्मदाह कर लिया था ।जिसमें निर्मल पंडित बुरी तरह झुलस गए थे। दिल्ली में इलाज के दौरान उनका देहांत हो गया था। आज इस क्रांतिकारी नेता की 27 वी पुण्यतिथि है। निर्मल पंडित की पुण्यतिथि में पिथौरागढ़ विधायक मयूख महर, भुवन जोशी,लक्ष्मण बिष्ट, ऋषि राज खर्कवाल, महीराज गर्व्याल ,नदीम परवेज , मनीष बुड़ाथोकी, धीरेंद्र राय ,रमेश देव सहित कई लोगों ने निर्मल पंडित को श्रद्धांजलि दी। कहा आज प्रदेश ने निर्मल पंडित को भुला दिया है लेकिन पंडित हम लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। उनके द्वारा पहाड़ के हित में किए गए कार्यों को कभी नहीं भुलाया जा सकता है उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने पहाड़ की भलाई के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी। कहा निर्मल पंडित जैसे नेता कभी-कभी पैदा होता है। मालूम हो उस जमाने में निर्मल पंडित युवाओं के दिलों में राज करते थे। अफसर शाही व माफियाओं में उनका बड़ा खौफ हुआ करता था। निर्मल पंडित पिथौरागढ़ महाविद्यालय छात्र संघ के एक बार अध्यक्ष तथा दो बार महासचिव रहे ।निर्मल पंडित की मौत पर कई लोगों का कहना है निर्मल की मौत स्वाभाविक नहीं थी बल्कि माफियाओं के द्वारा उनकी हत्या कराई गई थी। लोगों ने कहा अगर आज निर्मल पंडित जिंदा होते तो उत्तराखंड की राजनीति के सबसे बड़े सितारे होते। राज्य आंदोलन के दौरान निर्मल पंडित और उनके साथियों ने मुलायम सिंह की पुलिस का डठ कर सामना किया था। बच्चे बच्चे की जुबान पर पंडित का नाम रहता था। पंडित के साथी बताते है राज्य आंदोलन के दौरान पंडित ने उत्तराखंड सरकार का गठन किया था जिसमें वह मुख्यमंत्री बने थे और उनकी गाड़ी में मुख्य मंत्रीउत्तराखंड का बोर्ड लगा रहता था हालांकि वह गाड़ी मुलायम सरकार के किसी विभाग से छीनी हुई होती थी। शरीर से कमजोर पंडित दिल से बहुत मजबूत थे। कहा आज पंडित को भुला दिया गया है ।लेकिन राज्य आंदोलन के उनके साथी उन्हें हमेशा याद रखते हैं। उनके कई साथी ऐसे हैं जिन्हें राज्य आंदोलनकारी तक घोषित नहीं किया गया है। लेकिन उन्हें गर्व है वह पंडित के साथी हैं।

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