रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : लोहाघाट:मूसलाधार बारिश से आपदा ग्रस्त मटियानी में घरों में घुसा पानी लोग दहशत में दो मौत के बाद भी नहीं चेता प्रशासन।
Laxman Singh Bisht
Sat, May 3, 2025
गांव में नहीं हुए सुरक्षात्मक कार्य ग्रामीणों ने लगाया आरोप । फिर सताने लगा आपदा का भय
चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक के नेपाल सीमा से लगे आपदाग्रस्त मटियानी ग्राम सभा के नकेला तोक में आज शनिवार शाम को हुई मूसलाधार बारिश से सड़क से बहता हुआ पानी व मलवा लोगों के घरों में घुस गया। जिस कारण लोग दहशत में आ गए ।मालूम हो पिछले वर्ष बादल फटने से मटियानी ग्राम सभा के नकेला तोक में भारी तबाही मची थी और मलवे में दबने से एक छात्र सहित महिला की दर्दनाक मौत हो गई थी तथा लोगों के घर, खेत खलिहान व मवेशी आपदा की भेंट चढ़ गए थे।
तबाही का वह भयानक मंजर आज तक ग्रामीण नहीं भूले हैं। कमलेड़ी के ग्राम प्रधान प्रशासक संजय भट्ट ,ग्रामीण गंगा सिंह, मानसिंह ,उमेद सिंह ,देव सिंह ,मदन सिंह ,प्रकाश व कैलाश आदि ने बताया आज शाम को हुई मूसलाधार बारिश से पूरा मलवा व पानी लोगों के घरों में घुस गया कहा पिछले बार आई आपदा से गांव पूरी तरह तबाह हो गया था दो लोगों की जान तक चली गई थी।प्रशासन के द्वारा गांव में सुरक्षात्मक कार्य करने का वादा किया था जो धरा का धरा रह गया है। अभी तक गांव में सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए हैं ।दो महीने के बाद मानसून काल का भय अभी तक ग्रामीणों को सता रहा है। विभाग के द्वारा मना करने के बावजूद सड़क का गलत तरीके से कटान किया गया जिस कारण बारिश का पानी व मलवा लोगों के घरों में घुस रहा है ।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मानसून से पहले गांव में सुरक्षात्मक कार्य तथा सड़क की मरम्मत करने की मांग की है।कहा गांव में हुई दो मौत व तबाही के बावजूद प्रशासन नहीं जागा है ।ग्रामीणों ने कहा अगर गांव में कोई जनहानि व अन्य नुकसान होता है उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। वहीं प्रशासन की अनदेखी से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है ।मालूम हो पिछले वर्ष जब नकेला में भीषण आपदा आई थी तब कई जनप्रतिनिधि ,सामाजिक संस्थाओ के द्वारा ग्रामीणों की भरपूर मदद की गई थी खुद लोहाघाट विधायक के अलावा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक पूरे प्रशासनिक अमले के साथ पैदल मौके पर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के द्वारा खुद गांव की जानकारी ली गई थी। प्रशासन के द्वारा गांव में सुरक्षात्मक कार्य करने का आश्वासन ग्रामीणों को दिया गया था ।
ग्रामीणों की माने तो गांव में अभी तक सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए हैं। ग्रामीणों में आपदा का इतना डर समाया था कि ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से उन्हें अन्यत्र बसाने की मांग भी की थी। अगर इस वर्ष फिर आपदा आती है तो गांव में बड़ा नुकसान हो सकता है। प्रशासन ने संज्ञान लेना चाहिए फिलहाल ग्रामीण आज की बारिश से ही दहशत में आ गए हैं।