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रिपोर्ट :लक्ष्मण बिष्ट : पाटी:बूंद-बंद पानी को तरसते रह गए घिंघारुकोट के लोग, अधिकारियों ने कागज़ों में बना डाली दो लाख की योजना।

Laxman Singh Bisht

Fri, Nov 28, 2025

बूंद-बंद पानी को तरसते रह गए घिंघारुकोट के लोग, अधिकारियों ने कागज़ों में बना डाली दो लाख की योजना।

शिकायत पर पंचायत सचिव और बीडीओ ने साधी चुप्पी। भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता जायेंगे जिलाधिकारी के द्वार।जिले की सबसे बड़ी विकास खंड पाटी की सांगों ग्राम पंचायत के घिंघारुकोट के लोग सरकार और सरकारी अधिकारी से नहीं, खुद की दुख भरी जिंदगी से परेशान हैं। कभी सड़क बनाने तो कभी पानी के लिए सरकारी कार्यालयों की चौखट में जा जाकर कुपित हो चुके हैं। अखबार, सोशल मीडिया और अन्य प्लेट फॉर्म पर इस गांव की समस्याएं किसी न किसी रूप में आती ही रहती हैं लेकिन अधिकारियों को यहां के लोगों का दुख दर्द सुनाई व दिखाई नहीं देता। करीब चौबीस साल बाद जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद सड़क बनने की दिशा में कुछ काम बड़ा ही था कि एक नई समस्या "पेयजल" ने फिर इस क्षेत्र को सुर्खियों में ला दिया। दरअसल, एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने डीएम मनीष कुमार की "क्विक एक्शन" वाली कार्यशैली को देखते हुए अगस्त 2025 को दशकों पुरानी पैतृक पेयजल योजना को ठीक करने हेतु "जनता मिलन कार्यक्रम" में गुहार लगाई थी, लेकिन संबंधित विभाग ने एक परिवार के लिए कोई योजना न बनने का हवाला देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। लेकिन ग्रामसभा के विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार से कुपित नंदू पाण्डेय ने पड़ताल शुरू कर दी। पड़ताल में पता चला कि जिस योजना के लिए जिलाधिकारी के दरवार में अर्जी लगी गई थी उसी के नाम पर विकास खंड पाटी के अधिकारी कागज़ों में पेयजल योजना बनाकर चार साल पहले ही दो लाख रुपए डकार भी चुके हैं। दरअसल, वर्ष 2021-22 में पंचायत के वित्त से बनी करीब दो लाख रुपए से बौलानौल-सैनखाला तक पाइप लाइन बनाई तो गई थी लेकिन ब्लॉक के अधिकारियों ने इसे दस्तावेजों में ही सिमटा दिया और लागत धन राशि को अपनी जेब में डाल दिया। इस ग्राम सभा में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार की शिकायत पंचायत सचिव से लेकर बीडीओ तक करने बाद भी कोई कारवाही न होने से हताश ग्रामीणों ने फिर जिलाधिकारी की चौखट में इंसाफ की गुहार लगाने का मन बनाया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बार समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी के पास जाने से शर्मिंदगी महसूस होती है लेकिन निरंकुश अधिकारों तक अपनी बात पहुंचने का कोई अन्य माध्यम भी हमारे पास नहीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर काम कर रहे पाण्डेय का कहना है इन पांच वर्षों में मनरेगा, पेयजल, घर जल नल, स्वच्छ भारत, राज्य और केंद्र सरकार से मिलने वाले मद पर जमकर बंदर बांट हुई है और कई दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर मामलों को छुपाने का काम भी हुआ है।पाटी बीडीओ और पंचायत मंत्री का कहना है कि इस योजना के निर्माण में हुए विरोध के कारण बगाड़ से सैन खाला तक पेयजल लाइन बनाई है लेकिन बगाड़ से सैन खाला तक पांच साल पहले से ही बनाई जा चुकी है। मजे की बात है कि जिस योजना में विभाग अपनी सफाई दे रहा जा उसकी एमबी और पंचायत की बैठक का प्रस्ताव में मेल नहीं खाता है और पूरे प्रकरण को और भी संदिग्ध बनाता है। मामले मे बीडीओ पाटी ने सफाई देते हुए कहा मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। लोगों का कहना है क्या जिले की सभी समस्याओं का समाधान जिलाधिकारी ही करेंगे । अन्य अधिकारी क्या सिर्फ कुर्सी में बैठने के लिए है। लोगों के द्वारा जिलाधिकारी मनीष कुमांर की कार्यपणाली की सराहना की गई।

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