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: चंपावत:नाबालिग से दुष्कर्म व पोक्सो के आरोपियों को न्यायालय ने किया बरी एडवोकेट राम सिंह बिष्ट की दमदार पैरवी बाराकोट क्षेत्र का है मामला 

Laxman Singh Bisht

Sat, Feb 1, 2025
नाबालिग से दुष्कर्म व पोक्सो के आरोपियों को न्यायालय ने किया बरी एडवोकेट राम सिंह बिष्ट की दमदार पैरवी बाराकोट क्षेत्र का है मामला जिला सत्र न्यायाधीश चंपावत अनुज कुमार संगल की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म तथा पोक्सो एक्ट के दो आरोपियों तथा मारपीट तथा एससी एक्ट के एक आरोपी को बरी कर दिया है घटना 2019 की है पीड़िता की मां के द्वारा बाराकोट निवासी अभियुक्त गण प्रदीप सिंह उर्फ गोल्डी एवं रवींद्रनाथ गोस्वामी पर लोहाघाट थाने में तहरीर देते हुए आरोप लगाए थे 24 जनवरी 2019 की सुबह इन दोनों के द्वारा उनकी नाबालिग पुत्री के साथ उसके घर के बाथरूम में घुसकर दुष्कर्म किया गया था तथा अनुसूचित जाति शब्दों के प्रयोग किए थे वहीं तीसरे अभियुक्त राकेश उर्फ राजेंद्र अधिकारी के खिलाफ भी उनके साथ मारपीट गाली गलौज व जाति सूतक शब्दों का प्रयोग करने के गंभीर आरोप लगाया था पीड़िता के द्वारा लोहाघाट थाने में 10 मार्च 2019 को तहरीर दी गई थी मामले में लोहाघाट पुलिस ने प्रदीप सिंह उर्फ गोल्डी एवं रवींद्रनाथ गोस्वामी उर्फ रविंद्र गोस्वामी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 452 ,376, 323, 504 ,506 3/4 पोक्सो एक्ट व धारा 3 (1) 10 / 11 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति निवारण अधिनियम एवं अभियुक्त राकेश उर्फ राजेंद्र अधिकारी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 452, 323, 504 ,506 व धारा 3(1)10/11 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था इसके बाद पुलिस ने चंपावत न्यायालय में चार्ज सीट पेश की लगभग 6 साल चले इस मुकदमे में आरोपियों की ओर से विद्वान अधिवक्ता राम सिंह बिष्ट ने दमदार पेरवी करते हुए माननीय न्यायालय को बताया 24 जनवरी 2019 की कथित घटना की रिपोर्ट 9 मार्च 2019 को दर्ज कराई गई जिसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है तहरीर में बलात्कार का कोई कथन नहीं है इज्जत बचा ली का उल्लेख है विद्वान अधिवक्ता राम सिंह बिष्ट ने कहा झूठी व बनावटी कहानी गडकर झूठी रिपोर्ट उनके मुवक्किलों के खिलाफ दर्ज की गई है दिन की घटना बताई गई है पर कोई साक्षी नहीं है बहस में उन्होंने कहा रिपोर्टर की दो बहने वही रहती हैं उन्हें भी पुलिस के द्वारा गवाह नहीं बनाया गया है अभियोजन अपने केस को साबित नहीं कर सका है नाही घटना के कोई ठोस साक्षी अदालत में पेश किए गए उन्होंने माननीय न्यायालय से अपने मुवक्किलों को निर्दोष बताते हुए दोष मुक्त किए जाने की प्रार्थना की वही विद्वान न्यायाधीश अनुज कुमार संगल ने दोनों विद्वान अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद मामले में निर्णय देते हुए तीनों आरोपियों को दोष मुक्त करार दिया

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