: लोहाघाट:पंचेश्वर डैम का काम ठंडे बस्ते में डैम क्षेत्र से हटी मशीने ग्रामीणों की मांग डैम ना बनाए सरकार पर्यटन हब के रूप में हो विकसित पंचेश्वर
Laxman Singh Bisht
Sun, Mar 2, 2025
पंचेश्वर डैम का काम ठंडे बस्ते में डैम क्षेत्र से हटी मशीने ग्रामीणों की मांग डैम ना बनाए सरकार
लोहाघाट ब्लॉक के नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर क्षेत्र में भारत और नेपाल का विभाजन करने वाली महाकाली नदी में प्रस्तावित एशिया के सबसे बड़े डैम का काम फिलहाल लगभग 4 वर्षों से ठंडे बस्ते में है टनल निर्माण करा रही कंपनी के द्वारा डैम क्षेत्र से मशीने हटा ली गई है पंचेश्वर में महाकाली नदी में बनने वाले इस विशालकाय डैम को भारत और नेपाल के सहयोग से बनाया जाना है डैम से बनने वाली बिजली को दोनों देशों के बीच बांटा जाना प्रस्तावित है लेकिन नेपाल के द्वारा डैम निर्माण में रुचि न रखने के चलते फिलहाल 4 सालों से डैम का कार्य बंद पड़ा है कोरोना काल से पहले भारत व नेपाल क्षेत्र में टनल निर्माण का कार्य किया जा रहा था फिलहाल मामला ठंडे बस्ते में चला गया है हालांकि डैम निर्माण को लेकर दोनों देशों के बीच वार्ता होते रहती है वही क्षेत्रवासी भी डैम निर्माण के पक्ष में नहीं है उनका कहना है इस विशालकाय डैम निर्माण से पंचेश्वर, जोलजीवी, झुलाघाट, घाट पनार आदि क्षेत्रों के हजारों गांव डूब जाएंगे लाखों पेड़ डैम की भेंट चढ़ जाएंगे जिसका पर्यावरण पर बड़ा असर पड़ेगा तथा उन लोगों को अपने पूर्वजों की धरती से हाथ धोना पड़ेगा जो कि वह लोग नहीं चाहते हैं
ग्रामीणों ने कहा यह चौखाम बाबा की भूमि है जिनमे भारत के साथ-साथ नेपाल के लोगों की भी बड़ी आस्था है कहा बाबा के आशीर्वाद से डैम निर्माण संभव नहीं है ग्रामीणों ने सरकार से डैम न बनाने की मांग की है ग्रामीणों ने कहा पंचेश्वर काफी खूबसूरत पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ एंग्लिंग व दुर्लभ गोल्डन महासीर मछली के लिए विश्व प्रसिद्ध है जहां देश ही नहीं विदेशों से भी पर्यटक एंग्लिंग के लिए पहुंचते हैं तथा कई प्रकार के दुर्लभ पशु पक्षी यहां पाए जाते हैं राफ्टिंग की भी यहां आपार संभावनाएं हैं कहा सरकार पंचेश्वर में डैम बनाने के बजाय इसे पर्यटक हब के रूप में विकसित करें जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल पाए मालूम हो लगभग 50 वर्षों से भी अधिक समय से डैम निर्माण की प्रक्रिया चल रही है पर अवरोधों के चलते आज तक डैम नहीं बन पाया जबकि सरकार के द्वारा डूब क्षेत्र का निर्धारण भी किया जा चुका है

लोहाघाट ब्लॉक के नेपाल सीमा से लगे पंचेश्वर क्षेत्र में भारत और नेपाल का विभाजन करने वाली महाकाली नदी में प्रस्तावित एशिया के सबसे बड़े डैम का काम फिलहाल लगभग 4 वर्षों से ठंडे बस्ते में है टनल निर्माण करा रही कंपनी के द्वारा डैम क्षेत्र से मशीने हटा ली गई है पंचेश्वर में महाकाली नदी में बनने वाले इस विशालकाय डैम को भारत और नेपाल के सहयोग से बनाया जाना है डैम से बनने वाली बिजली को दोनों देशों के बीच बांटा जाना प्रस्तावित है लेकिन नेपाल के द्वारा डैम निर्माण में रुचि न रखने के चलते फिलहाल 4 सालों से डैम का कार्य बंद पड़ा है कोरोना काल से पहले भारत व नेपाल क्षेत्र में टनल निर्माण का कार्य किया जा रहा था फिलहाल मामला ठंडे बस्ते में चला गया है हालांकि डैम निर्माण को लेकर दोनों देशों के बीच वार्ता होते रहती है वही क्षेत्रवासी भी डैम निर्माण के पक्ष में नहीं है उनका कहना है इस विशालकाय डैम निर्माण से पंचेश्वर, जोलजीवी, झुलाघाट, घाट पनार आदि क्षेत्रों के हजारों गांव डूब जाएंगे लाखों पेड़ डैम की भेंट चढ़ जाएंगे जिसका पर्यावरण पर बड़ा असर पड़ेगा तथा उन लोगों को अपने पूर्वजों की धरती से हाथ धोना पड़ेगा जो कि वह लोग नहीं चाहते हैं
ग्रामीणों ने कहा यह चौखाम बाबा की भूमि है जिनमे भारत के साथ-साथ नेपाल के लोगों की भी बड़ी आस्था है कहा बाबा के आशीर्वाद से डैम निर्माण संभव नहीं है ग्रामीणों ने सरकार से डैम न बनाने की मांग की है ग्रामीणों ने कहा पंचेश्वर काफी खूबसूरत पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ एंग्लिंग व दुर्लभ गोल्डन महासीर मछली के लिए विश्व प्रसिद्ध है जहां देश ही नहीं विदेशों से भी पर्यटक एंग्लिंग के लिए पहुंचते हैं तथा कई प्रकार के दुर्लभ पशु पक्षी यहां पाए जाते हैं राफ्टिंग की भी यहां आपार संभावनाएं हैं कहा सरकार पंचेश्वर में डैम बनाने के बजाय इसे पर्यटक हब के रूप में विकसित करें जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल पाए मालूम हो लगभग 50 वर्षों से भी अधिक समय से डैम निर्माण की प्रक्रिया चल रही है पर अवरोधों के चलते आज तक डैम नहीं बन पाया जबकि सरकार के द्वारा डूब क्षेत्र का निर्धारण भी किया जा चुका है
