: लोहाघाट:चुनाव आते ही नेताओं को नजर आने लगी नगर की समस्याएं हो रहे हैं बड़े-बड़े दावे /पर पब्लिक है सब जानती है
Laxman Singh Bisht
Wed, Jan 8, 2025
चुनाव आते ही नेताओं को नजर आने लगी नगर की समस्याएं हो रहे हैं बड़े-बड़े दावे पर पब्लिक है सब जानती है
23 जनवरी को होने जा रहे नगर निकाय चुनाव में अपना भाग्य आजमाने उतरे नेताओं को लोहाघाट नगर की जमीन, पेयजल, अस्पताल की बदहाली ,लोहावती नदी की गंदगी नजर आने लगी है कोई नेता भूमि फ्री होल्ड करने की बात कर रहा है तो कोई लोहावती को साफ स्वच्छ करने की बात कर रहा है तो कोई अस्पताल में डॉक्टर लाने की तो कोई सीवर लाइन बनाने के दावे जनता से कर रहा है तो वहीं लोहाघाट नगर की जनता भी नेताओं के दावों को एक कान से सुन रही है और दूसरे से निकाल रही है जनता का कहना है चुनाव आते ही नेताओं को नगर की समस्याएं नजर आती हैं और चुनाव खत्म होते ही समस्याएं गायब हो जाती हैं उसके बाद कोई भी नेता जनता की समस्याओं से पीठ फेर लेता है लोगों ने कहा अगर किसी भी नेता ने मजबूती से इन मूलभूत समस्याओं की लड़ाई लड़ी होती आंदोलन किए होते तो आज नगर में कई समस्याओं का समाधान हो चुका होता लोहावती स्वच्छ हो चुकी होती, अस्पताल रेफर केंद्र नहीं बना होता, नगर की जनता को प्रत्येक दिन साफ स्वच्छ पानी पीने को मिल रहा होता
और आज लोग अपनी जमीन के मालिक होते ,नगर में लाखों रुपए की लागत से बनी सब्जी मंडी आबाद होती, आए दिन जनता जाम से नहीं जूझ रही होती व्यापारी वर्ग खुशहाल होता कसूर जनता का भी है जो सब कुछ सहती है और चुप रहती है अब देखना है इस बार जो वादे दावे नेताओं के द्वारा किए जा रहे हैं इस बार उन समस्याओं का कितना समाधान होता है या दावे ही रहते है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा
23 जनवरी को होने जा रहे नगर निकाय चुनाव में अपना भाग्य आजमाने उतरे नेताओं को लोहाघाट नगर की जमीन, पेयजल, अस्पताल की बदहाली ,लोहावती नदी की गंदगी नजर आने लगी है कोई नेता भूमि फ्री होल्ड करने की बात कर रहा है तो कोई लोहावती को साफ स्वच्छ करने की बात कर रहा है तो कोई अस्पताल में डॉक्टर लाने की तो कोई सीवर लाइन बनाने के दावे जनता से कर रहा है तो वहीं लोहाघाट नगर की जनता भी नेताओं के दावों को एक कान से सुन रही है और दूसरे से निकाल रही है जनता का कहना है चुनाव आते ही नेताओं को नगर की समस्याएं नजर आती हैं और चुनाव खत्म होते ही समस्याएं गायब हो जाती हैं उसके बाद कोई भी नेता जनता की समस्याओं से पीठ फेर लेता है लोगों ने कहा अगर किसी भी नेता ने मजबूती से इन मूलभूत समस्याओं की लड़ाई लड़ी होती आंदोलन किए होते तो आज नगर में कई समस्याओं का समाधान हो चुका होता लोहावती स्वच्छ हो चुकी होती, अस्पताल रेफर केंद्र नहीं बना होता, नगर की जनता को प्रत्येक दिन साफ स्वच्छ पानी पीने को मिल रहा होता
और आज लोग अपनी जमीन के मालिक होते ,नगर में लाखों रुपए की लागत से बनी सब्जी मंडी आबाद होती, आए दिन जनता जाम से नहीं जूझ रही होती व्यापारी वर्ग खुशहाल होता कसूर जनता का भी है जो सब कुछ सहती है और चुप रहती है अब देखना है इस बार जो वादे दावे नेताओं के द्वारा किए जा रहे हैं इस बार उन समस्याओं का कितना समाधान होता है या दावे ही रहते है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा