Saturday 7th of March 2026

ब्रेकिंग

चंपावत:10 किलोमीटर पैदल चल आधार कैंप लगाने रोड विहीन गांव बकोड़ा पहुंची टीम।

पिथौरागढ़ की निर्मला पानू को महिला कल्याण उत्कृष्ट सेवा सम्मान 2026 से राज्यपाल ने किया सम्मानित।

देहरादून: कैबिनेट बैठक में 5 महत्वपूर्ण प्रस्तावो को मंजूरी

हरिद्वार:केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को ‘जनजन की सरकार चार साल बेमिसाल’ कार्यक्रम में करेंगे प्रतिभाग

बाराकोट:सीएम धामी ने छुलापै के अनुज को यूपीएससी में ऑल इंडिया 69 वी रैंक के लिए दी शुभकामनाएं

रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:10 किलोमीटर पैदल चल आधार कैंप लगाने रोड विहीन गांव बकोड़ा पहुंची टीम।

Laxman Singh Bisht

Fri, Mar 6, 2026

10 किलोमीटर पैदल चल आधार कैंप लगाने रोड विहीन गांव बकोड़ा पहुंची टीम।

ग्राम पंचायत बकोड़ा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोस्टा बकोड़ा में आधार कैम्प का आयोजन।

आजादी के 76 साल बाद भी सड़क , चिकित्सा व शिक्षा सुविधा के लिए जूझ रहे हैं ग्रामीण।

आज भी डोलियों में ढोए जाते हैं मरीज 10 से 12 किलोमीटर ग्रामीणों को नापनी पड़ती है पैदल दूरी।

किलोमीटरो पैदल चल स्कूल पहुंचते हैं बच्चे।

चंपावत जिले के दूरस्थ सड़क विहीन ग्राम सभा बकोड़ा में शुक्रवार 6 मार्च को ग्राम प्रधान रविंद्र रावत की मांग पर प्रशासन के द्वारा आधार शिविर का आयोजन किया गया। आधार टीम चूका से 10 से 12 किलोमीटर पैदल खड़ी चढ़ाई पार कर बकोड़ा पहुंची। बकोड़ा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोस्टा बकोड़ा में आधार कैंप का आयोजन कर ग्रामीणों के आधार कार्ड बनाए गए तथा आधार कार्ड में त्रुटियों को ठीक किया गया तथा आधार से संबंधित कार्य किए गए। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्राम प्रधान रविंद्र रावत ने बताया आधार केंद्र ना होने से ग्रामीणों को चंपावत या टनकपुर की दौड़ लगानी पड़ती है। जिसके लिए ग्रामीणों को सड़क न होने के कारण 10 से 12 किलोमीटर पैदल चल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्राम प्रधान ने बताया ग्रामीणों को मोबाइल नंबर लिंक कराने ,बायोमैट्रिक अपडेट ,पता संशोधन जैसे छोटे-छोटे कार्यों के लिए 40 से 50 किलोमीटर दूर चंपावत या टनकपुर जाना पड़ता है। कई बार आधार केंद्रों में तकनीकी खराबी होने से उन्हें फिर से यात्रा करनी पड़ती है ।इसके अलावा स्थानीय किसानों के मोबाइल नंबर आधार से लिंक ना होने के कारण विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े आवेदन और पंजीकरण पूरे नहीं हो पा रहे हैं। ग्राम प्रधान ने बताया गांव में सड़क न होने का खामियाजा ग्रामीणों को कई रूपों में भुगतना पड़ता है जहां बच्चों को स्कूल जाने के लिए किलोमीटरो पैदल यात्रा करनी पड़ती है तो वही बीमार होने की स्थिति में इतनी 10 किलोमीटर की दूरी मरीजों को डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को घने जंगलो के बीच ऊबड़ खाबड़ रास्ते से नापनी पड़ती है । कहा गांव मूलभूत समस्याओं के लिए जूझ रहा है। कहा लंबे समय से ग्रामीण सड़क की मांग कर रहे हैं पर आजादी के 76 साल बाद भी उन लोगों को सड़क , चिकित्सा व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। जिस कारण गांव से बड़ी तेजी से पलायन हो रहा है और जो लोग गांव में हैं वह बेसब्री से गांव तक सड़क पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं ग्राम प्रधान रविंद्र रावत ने कहा उनका व सभी ग्रामीणों का एक ही सपना है कि उनके गांव तक भी सड़क पहुंचे वह लोग भी गांव से वाहन सुविधाओं का लाभ ले उनके बच्चे पैदल ना जाकर वाहन में बैठकर स्कूल जाए।

देखने वाली बात यह है कि ग्रामीणों का यह इंतजार और कितना लंबा होता है। क्या शासन प्रशासन इन ग्रामीणों की समस्या का समाधान कर पाएगा या गांव एक दिन पूरी तरह पलायन की भेंट चढ़ जाएगा।

जरूरी खबरें