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तीन बार लिखित सूचना के बावजूद दिवंगत कर्मचारी का दूसरी बार हुआ स्थानांतरण, लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : तीन बार लिखित सूचना के बावजूद दिवंगत कर्मचारी का दूसरी बार हुआ स्थानांतरण, लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली

Laxman Singh Bisht

Thu, Jul 2, 2026

तीन बार लिखित सूचना के बावजूद दिवंगत कर्मचारी का दूसरी बार हुआ स्थानांतरण, लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

28 अप्रैल 2024 को हो चुका है निधन। फिर भी स्थानांतरण सूची में दिया जा रहा है नाम।

लोक निर्माण विभाग उत्तराखंड के द्वारा दिनांक 30 जून 2026 को जारी सभी संवर्गों की स्थानांतरण सूची ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। सूची में एक ऐसे दिवंगत कनिष्ठ सहायक का स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया गया है जिनका 28 अप्रैल 2024 को निधन हो चुका है।जारी स्थानांतरण सूची के क्रमांक-37 में अंकित सुरेन्द्र सिंह, कनिष्ठ सहायक का स्थानांतरण निर्माण खण्ड, लोक निर्माण विभाग, थराली से प्रान्तीय खण्ड, लोक निर्माण विभाग, रुद्रपुर दर्शाया गया है, जबकि उनका 28/04/2024 को निधन हो चुका है। उनके निधन के उपरांत मृतक आश्रित के रूप में उनकी धर्मपत्नी को निर्माण खण्ड, लोक निर्माण विभाग, गैरसैंण में विधिवत नियुक्ति भी प्रदान की जा चुकी है।सबसे गंभीर तथ्य यह है कि स्वर्गीय सुरेन्द्र सिंह के निधन की सूचना संबंधित कार्यालय द्वारा विभागाध्यक्ष कार्यालय को तीन बार लिखित रूप से भेजी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त इस संबंध में कई बार मौखिक रूप से भी विभागाध्यक्ष कार्यालय को अवगत कराया गया, इसके बावजूद विभागीय अभिलेखों का अद्यतन नहीं किया गया और दिवंगत कर्मचारी का नाम पुनः स्थानांतरण सूची में शामिल कर दिया गया। यह केवल एक त्रुटि नहीं, बल्कि विभागीय अभिलेखों के रखरखाव एवं प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।इतना ही नहीं, वर्ष 2025 की स्थानांतरण सूची में भी दिवंगत सुरेन्द्र सिंह का स्थानांतरण थराली से हल्द्वानी दर्शाया गया था। लगातार दूसरे वर्ष भी उसी कर्मचारी का स्थानांतरण आदेश जारी होना यह दर्शाता है कि विभागाध्यक्ष कार्यालय ने पूर्व में दी गई सूचनाओं और हुई गंभीर त्रुटि से भी कोई सीख नहीं ली।इस पूरे प्रकरण पर उत्तरांचल लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के प्रान्तीय महामंत्री आनन्द सिंह पुजारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्य के प्रति घोर उदासीनता और लापरवाही का प्रत्यक्ष उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब किसी कर्मचारी के निधन की सूचना कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से उपलब्ध कराई जा चुकी हो, तब भी उसका नाम स्थानांतरण सूची में शामिल होना विभागाध्यक्ष कार्यालय की कार्यप्रणाली की गंभीर विफलता को दर्शाता है। पुजारी ने आरोप लगाया कि विभागाध्यक्ष कार्यालय द्वारा ऐसी गंभीर लापरवाहियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं की जा रही है, जिसके कारण बार-बार एक जैसी त्रुटियां दोहराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि विभाग अपने कर्मचारियों के सेवा अभिलेख तक सही ढंग से अद्यतन नहीं रख पा रहा है, तो स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता स्वतः संदेह के घेरे में आ जाती है।उत्तरांचल लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने, उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी गंभीर लापरवाही की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

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