रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:19 मार्च से ही शुरू होंगे नवरात्र पंडित प्रकाश पुनेठा
Laxman Singh Bisht
Wed, Mar 18, 2026
19 मार्च से ही शुरू होंगे नवरात्र पंडित प्रकाश पुनेठा

लोहाघाट क्षेत्र के प्रमुख ज्योतिष पंडित प्रकाश पुनेठा ने जानकारी देते हुए बताया कि कल दिनांक 19 मार्च 2026 दिन गुरुवार को हिंदू नूतन वर्ष आरंभ होगा तथा नवरात्रि का प्रारंभ होगा। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को हिंदू नव वर्ष मनाया जाता है।।उन्होंने कहा कई जातकों के मन में प्रश्न उठ रहा है कि 19 मार्च को तो अमावस्या है तो नवरात्रि कैसे प्रारंभ हो सकती है? उन्होंने उत्तर देते हुए बताया संवत्सर प्रतिपदा व कलश स्थापन निर्णय– गतसंवत्सर में दिनांक 19 मार्च 2026 गुरुवार अमावस्या को प्रतिपदा का क्षय हो, ऐसी स्थिति में शास्त्रों में अमायुक्ता प्रतिपदा में ही नवरात्रारम्भ करने का निर्देश है। यथा- *परदिने प्रतिपदोऽत्यन्ता सत्वे तु दर्शयुता पूर्वैवग्राह्या* अर्थात यदि अगले दिन प्रतिपदा तिथि बिल्कुल न हो या अत्यंत न्यून समय के लिए हो,
छय हो ऐसी स्थिति में 'दर्श' (अमावस्या) से युक्त पूर्व वाली (पूर्व दिन की) तिथि ही ग्रहण करनी चाहिए।(निर्णय सिन्धु)
धर्म सिन्धुकार ने भी यही कहा है *प्रतिपदो मुहूर्तन्यून-व्याप्तौ सूर्योदयास्पर्शे वा दर्शयुतापि ग्राह्या*।। (अर्थात यदि प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के समय एक मुहूर्त (लगभग 48 मिनट) से न्यून हो, या सूर्योदय को स्पर्श ही न कर रही हो (अर्थात सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही हो), ऐसी स्थिति में अमावस्या (दर्श) से युक्त प्रतिपदा को ही पर्व/ उपवास के लिए ग्रहण (ग्राह्य) कर लेना चाहिए।) पूर्व दिन वाली।।
इन तथ्यों के दृष्टिगत दिनांक 19 मार्च 2026 गुरुवार को अमावस्या की समाप्ति प्रातः 06:53 के बाद नवरात्रारम्भ, कलश स्थापन करना पूर्णतः शास्त्रसम्मत है।
*इस नूतन वर्ष के प्रथम दिवस का आरंभ गुरुवार, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र,शुक्ल योग के साथ हो रहा है। चैत्र नवरात्रि 2026 में देवी भगवती पालकी पर सवार होकर पृथ्वीलोक में विचरण करेंगी तथा हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी।*
🚩 जय माता दी 🚩
वर्ष 2026 संवत २०८३ शाके १९४८ रौद्र राम संवत्सर के राजा बृहस्पति देव (वर्षपति) मंत्री मंगल देव होंगे मेष सिंहऔर धनु राशि वालों को संवत सर अपेट तथा कर्क वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को विश्वत संक्रांति अपेट रहेगी।
मीन राशि को संक्रांति का असर बाएं पैर पर रहेगा।
रौद्र नाम संवत्सर होने से राजाओं (शासकों/सत्ताओं) के मध्य आपसी टकराव, क्षोभ (असंतोष) और क्लेश की स्थिति उत्पन्न होगी। संपूर्ण विश्व में अनाज (सस्य), वस्तुओं के दाम (अर्घ) और वर्षा की स्थिति 'मध्यम' (औसत) रहती है। राजनीतिक अस्थिरता, मंदी, वर्षा मध्यम रहेगी। सामाजिक उथल पुथल देखने को मिलेगी।
*राजा देव गुरु बृहस्पति–*
बृहस्पति (गुरु) वर्ष के अधिपति (राजा) हों, तो वह समय अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। अच्छी वर्षा होती है, गायें 'कामधेनु' के समान प्रचुर मात्रा में दूध देने लगती हैं। ब्राह्मण/विद्वान बुद्धिजीवी निरंतर यज्ञ, अनुष्ठान और अग्निहोत्र (हवन) धर्मादि कार्यों में लीन रहते हैं। सृष्टि के सभी जनों के मध्य हर्षोल्लास का वातावरण रहता है तथा चारों ओर खुशहाली/ उत्सव मनाए जाते हैं।
*मंत्री मंगलदेव–*
*अवनिजो ननु मंत्रिकतां गतो भवति दस्युगदादिजवेदना।* *जनपदेषु जयंसुखसंचयंनबहुगोषुपयो द्विजकर्म च॥*
यदि वर्ष के मंत्री भूमिपुत्र मंगल हो तो दस्यु (चोर-अपराधी), गदा (रोगों) और शस्त्रों के कारण (वैश्विक स्तर पर अनेक देशों के मध्य युद्ध की स्थिति) पीड़ा होने की संभावना रहती है। आम जनमानस भौतिक सुख सुविधाओं का भोग करें।
संक्षेप में मंगल मंत्री होने से साहसी, विजयी और आधिकारिक पद प्राप्त होते हैं, साथ ही शत्रुओं से भय और आध्यात्मिक कार्यों के प्रति उदासीनता भी दर्शाता है। अग्नि जनित घटनाएं अधिक होगी रक्त संबंधी विकार (रोग) होने की संभावना भी अधिक रहेगी।
(अन्य ग्रहों का पदभार)
1–सस्येश,नीरसेश तथा धनेश के स्वामी भी देव गुरु बृहस्पति ही होंगे।
2–मेघेष, दुर्गेश तथा फलेस का पद भार चंद्र देव को प्राप्त होगा।
3– शनि महाराज को रसेश का कार्यभार प्राप्त होगा।
4–धान्येश का पदभार बुध देव को प्राप्त होगा।
वर्ष मे चार ग्रहण लगेंगे लेकिन भारत में कोई दिखाई नहीं देगा अर्थात इसका सूतक भी नहीं लगेगा । अंत में हमें अपने गुरुजनों की बात को सुनना और समझना चाहिए श्री तारा प्रसाद दिव्य पंचांग। श्री गणेश मार्तंड पंचांग जो कई वर्षों से अपनी सेवा दे रहे हैं उनके आदेश पर चलना हमारा कर्तव्य बनता है। उन्होंने सभी सनातनियों को नव संवत्सर की बधाइयां और शुभकामनाएं दी है।