रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : पिथौरागढ़ जिले में अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट खुले मे डालने पर हाईकोर्ट सख़्त । सरकार को दिए निर्देश
Laxman Singh Bisht
Wed, Aug 5, 2026
पिथौरागढ़ जिले में अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट खुले मे डालने पर हाईकोर्ट सख़्त ।
राज्य प्रदूषण बोर्ड को जिले के समस्त अस्पतालों की चार हफ्ते में जांच करने के दिए निर्देश।
उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल ने पिथौरागढ़ जिले में अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट खुले में, नदी, नालों, गड्ढों और नगर पालिका के कूड़े दानो में डाले जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मामले को गंभीरता को देखते हुए कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि पिथौरागढ़ में कॉमन मेडिकल वेस्ट प्लांट लगाने के लिए जगह का चयन कर कोर्ट को बताएं। और राज्य प्रदूषण बोर्ड जिले के सभी हॉस्पिटलों की जाँच करके चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है। साथ में कोर्ट ने यह भी कहा है की हॉस्पिटल कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग कराई जाय।पिथौरागढ़ निवासी डॉक्टर राजेश पांडे ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थीं।जिसमें उन्होंने कहा है कि पिथौरागढ़ जिले में मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए कोई सुविधा नहीं है।जिसकी वजह से सरकारी, प्राइवेट अस्पातल और पैथ लैब का मेडिकल वेस्ट इनकी ओर से खुले में, नदी, नालों, गड्ढों व नगर पालिका के कूड़े के डिब्बों में डाला जा रहा है जिसकी वजह से बीमारी फैलने की आशंका बढ़ रही है। निस्तारण के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं है ।इतना ही नहीं इस वेस्ट को जानवर भी खा रहे हैं। उनके स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। पिथौरागढ़ जिले में करीब 20 पैथ लैब संचालित है, लेकिन इनका यूकेपीसीबी यानी उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। जिसकी वजह से पर्यावरण को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।हॉस्पिटलों के द्वारा नियमों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। पीसीबी के द्वारा अभी तक जिले के दो हॉस्पिटल की जाँच की गई है अन्य की नहीं की गयी।
तो वही चंपावत जिले में भी मेडिकल वेस्ट निस्तारण के क्या उपाय किए गए है।स्वास्थ्य विभाग के द्वारा इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि आखिर जिले के अस्पतालों व लैबो के मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कहा किया जाता है और किस प्रकार से किया जाता है?