रिपोर्ट :लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:28 फरवरी – राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर्वतीय अंचल में शिक्षा और विज्ञान की नई पहचान बने शिक्षक नरेश जोशी
28 फरवरी – राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
पर्वतीय अंचल में शिक्षा और विज्ञान की नई पहचान बने शिक्षक नरेश जोशी
जनपद के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्र में शिक्षा और विज्ञान की अलख जगा रहे विज्ञान शिक्षक नरेश जोशी आज एक प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित हो चुके हैं। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर उनके उल्लेखनीय योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया जा रहा है। 28 फरवरी को महान वैज्ञानिक सर सी. वी. रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज की स्मृति में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए नरेश जोशी विगत लगभग 20 वर्षों से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का सतत प्रयास कर रहे हैं।श्री नरेश जोशी को वर्ष 2017 से राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पासम में कार्यरत श्री जोशी ने न केवल विज्ञान गतिविधियों को जनपद स्तर पर नई दिशा दी, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी राज्य एवं राष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। उनके निर्देशन में में जनपद से सैकड़ों विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, विज्ञान महोत्सव विज्ञान संगोष्ठी, इंसपायर अवार्ड आदि बाल केन्द्रित गतिविधियों में प्रतिभाग कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए वर्ष 2024 में उन्हें उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके समर्पण, नवाचार और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। एक ओर जहाँ पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन और अन्य कारणों से सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या कम हो रही है नरेश जोशी के कुशल मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक वातावरण के परिणामस्वरूप उनके विद्यालय की छात्र संख्या 23 से बढ़कर 52 हो गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में यह वृद्धि अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि और रिकॉर्ड मानी जा रही है। यह दर्शाता है कि अभिभावकों का विश्वास विद्यालय और शिक्षक पर निरंतर बढ़ा है। जोशी का मानना है कि वैज्ञानिक चेतना केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की आदतों और सोच में समाहित होनी चाहिए। उनका स्पष्ट संदेश है कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे सीमित संसाधनों के बावजूद भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के इस अवसर पर नरेश जोशी जैसे समर्पित शिक्षक न केवल जनपद, बल्कि पूरे राज्य के लिए गौरव का विषय हैं। उनके प्रयास शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में एक नई प्रेरणा बनकर उभर रहें हैं।