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लोहाघाट:भरते दी जो राज कैकई राम चले बन से बन से बन को:गल्लागांव मे होली की धूम

लोहाघाट:झूमांधुरी के जंगलों में फिर भड़की आग। बन कर्मी मौके पर।

रिपोर्ट :लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:भरते दी जो राज कैकई राम चले बन से बन से बन को:गल्लागांव मे होली की धूम

Laxman Singh Bisht

Mon, Mar 2, 2026

भरते दी जो राज कैकई राम चले बन से बन से बन को:गल्लागांव मे होली की धूम

लोहाघाट। निकटवर्ती ग्राम कोयाटी खालसा में स्थित गल्लागांव के ऐतिहासिक तुन्द्रा मंदिर परिसर में इस वर्ष होली पर्व अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही गांव में उत्सव का माहौल रहा और मंदिर परिसर में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण सराबोर हो उठा।कार्यक्रम में सेवानिवृत्त जिला मनोरंजन अधिकारी शिवराज सिंह बोहरा के निर्देशन में वेदांती होली, पारंपरिक बैठकी होली तथा खड़ी होली का सुमधुर गायन प्रस्तुत किया गया। “भरते भरते दी जो राज कैकई राम चले बन से बन से बन को” जैसे पारंपरिक होली गीतों की स्वर लहरियों ने उपस्थित जनसमूह को भक्तिमय भाव में डुबो दिया। ढोलक और मंजीरे की थाप पर गूंजते होली गीतों ने पर्व की पौराणिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत कर दिया।इस अवसर पर ग्राम प्रधान पप्पू बोहरा, कैलाश बोहरा, राम सिंह बोहरा सहित नारायण दत्त जोशी, चंद्र शेखर जोशी, कैलाश सिंह बोहरा, बद्री सिंह बोहरा, गिरीश जोशी, नवीन जोशी, मोहन जोशी, श्याम बोहरा, शिवराज बोहरा, जोगेंद्र बोहरा, विनोद बोहरा, गोविंद सिंह, निर्मल सिंह, कीर्ति राम, सोभन राम, दीप जोशी, चंचला जोशी, लक्ष्मी जोशी, हेमा जोशी, इंदु जोशी, जानकी जोशी, गीता जोशी, मीना जोशी एवं शिखा जोशी सहित अनेक ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ाया।इस भव्य आयोजन की परिकल्पना एवं संचालन शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक नरेश जोशी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। नरेश जोशी की प्रेरणा और सकारात्मक सोच के चलते यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा, बल्कि अनुशासन एवं गरिमा का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर गया। उन्होंने कार्यक्रम का कुशल संचालन, समन्वय और व्यवस्थापन करते हुए सभी प्रतिभागियों को एक सूत्र में पिरोया।अपने संबोधन में नरेश जोशी ने कहा कि हमारी पारंपरिक लोकसंस्कृति और पर्व-त्योहार समाज को जोड़ने का माध्यम हैं। उन्होंने नई पीढ़ी से अपील की कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और लोकगीतों एवं सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाएं।होली मिलन कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं और प्रेम, सौहार्द एवं भाईचारे का संदेश दिया। तुन्द्रा मंदिर परिसर में आयोजित यह होली उत्सव सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामूहिक सहभागिता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार कर गया।

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