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: बाराकोट: शिक्षक द्वारा छेड़-छाड़” क्या हकीकत क्या फ़साना! शिक्षक ने खुद को बताया निर्दोष बताया साजिश का शिकार

Laxman Singh Bisht

Fri, Jan 3, 2025
शिक्षक द्वारा छेड़-छाड़” क्या हकीकत क्या फ़साना! शिक्षक ने खुद को बताया निर्दोष बताया साजिश का शिकार कुछ माह पूर्व चंपावत जिले के बाराकोट के एक विद्यालय में बेहद सुर्ख़ियों में रहे शिक्षक- छात्रा छेड़–छाड़ का मामला, जिसने न सिर्फ एक शिक्षक-छात्र के संबंध पर प्रश्न खड़ा किया बल्कि हमारा ध्यान इस और भी आकर्षित किया कि क्या हमारे समाज में बदलते वक़्त में आये प्रौद्योगिक, वैचारिक, मर्यादित एवं सामाजिक बदलाओं ने विद्या के मंदिरों को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है ? या फिर राजनीति अब सिर्फ राजनीति में ही नहीं बल्कि जीवन के हर अंग में, चाहे वह अपना घर ही क्यों न हो, विद्या का मंदिर ही क्यों न हो, अस्पताल ही क्यों न हो, अदालत ही क्यों न हो, ऐसा घर कर गयी है, कि आप-मे कभी भी, भले ही आप- मे नेता न हों, किसी खतरनाक राजनैतिक षड्यंत्र का शिकार हो सकते हैं !जी हाँ हम बात कर रहे हैं लोहाघाट थाने में दिनांक 21.09.2024 को दर्ज हुई उस रिपोर्ट की जिसने लोहाघाट क्षेत्र को हिला के रख दिया था मामले में जिसमे बाराकोट विद्यालय के शिक्षक अर्जुन छतोला के ऊपर उसी विद्यालय में पड़ने वाली कक्षा सात की बालिका द्वारा छेड़–छाड़ का आरोप लगा दिया गया । थाने में दी गई परिजनों की रिपोर्ट के मुताबिक पीडिता के भाई द्वारा बताया गया कि पीडिता के साथ दिनांक 09/09/2024 को विद्यालय के शिक्षक द्वारा क्लास में पडाते हुए उसकी बहन के साथ छेड़–छाड़ की गयी, हांलाकि मामले की विवेचना शुरू हुई तो पुलिस को ज्ञात हुआ कि पीडिता दिनांक 09/09/2024 को विद्यालय ही नही गयी थी, जिसके उपरांत बयानों का बदलना स्वाभाविक था । विवेचना आगे बढती गयी तो मामले की परतें और खुलती गयी , विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा हुई जाँच में विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं अन्य शिक्षकों द्वारा बताया गया कि पीडिता द्वारा छेड़–छाड़ की जानकारी विद्यालय प्रशाशन को दिनांक 10/09/2024 को ही दे दी गयी थी जिसके पश्चात् प्रिंसिपल द्वारा मामले की जाँच हेतु पांच सदस्यों की समिति का गठन किया गया । समिति द्वारा दिनांक 11.09.2024 को आरोपी शिक्षक , पीडिता एवं उसके परिवार को सुनने के बाद, जिसमे की पीडिता द्वारा आरोपी शिक्षक पर छेड़–छाड़ का आरोप लगाया, इसके बावजूद विद्यालय प्रशासन द्वारा मामले को इस वजह से दबा दिया गया कि पीडिता और उसके परिवार द्वारा दिनांक 11/09/2024 को यह कहा गया की पीडिता के माता पिता घर पर नही हैं और उनसे पूछने के उपरांत ही पीडिता का भाई एवं दादी कार्यवाई करने का फैसला करेंगे, हालाँकी यहाँ ये भी गौरतलब है कि इस समिति के सदस्यों के बाद में दिए गये बयान और इस समिति के समक्ष बनाये गये दस्तावेज, भले ही वह पीडिता का शिकायत पत्र हो अथवा आरोपी शिक्षक का पत्र अथवा जो समझौतानामा हो, कहीं से कहीं तक किसी छेड़–छाड़ का जिक्र नही करते हैं , चौंका का देनी वाली बात यह रही कि समिति द्वारा अपनी कोई लिखित रिपोर्ट इस मामले में नही तैयार करी गयी और न ही कोर्ट के समक्ष पेश करी गयी ।इस मामले में एक और चौका देने वाली बात हमारे सामने आयी, इस मामले में न सिर्फ आरोपी शिक्षक का सस्पेंशन किया गया बल्कि विवेचना के दौरान डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट चम्पावत द्वारा इस बात का संज्ञान लेते हुए  बाराकोट विद्यालय के एक कर्मचारी को यह कहते हुए बाराकोट इंटर कॉलेज से दुसरे विद्यालय हस्तांतरित कर दिया कि ‘आपके द्वारा इस मामले की विवेचना को प्रभावित किया जा सकता है’ ।आपको बता दें कि इस मामले में आरोपी शिक्षक के काबिल अधिवक्ता यतीश चन्द्र जोशी की हैरतंअगेज़ एवं शानदार पैरवी के चलते आरोपी शिक्षक को एक भी दिन जेल नहीं जाना पड़ा । जहाँ एक ओर पोक्सो के अपराध में मा0न्यायालय ने शिक्षक की रिमांड ही खारिज कर दी वहीं बदले हुए बयानों के आधारों पर आरोपी शिक्षक पर इसी मामले में एस सी/एस टी एक्ट की बढ़ोतरी हुई और फिर से गिरफ़्तारी की तलवार लटक गयी, लेकिन जब तक पुलिस शिक्षक को गिरफ्तार कर पाती उससे पहले ही न्यायालय द्वारा उन्हें अग्रिम जमानत दे दी गयी मामले में शिक्षक हुआ राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार या फिर विद्या का मंदिर हुआ तार -तार ये तो माननीय न्यायालय ही तय करेगी लकिन इस घटनाक्रम से बेशक विद्यालय प्रशासन की इतने गंभीर मामले के प्रति ऐसा लापरवाह रवैया बहेद गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसकी भारी कीमत आने वाले वक़्त में एक  समाज को चुकानी होगी । वहीं शिक्षक छतोला के द्वारा खुद को बेकसूर बताते हुए षड्यंत्र का शिकार होने की बात कही उन्होंने कहा उन्हें माननीय न्यायालय पर पूरा भरोसा है    

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