Saturday 7th of March 2026

ब्रेकिंग

देहरादून :प्रेमी-प्रेमिका के बीच जमकर चले चाकू दोनों अस्पताल में भर्ती

नैनीताल:महिला पर्यटक से दुष्कर्म का प्रयास करने वाले चालक को पुलिस ने दबोचा।

अल्मोड़ा:पार्षद मोनू साह ने रक्तदान कर बचाई प्रसूता की जान

लोहाघाट:डीएम ने रा0 पुस्तकालय एवं उप जिला चिकित्सालय का किया स्थलीय निरीक्षण

हरिद्वार:उत्तराखंड की समस्याओं को चुन चुन कर हल कर रहे हैं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी: अमित शाह

: नैनिताल हाईकोर्ट ने सरकार,कुमाऊं कमिश्नर,सचिव कार्मिक और पूर्व डीएम को जारी किया नोटिस याची ने खुद करी पैरवी

Laxman Singh Bisht

Wed, Apr 10, 2024
हाईकोर्ट ने सरकार,कुमाऊं कमिश्नर,सचिव कार्मिक और पूर्व डीएम को जारी किया नोटिस याची ने खुद करी पैरवी उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने नैनीताल के तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा दैवीय आपदा से बचाव में घोर लापरवाही, रिहायशी और ग्रामीण क्षेत्रों में एन.जी.टी.व उच्च न्यायलय के आदेशों के खिलाफ खनन भंडारण की अनुमति देने संबंधी याचिका पर सुनवाई की।वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने राज्य सरकार, कमिश्नर कुमायूं, सचिव कार्मिक और पूर्व जिलाधिकारी सचिन बंसल को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए है। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। मामले के अनुसार हल्द्वानी के चोरगलिया निवासी भुवन चंद्र पोखरिया ने अपनी पैरवी खुद करते हुए न्यायालय को बताया नैनीताल के तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपने कार्यकाल में दैवीय आपदा से बचाव की दशा में घोर लापरवाही की। यही नहीं, उन्होंने रिहायशी और ग्रामीण क्षेत्रो में एन.जी.टी.व उच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध जाकर खनन भंडारण की अनुमति दी।याचिका में कहा गया है कि जिलाधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्र चोरगलेया का दौरा किया और पीड़ितों को बाढ़ से बचाने का आश्वासन तो दिया। पर जिलाधिकारी ने न तो बाढ़ सुरक्षा के लिए कोई कार्य किया और न ही बजट स्वीकृत किया, जबकि दैवीय आपदा से निबटने के लिए प्रयाप्त बजट उपलब्ध था।याची ने बताया वर्ष 2020 में सारे साक्ष्य इक्कठे कर एक शपथपत्र याची द्वारा सचिव कार्मिक को शिकायत के रूप में दिए। शासन ने उनकी शिकायत का संज्ञान लेते हुए इसकी जांच कमिश्नर कुमायूं को सौप दी और रिपोर्ट पेश करने को कहा। लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी जाँच पुरी नही हुई। उन्होंने जांच रिपोर्ट के लिए आर.टी.आई.मांगी, लेकिन उन्हें आर.टी.आई.का जवाब तक नही दिया गया।याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर उन्हें शासन ने क्लीन चिट दे दी है तो उसकी प्रति उन्हें भी दी जाय और अगर नहीं दी है तो जाँच की रिपोर्ट मुहय्या कराई जाए। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में चीफ सेकेट्री, सेकेट्री कार्मिक, कमिश्नर कुमायूं और तत्कालीन जिलाधिकारी को पक्षकार बनाया है। वही इस मामले को लेकर हाईकोर्ट ने काफी सख्त रूप अपनाया है तथा चारों पक्षकारों को नोटिस जारी कर दिए हैं

जरूरी खबरें