Monday 24th of August 2026

ब्रेकिंग

चंपावत:जनता मिलन में जिलाधिकारी ने फरियादियों की सुनी समस्याएं

बाराकोट:चामी आषाढी मेले का जिला पंचायत अध्यक्ष ने किया शुभारंभ। निकली भव्य कलश यात्रा।

चंपावत:रीठा साहिब पुलिस की बड़ी कार्यवाही चोरी की 02 मोटरसाइकिलों सहित 02 गिरफ्तार

लोहाघाट:मांगों को लेकर महाविद्यालय की छत में चढ़े छात्र संघ पदाधिकारी। प्रशासन व पुलिस की टीम मौके पर।

लोहाघाट:महाविद्यालय व छात्रों की समस्या को लेकर भूख हड़ताल पर बैठी एबीवीपी व एनएसयूआई।

सूचना

: उत्तराखंड में इस बार नहीं होंगे छात्र संघ चुनाव हाईकोर्ट ने निस्तारित की जनहित याचिका

Laxman Singh Bisht

Thu, Oct 24, 2024
उत्तराखंड में इस बार नहीं होंगे छात्र संघ चुनाव हाईकोर्ट ने निस्तारित की जनहित याचिका उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में आज एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार के शासनादेश के आधार पर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है। इस मौके पर सरकार की तरफ से कहा गया कि उसने 23 अप्रैल 2024 को शासनादेश जारी कर कहा था कि 30 सितंबर तक छात्र संघ चुनाव हो जाने चाहिए, लेकिन विश्वविद्यालययों ने उस आदेश का अनुपालन नहीं किया। चुनाव कराने की समय सीमा निकल चुकी है। इसलिए अब छात्र संघ का चुनाव कराना सम्भव नहीं है। इसके आधार पर कोर्ट ने जनहित याचिका निस्तारित कर दी। बता दें कि याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि सरकार अपने ही शासनादेश को लागू कराने में सफल नहीं हुई। लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट का उल्लंघन किया गया। छात्र संघ का चुनाव न कराना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। चाहे तो सरकार अपने आदेश को वापस लेकर छात्र संघ का चुनाव करा सकती है। कमेटी की रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि एडमिशन होने के आठ सप्ताह के भीतर चुनाव हो जाने चाहिए, ताकि बाद में उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।मामले के अनुसार देहरादून निवासी समाजिक कार्यकर्ता महिपाल सिंह ने समाचार पत्रों में 25 अक्टूबर को राजकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराए जाने की खबर का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि राज्य सरकार ने 23 अप्रैल 2024 को एक शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया था। इसमें छात्रसंघ चुनाव 30 सितंबर 2024 तक कराने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय पर चुनाव आयोजित नहीं किए और न ही शासन से दिशा-निर्देश प्राप्त किए। ये लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन है। इससे छात्रों की पढ़ाई में असर पड़ रहा है।

विज्ञापन

जरूरी खबरें