: लोहाघाट:सील गांव की गर्भवती की फिर डोली बनी सहारा ग्रामीणों ने 8 किलोमीटर पैदल चल सड़क तक पहुंचाया जंगल मे 108 में हुई डिलीवरी सीएम की घोषणा के बावजूद नहीं बन सकी सड़क /क्या यही आदर्श जिला चंपावत है?
Laxman Singh Bisht
Sat, May 11, 2024
सील गांव की गर्भवती की फिर डोली बनी सहारा ग्रामीणों ने 8 किलोमीटर पैदल चल सड़क तक पहुंचाया जंगल मे 108 में हुई डिलीवरी सीएम की घोषणा के बावजूद नहीं बन सकी सड़क /क्या यही आदर्श जिला चंपावत है?
चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के दूरस्थ सील गांव की शुध लेने के लिए न तो सरकार तैयार है ना ही जिला प्रशासन दुर्भाग्य की बात है मुख्यमंत्री धामी की घोषणा के 3 साल बाद भी सील गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई शनिवार को सील गांव के गोविंद सिंह की पत्नी कमला देवी को प्रसव पीड़ा हुई जिसके बाद परिजनों ने ग्रामीणों को इकट्ठा किया ग्रामीण खड़ी चढ़ाई व खतरनाक रास्तों को पार कर कमला देवी को डोली के सहारे 8 किलोमीटर पैदल चल पातल तक लाए जिसमें ग्रामीणों को डेढ़ से दो घंटे लगे
वही गर्भवती महिला के साथ आई दिव्यांग आशा कार्यकर्ति निर्मला ने बताया पातल से गर्भवती महिला को 108 के जरिए लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय लाया जा रहा था तभी रास्ते में शंखपाल के पास कमला देवी की प्रसव पीड़ा बढ़ गई जिस कारण जंगल में 108 में ही डिलीवरी करवानी पड़ी महिला ने स्वस्थ बेटी को जन्म दिया जिसके बाद महिला को लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है जहां दोनों की हालत ठीक है वही आशा कार्यकर्ति निर्मला , महिला के पति गोविंद सिंह व गांव के सामाजिक कार्यकर्ता रमेश सिंह ने बताया मुख्यमंत्री की घोषणा के 3 साल बाद भी सड़क न पाना काफी दुर्भाग्य की बात है जिसका खामियाजा ग्रामीणों को आए दिन भुगतना पड़ रहा है सड़क सुविधा न होने से इलाज समय पर ना मिल पाने के कारण गांव में कई लोगों की मौत भी हो चुकी है
जिसमें 11 साल का बच्चा तक शामिल है उन्होंने कहा प्रशासन बार-बार आश्वासन देता है पर करता कुछ नहीं है ना ही मुख्यमंत्री अपनी घोषणा की ओर ध्यान दे रहे हैं उन्होंने कहा इस बार ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था जिसके बाद डीएम चंपावत गांव में आए थे और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है ग्रामीणों ने कहा उन्होंने अब सड़क निर्माण की आस छोड़ दी है वह भगवान के भरोसे हैं जबकि सरकार कहती है देश चांद में पहुंच गया है
[caption id="attachment_18851" align="alignnone" width="300"]
पर आजादी के 76 साल बीत जाने के बाद भी सील गांव के ग्रामीण सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं पर सुनने को कोई तैयार नहीं है ग्रामीणों ने कहा क्या यही मुख्यमंत्री के सपनों का आदर्श जिला चंपावत है जहां रोज सील गांव के स्कूल के बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और मरीजों व गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए 8 किलोमीटर डोली में लाना पड़ता है यह सरकार व प्रशासन के लिए काफी शर्मनाक पहलू है[/caption]
मालूम हो सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण कई बार सरकारी कार्यालय के धक्के खा चुके हैं डीएम से लेकर सीएम तक गुहार लगा चुके हैं पर सुनने को तैयार कोई नहीं है क्योंकि यह आदर्श जिला चंपावत है
चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के दूरस्थ सील गांव की शुध लेने के लिए न तो सरकार तैयार है ना ही जिला प्रशासन दुर्भाग्य की बात है मुख्यमंत्री धामी की घोषणा के 3 साल बाद भी सील गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई शनिवार को सील गांव के गोविंद सिंह की पत्नी कमला देवी को प्रसव पीड़ा हुई जिसके बाद परिजनों ने ग्रामीणों को इकट्ठा किया ग्रामीण खड़ी चढ़ाई व खतरनाक रास्तों को पार कर कमला देवी को डोली के सहारे 8 किलोमीटर पैदल चल पातल तक लाए जिसमें ग्रामीणों को डेढ़ से दो घंटे लगे
वही गर्भवती महिला के साथ आई दिव्यांग आशा कार्यकर्ति निर्मला ने बताया पातल से गर्भवती महिला को 108 के जरिए लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय लाया जा रहा था तभी रास्ते में शंखपाल के पास कमला देवी की प्रसव पीड़ा बढ़ गई जिस कारण जंगल में 108 में ही डिलीवरी करवानी पड़ी महिला ने स्वस्थ बेटी को जन्म दिया जिसके बाद महिला को लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है जहां दोनों की हालत ठीक है वही आशा कार्यकर्ति निर्मला , महिला के पति गोविंद सिंह व गांव के सामाजिक कार्यकर्ता रमेश सिंह ने बताया मुख्यमंत्री की घोषणा के 3 साल बाद भी सड़क न पाना काफी दुर्भाग्य की बात है जिसका खामियाजा ग्रामीणों को आए दिन भुगतना पड़ रहा है सड़क सुविधा न होने से इलाज समय पर ना मिल पाने के कारण गांव में कई लोगों की मौत भी हो चुकी है
जिसमें 11 साल का बच्चा तक शामिल है उन्होंने कहा प्रशासन बार-बार आश्वासन देता है पर करता कुछ नहीं है ना ही मुख्यमंत्री अपनी घोषणा की ओर ध्यान दे रहे हैं उन्होंने कहा इस बार ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था जिसके बाद डीएम चंपावत गांव में आए थे और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है ग्रामीणों ने कहा उन्होंने अब सड़क निर्माण की आस छोड़ दी है वह भगवान के भरोसे हैं जबकि सरकार कहती है देश चांद में पहुंच गया है
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पर आजादी के 76 साल बीत जाने के बाद भी सील गांव के ग्रामीण सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं पर सुनने को कोई तैयार नहीं है ग्रामीणों ने कहा क्या यही मुख्यमंत्री के सपनों का आदर्श जिला चंपावत है जहां रोज सील गांव के स्कूल के बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए 10 से 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और मरीजों व गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए 8 किलोमीटर डोली में लाना पड़ता है यह सरकार व प्रशासन के लिए काफी शर्मनाक पहलू है[/caption]
मालूम हो सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण कई बार सरकारी कार्यालय के धक्के खा चुके हैं डीएम से लेकर सीएम तक गुहार लगा चुके हैं पर सुनने को तैयार कोई नहीं है क्योंकि यह आदर्श जिला चंपावत है