रिपोर्ट :लक्ष्मण बिष्ट : चम्पावत:जनता का जिलाधिकारी : मनीष कुमार ने बदल दी चंपावत जिला प्रशासन की परिभाषा।
Laxman Singh Bisht
जनता का जिलाधिकारी : मनीष कुमार ने बदल दी चंपावत जिला प्रशासन की परिभाषा।
राज्य स्थापना के 25 सालों में पहली बार जनता को मिला ऐसा जिलाधिकारी, जो दिन-रात लोगों के बीच, फाइलों से नहीं चेहरे की मुस्कान से नापते हैं काम का परिणाम।
चंपावत। उत्तराखंड राज्य की स्थापना के बाद 25 वर्षों में जिले ने कई जिलाधिकारी देखे, लेकिन मनीष कुमार जैसा जनसेवक प्रशासक पहली बार मिला है। किसान परिवार से आने वाले इस सादगीपूर्ण जिलाधिकारी ने अपनी "क्विक एक्शन" की कार्यशैली, ईमानदारी और जनता से सीधा जुड़ाव बनाकर प्रशासन को जनता के करीब ला दिया है।12 घंटे से अधिक समय तक जनता के बीच, बिना औपचारिकता से प्रशासन चलाने वाले डीएम मनीष कुमार का दिन जनता के बीच से शुरू होता है और जनता की संतुष्टि पर खत्म होता है। वे बिना किसी प्रोटोकॉल या बैरिकेटिंग के हर व्यक्ति से मिलते हैं। शिकायत करने आया गरीब व्यक्ति यह देखकर भावुक हो उठता है कि जिलाधिकारी खुद उसे अपने पास बिठाकर उसकी समस्या का समाधान करवाते हैं। रात 12बजे तक स्वाला डेंजर जोन में रहते हुए दूसरे दिन लोगों का आवागमन इस स्थान से सुगमता से वाहनों की आवाजाही हो सके उसके लिए जिलाधिकारी रात्रि में काम कर रहे श्रमिकों के बीच रहते आ रहे हैं। यहां के श्रमिकों ने बताया कि उन्होंने पहली बार किसी जिलाधिकारी को अपने हाथों से दीपावली की मिठाई खिलाते देखा — यह दृश्य जिले के लोगों के नहीं बल्कि आम श्रमिकों के मन में भी बस गया है।इनकी सादगी में संवेदना, पद में परिश्रम, सरकारी स्कूल से पढ़कर ऊँचे पद तक पहुंचे मनीष कुमार के व्यवहार में न पद का अहंकार है, न जनता से दूरी की दीवार। वे कहते हैं, “प्रशासन तभी सफल है जब जनता मुस्कुराए।” यही सोच उन्हें आम लोगों के दिलों में विशेष स्थान दिला चुकी है।इनकी कार्य संस्कृति से सिस्टम की रफ्तार इतनी तेज हो गई है कि अब सरकारी फाइलें बिना कहे सरकने लगी है।इनकी कार्य संस्कृति ने सरकारी दफ्तरों में नई ऊर्जा भर दी है। फाइलों के ढेर अब अतीत की बात बन चुके हैं।हर विभाग में समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समस्याओं का निपटारा हो रहा है। आम जनता की शुभकामनाओं को असली पुरस्कार मानने वाले ऐसे जिलाधिकारी को पाकर खुद को लोग भाग्यशाली मान रहे है। जो अपने परिवार से ज्यादा समय जनता के बीच बिताते हैं। हर गरीब, किसान, व्यापारी, मजदूर और विद्यार्थी के चेहरे पर उनके कारण भरोसे की नई चमक आई है। इसमें मुख्यमंत्री की परिकल्पना के मॉडल जिले का बदलते रूप व स्वरूप को देखकर हर बाहर से आने वाला व्यक्ति "सीएम एवं डीएम"को धन्यवाद दिए बगैर नहीं रहते हैं। “अधिकतम लोगों का अधिकतम हित” की नीति पर काम करते हुए मनीष कुमार द्वारा चंपावत को उत्तराखंड के अन्य जिलों के लिए ऐसा मॉडल रूप दिया जा रहा है। जिसकी काम करने की फास्ट स्पीड से लोगों के भविष्य की उम्मीदों में लगातार पंख लगते जा रहे हैं। लोग सीएम धामी को इस लिए भी धन्यवाद दे रहे हैं कि उन्होंने मनीष कुमार जैसे जिलाधिकारी का चयन कैसे किया होगा? जबकि आज ऐसे व्यतित्व की पहचान करना बड़ा मुश्किल का काम है।
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