रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : गणतंत्र दिवस का समापन कार्यक्रम है बीटिंग रिट्रीट समारोह—शशांक पाण्डेय
Laxman Singh Bisht
Thu, Jan 29, 2026
गणतंत्र दिवस का समापन कार्यक्रम है बीटिंग रिट्रीट समारोह—शशांक पाण्डेय
बीटिंग रिट्रीट भारत की एक अत्यंत गौरवशाली और गरिमामयी सैन्य परंपरा है, जिसका आयोजन हर वर्ष 29 जनवरी को नई दिल्ली के ऐतिहासिक विजय चौक पर किया जाता है। यह समारोह गणतंत्र दिवस के बाद आयोजित होने वाला अंतिम और औपचारिक कार्यक्रम होता है, जिसके साथ ही पूरे देश में चल रहे गणतंत्र दिवस समारोहों का शांतिपूर्ण समापन माना जाता है। इस अवसर पर वातावरण में अनुशासन, देशभक्ति और सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।इस परंपरा की जड़ें ब्रिटिश काल में मिलती हैं। पुराने समय में जब युद्ध के दौरान शाम ढलने लगती थी, तब ढोल, बिगुल और तुरही बजाकर सैनिकों को यह संकेत दिया जाता था कि अब लड़ाई रोक दी जाए और सभी सैनिक सुरक्षित रूप से अपनी छावनियों में लौट आएँ। इसी प्रक्रिया को बीटिंग रिट्रीट कहा गया। धीरे-धीरे यह सैन्य अभ्यास एक औपचारिक परंपरा में बदल गया, जिसे आज शांति, अनुशासन और सैन्य मर्यादा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।भारत में बीटिंग रिट्रीट समारोह विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसमें देश की तीनों सेनाएँ—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—एक साथ भाग लेती हैं। इन सेनाओं के प्रशिक्षित बैंड देशभक्ति, शौर्य और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाली धुनें प्रस्तुत करते हैं। जब ये बैंड एक साथ समन्वय में संगीत प्रस्तुत करते हैं, तो यह दृश्य भारतीय सैन्य शक्ति के साथ-साथ उनकी एकता और अनुशासन को भी दर्शाता है।इस समारोह की एक विशेष बात यह है कि यह राष्ट्रपति की उपस्थिति में आयोजित किया जाता है। राष्ट्रपति भारत की सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च सेनापति होते हैं, इसलिए उनका इस कार्यक्रम में उपस्थित होना सेनाओं के प्रति राष्ट्र के सम्मान और विश्वास को प्रकट करता है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में जैसे ही राष्ट्रभक्ति से भरी धुन “सारे जहाँ से अच्छा” बजाई जाती है और विजय चौक की रोशनियाँ क्रमशः बुझा दी जाती हैं, पूरा वातावरण अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण हो उठता है। यह दृश्य यह संदेश देता है कि उत्सव का समापन हो चुका है और अब देश शांति, अनुशासन और एकता के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।बीटिंग रिट्रीट एक सांस्कृतिक एवं संगीत कार्यक्रम के साथ ही यह भारतीय सशस्त्र सेनाओं के त्याग, समर्पण और अनुशासन का प्रतीक है। यह समारोह हमें यह स्मरण कराता है कि हमारी सेनाएँ केवल युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि शांति के समय भी राष्ट्र की सुरक्षा, एकता और गरिमा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार बीटिंग रिट्रीट समारोह भारतीय लोकतंत्र, राष्ट्रीय गौरव और सैन्य परंपराओं का एक जीवंत और प्रेरणादायक उदाहरण है।
(लेखक चम्पावत निवासी एवं राजनीति विज्ञान के शिक्षक है)