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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:लधियाघाटी की छात्रा ने बालिकाओं का दर्द सीएम व डीएम के सामने किया उजागर ।

Laxman Singh Bisht

Sat, Jan 24, 2026

लधियाघाटी की छात्रा ने बालिकाओं का दर्द सीएम व डीएम के सामने किया उजागर ।

पहाड़ की शिक्षा बनाम व्यवस्था: चम्पावत की लधियाघाटी को कॉलेज कब मिलेगा ?

"क्विक एक्शन" के लिए पहचाने जाने वाले जिलाधिकारी मनीष कुमार से उठी उम्मीदें, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंची छात्राओं की पीड़ा।चम्पावत। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। चम्पावत जिले के दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां छात्र-छात्राओं के लिए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा तो उपलब्ध है, लेकिन स्नातक एवं स्नातकोत्तर पढ़ाई के लिए उन्हें 50 से 60 किलोमीटर दूर शहरों का रुख करना पड़ता है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, सीमित परिवहन व्यवस्था और आर्थिक कमजोरियां इस राह को और कठिन बना देती हैं।सबसे ज्यादा मार बेटियों की शिक्षा पर पड़ रही है। लंबी दूरी और सुरक्षा की चिंता के चलते कई अभिभावक अपनी बेटियों को कॉलेज नहीं भेज पा रहे हैं। बरसात के मौसम में भूस्खलन की समस्या छात्रों की पढ़ाई को पूरी तरह बाधित कर देती है, जिससे पहाड़ के होनहार विद्यार्थी शहरी छात्रों से पीछे छूट जाते हैं। चम्पावत के "क्विक एक्शन" वाले जिलाधिकारी मनीष कुमार अपनी कार्यशैली के लिए जिले में अलग पहचान रखते हैं। वे कई जनसमस्याओं का समाधान मौके पर ही करते आ रहे हैं, जिससे आम जनता को त्वरित राहत मिली है। ऐसे में क्षेत्रवासियों को यह उम्मीद है कि उच्च शिक्षा जैसी गंभीर समस्या पर भी प्रशासनिक स्तर पर शीघ्र पहल होगी और यह मामला प्राथमिकता में लिया जाएगा।इस गंभीर विषय को लेकर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार की एम.ए. संस्कृत की स्थानीय छात्रा वन्दना शर्मा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर क्षेत्र में एक राजकीय महाविद्यालय खोलने की मांग की है। छात्रा का यह पत्र केवल व्यक्तिगत आग्रह नहीं, बल्कि पूरे पहाड़ी क्षेत्र की सामूहिक पीड़ा को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि कॉलेज निर्माण के लिए क्षेत्र में पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने की बात भी सामने आई है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और पलायन रोकने की दिशा में संकल्प की बात करते रहे हैं। ऐसे में चम्पावत जैसे सीमांत जिले में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना न केवल शिक्षा को मजबूती देगी, बल्कि पलायन पर भी रोक लगाने में सहायक सिद्ध होगी।अब निगाहें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं क्या "क्विक एक्शन" के लिए पहचाने जाने वाले जिलाधिकारी और संवेदनशील नेतृत्व वाले मुख्यमंत्री इस मांग को जमीन पर उतार पाएंगे, या पहाड़ के युवाओं को अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

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