रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:नगरूघाट में गूल क्षतिग्रस्त होने से सैकड़ो नाली भूमि हुई बंजर किसान नही कर पा रहे है खेती
Laxman Singh Bisht
Sun, Jan 4, 2026
नगरू घाट में गूल क्षतिग्रस्त होने से सैकड़ो नाली भूमि हुई बंजर किसान नही कर पा रहे है खेती
कभी खेती से लहलहाते थे खेत किसानों ने डीएम से की गूल मरम्मत की मांग।
धामी सरकार के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने तथा पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों के लिए कई योजनाएं संचालित की गई है। पर विभागीय उदासीनता के चलते ग्रामीणों का अब खेती से मोहभंग होते जा रहा है। लोहाघाट ब्लॉक की नेपाल सीमा से लगी ग्राम पंचायत पासम के नगरूघाट में जो खेत कभी खेती से लहलहाते थे आज वह विभागीय उदासीनता के चलते वीरान व बंजर पड़े हुए। पासम के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया वर्ष 2005/06 में लघु सिंचाई विभाग के द्वारा नगरूघाट में ग्रामीणों की खेतों की सिंचाई के लिए गूल का निर्माण कार्य कराया गया था। ग्रामीण यहां रहते भी थे और भरपूर खेती भी करते थे। वर्ष 2020 में पीएमजीएसवाई की सड़क निर्माण के दौरान गूल क्षतिग्रस्त हो गई थी और किसानों के खेतों में पानी पहुंचना बंद हो गया था। तिवारी ने बताया वर्ष 2024 में आई आपदा से बची खुची गूल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई ।
उन्होंने बताया पासम ग्राम सभा के 50 से 60 परिवार महाकाली नदी के किनारे नगरू घाट में बड़ी तादात मे खेती कर अपनी आजीविका चलाते थे। पर गूल क्षतिग्रस्त होने से सिंचाई व्यवस्था न होने के कारण अब लगभग सभी ग्रामीणों की लगभग 250 नाली भूमि पूरी तरह बंजर हो चुकी है। सिंचाई व्यवस्था न होने से ग्रामीणों ने खेती करना छोड़ दिया है।उन्होंने कहा जब तक सिंचाई की व्यवस्था थी ग्रामीणों के द्वारा यहां धान,गेहूं ,मड़वा ,सब्जी ,आलू ,प्याज ,टमाटर, हरी मिर्च का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता था जिससे ग्रामीणों की आजीविका चलती थी ग्रामीण बड़ी तादात में धान की रोपाई यहां पर करते थे। उन्होंने बताया लघु सिंचाई विभाग से ग्राम प्रधान हेमा देवी,सरपंच हेमचंद ,पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य कमल सिंह बोरा, ईश्वर सिंह बोरा व ग्रामीणों के द्वारा गूल की मरम्मत की मांग की गई पर आज 6 वर्ष बीत जाने के बावजूद गूल की मरम्मत नहीं हो पाई है विभाग के द्वारा कोई संज्ञान नहीं दिया जा रहा है ।उन्होंने बताया एक और सरकार किसानों को खेती के माध्यम से रोजगार से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चला रही है पर दूसरी ओर विभागों की लापरवाही के चलते किसान खेती छोड़ते जा रहे हैं ।उन्होंने कहा अगर गूल की मरम्मत हो जाए किसानों के खेतों को पानी मिले तो किसान एक बार फिर से इस बंजर पड़ी भूमि पर खेती करने को तैयार है किसान अपने आबाद खेतों को बंजरा देख काफी दुखी है। ग्राम प्रधान हेमा तिवारी , प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी, कमल सिंह बोरा व सरपंच हेमचंद व ग्रामीणों ने जिलाधिकारी चंपावत से गूल की मरम्मत करने की मांग की है। ताकि एक बार फिर से वीरान पड़े खेत खेती से लहलहा उठे और किसानो की आजीविका सुचारू रूप से चल सके।