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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:बारिश न होने से सूखी फसले किसान मायूस। बिना बारिश व बर्फ के बीता दिसंबर।

Laxman Singh Bisht

Wed, Jan 7, 2026

बारिश न होने से सूखी फसले किसान मायूस। बिना बारिश व बर्फ के बीता दिसंबर।

जंगली जानवरों के बाद अब किसानों पर पड़ी सूखे की मार।

गेहूं ,मटर ,लहसुन की फसलों को भारी नुकसान।

बीते तीन महीनो से बारिश न होने के कारण लोहाघाट व चंपावत क्षेत्र में फसले पूरी तरह सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है ।जिस कारण किसान काफी मायूस है किसानों की रोजी-रोटी पर संकट छा गया है। लोहाघाट क्षेत्र के किसान गंगा दत्त जोशी, भैरव दत्त राय, मोहन चंद्र पांडे नवीन करायत, किसान संगठन जिला अध्यक्ष राज किशोर शाह आदि किसानों ने बताया अक्टूबर माह से बारिश न होने के कारण उनके द्वारा लगाई गई गेहूं, मटर ,लहसुन, सरसों, मसूर , चने के अलावा अन्य फसले पूरी तरह सूखे की चपेट में आ गई है । किसानों ने कहा एक तो जंगली जानवरो का खतरा ऊपर से मौसम की मार से क्षेत्र के किसान काफी परेशान है ।बारिश न होने से किसान आलू बुवाई के लिए खेत तक तैयार नहीं कर पा रहे हैं। कहा क्षेत्र के किसानों कृषि उत्पादों को बाजारों में बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं पर इस वर्ष मौसम की मार के कारण किसानों की फसले पूरी तरह सूख चुकी है। किसानों ने कहा पहला दिसंबर देखा जिसमें ना तो बारिश हुई और न बर्फ पड़ी अभी भी दूर-दूर तक बारिश होने के कोई असर नजर नहीं आ रहे हैं ।किसानों ने कहा अगर यही हाल रहा तो किसानों को काफी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। किसानों ने शासन प्रशासन से जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। उन्होंने बताया कृषि बाहुल्य गांवों राय नगर चौड़ी, बिसंग,गंगनोला, फोर्ती, सुई, खूना, बलाई तथा सीमांत गांव पूरी तरह सूखे के चपेट में है। जिस कारण फसलों को बड़ा नुकसान हो चुका है। कहा एक तो जंगली जानवर किसानों की फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं ।ऊपर से सुख की मार ने क्षेत्र के किसानों की कमर को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है ।उन्होंने सरकार से क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। वहीं क्षेत्र वासियों ने कहा उन्होंने यह पहला दिसंबर का महीना देखा जिसमें ना तो बर्फ पड़ी और ना बारिश हुई कहा इस प्रकार का मौसम परिवर्तन होना भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है। इसका असर गर्मियों में भीषण जल संकट के रूप में देखा जा सकता है बारिश न होने से अभी से नौले ,गाड़ गधेरे सूखने की कगार में पहुंच चुके हैं।

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