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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:पूर्व सैनिक ने अपनी मेहनत से बंजर भूमि को बदल डाला शानदार बगीचे में।

Laxman Singh Bisht

Thu, Jan 8, 2026

पूर्व सैनिक ने अपनी मेहनत से बंजर भूमि को बदल डाला शानदार बगीचे में।

उद्यान विभाग पर लगाए 3 लाख 80 की धनराशि न देने के आरोप। विभागीय उदासीनता के है शिकार

प्रशासन से बगीचे के विकास के लिए सहयोग की अपील।दिल में कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी कार्य कठिन नहीं है जहां पर्वतीय क्षेत्र में लोगों का खेती बाड़ी से मोह भंग होते जा रहा है तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी है जो आज भी अपनी पुरखों की धरोहर को सहेज कर रखे हुए हैं। इस बात के उदाहरण है लोहाघाट के बिसंग क्षेत्र के 1857 क्रांति के नायक बीर कालू सिंह महरा की जन्म भूमि थूवा महरा के रहने वाले पूर्व सैनिक प्रताप सिंह महरा। जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम व मेहनत से अपनी बंजर भूमि को शानदार बगीचे में बदल डाला है तथा उनके द्वारा बड़ी तादात में यहां पर सब्जी उत्पादन भी किया जाता है। उनके द्वारा खुद अपने बगीचे में मेहनत करने के साथ-साथ आदमी भी लगा रखे हैं।वर्तमान में उनके बगीचे में 1200 से अधिक सेब , 300 कीवी 200 कोको तथा 100 माल्टा के पेड़ मौजूद है। इस शानदार बगीचे को बनाने में प्रताप सिंह को नाम मात्र की सरकारी सुविधा मिली है। प्रताप सिंह महरा ने बताया 24 साल उन्होंने फौज में नौकरी की इसके बाद रिटायरमेंट होने के बाद पुरखों की पड़ी बंजर भूमि में बागवानी करने की सोची ।उन्होंने बताया इस कार्य में उनके बेटे जो वर्तमान में एयरफोर्स में तैनात है मनोज सिंह महरा के द्वारा पूरा सहयोग किया गया। महरा ने कहा कार्य काफी कठिन था इस कार्य को करने के लिए उनके द्वारा उद्यान विभाग से संपर्क किया गया। बताया उद्यान विभाग के द्वारा शुरुआत में उन्हें सब्सिडी दरों में सेव के पेड़ हिमाचल से उपलब्ध कराए गए तथा बगीचे में घेरवाड़ कराई गई।उन्होंने बताया इसके बाद उनके द्वारा बगीचे में सेव, कीवी ,माल्टा व कोको के पौधे लगाए गए। इस कार्य में उन्होंने बताया उनकी काफी ज्यादा धनराशि खर्च हो चुकी है। अपने ही खर्च पर उन्होंने बगीचे के लिए पानी की व्यवस्था की गई। कहा लेकिन अब उद्यान विभाग के द्वारा उनकी कोई भी मदद नहीं की जा रही है बगीचा लगाने के दौरान उद्यान विभाग के द्वारा कहा गया था कि बगीचा बनाने में जो भी धनराशि खर्च होगी उसको उद्यान विभाग के द्वारा दिया जाएगा पूर्व सैनिक महरा ने कहा आज 3 साल बाद बीत जाने के बावजूद उनकी तीन लाख 80 हजार रुपए की धनराशि अभी तक विभाग के द्वारा नहीं दी गई है। जबकि वह कई बार जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के चक्कर काट चुके हैं। विभाग के द्वारा उन्हें बगीचे में छिड़काव के लिए दवा उपलब्ध नही कराई जाती है और ना ही बगीचे की देखरेख के लिए कोई तकनीकी शिक्षा दी जा रही है। पूर्व सैनिक ने कहा बगीचे को जंगली जानवरों से बचाने के लिए सोलर फेंसिंग की सख्त आवश्यकता है। कहा सबसे बड़ी समस्या सड़क की है ।कहा 4 साल पहले विधायक निधि से सड़क काटी गई थी जो आज तक पक्की नहीं हो पाई है जिस कारण उन्हें बगीचे तक सामान पहुंचाने के लिए कई धनराशि ढूलान में खर्च करनी पड़ती है। उन्होंने शासन प्रशासन और उद्यान विभाग से सोलर फेंसिंग लगाने तकनीकी शिक्षा के लिए विशेषज्ञों को बुलाने तथा बगीचे की सुरक्षा व देखभाल के लिए दवा व खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। कहा कभी उद्यान विभाग के अधिकारी बगीचे पर आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। उन्होंने जिलाधिकारी चंपावत से उनके बगीचे का भ्रमण कर आ रही समस्याओं के समाधान करने की मांग की है। वही इस कार्य में सहयोग कर रहे युवा हर्षित देव ने कहा काफी मेहनत व धनराशि करने खर्च करने के बाद यह बगीचा तैयार हुआ है। अभी भी बगीचे में मल्चिंग सीट, एंटी हेलनेट व सोलर फेंसिंग की सख्त आवश्यकता है।साथ ही विशेषज्ञों के द्वारा बगीचे की देखभाल के लिए तकनीकी जानकारी की भी सख्त आवश्यकता है।उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग करते हुए कहा बगीचे की सुरक्षा व देखभाल के लिए पूर्व सैनिक प्रताप सिंह महरा की मदद की जाए ताकि लोहाघाट का थूवा महरा गांव भी सेव उत्पादन में अग्रणी रहकर जिले का नाम रोशन करें।

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