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लोहाघाट मास्टर प्लान 2041 को लेकर संसय में जनता क्या बिना भूमि फ्री होल्ड के हो सकता है मास्टर प्लान जारी?

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रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट मास्टर प्लान 2041 को लेकर संसय में जनता क्या बिना भूमि फ्री होल्ड के हो सकता है मास्टर प्लान जारी?

Laxman Singh Bisht

Mon, Jul 6, 2026

लोहाघाट मास्टर प्लान 2041 को लेकर संसय में जनता क्या बिना भूमि फ्री होल्ड के हो सकता है मास्टर प्लान जारी?

क्या होगा फायदा क्या नुकसान?

7 जुलाई को मास्टर प्लान 2041 को लेकर पालिका सभागार में बैठक।

क्या लोहाघाट नगर वासियों को बिना भूमि फ्री होल्ड किए मास्टर प्लान 2041 का मिल सकेगा लाभ।

उत्तराखंड सरकार के द्वारा चंपावत जिले के अंतर्गत ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लोहाघाट क्षेत्र के लिए लोहाघाट मास्टर प्लान 2041 का प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसके संबंध में वर्तमान में एक प्रदर्शनी भी चलाई जा रही है। इस संदर्भ में प्रशासन द्वारा 30 जून 2026 से 31 जुलाई 2026 तक जनता से आपत्ति एवं सुझाव मांगे गए हैं। मास्टर प्लान के प्रावधानों से लोहाघाट के नगरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की आम जनता संसय में है। यदि यह मास्टर प्लान अपने वर्तमान स्वरूप में लागू किया जाता है तो इससे स्थानीय जनता काफी प्रभावित होगी। सरकार द्वारा इस मास्टर प्लान का व्यापक प्रचार प्रसार नहीं किया गया है जिस कारण अधिकांश स्थानीय जनता इसके गंभीर परिणाम से सर्वथा अनविज्ञ है। आपत्ती एवं सुझाव प्रस्तुत करने के लिए जो समय सीमा 30 जून से 31 जुलाई 2026 तक तय की गई है वह अत्यंत संक्षिप्त और पर्याप्त नहीं है ।इतनी बड़ी और दूरगामी योजना को बिना उचित प्रचार और जन जागरूकता के आनन-फानन में थोपने की तैयारी की जा रही है।

लोग इसे वर्तमान स्वरूप में प्रतिबंधित करने की मांग कर रहे हैं।

लोहाघाट नगर में मास्टर प्लान 2041में यह समस्याएं सामने आ सकती हैं ।

(01) लोहाघाट नगरीय क्षेत्र की अधिकांश बल्कि संपूर्ण भूमि नजूल भूमि /वर्ग 4 के अंतर्गत आती है सरकार द्वारा इस भूमि के नियमितीकरण या मालिकाना हक (रजिस्ट्री/ खतौनी) की कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। व्यवस्था के बिना ही सीधे मास्टर प्लान लागू किया जा रहा है।

(02) मास्टर प्लान लागू होते ही विकास प्राधिकरण के नियम प्रभावी हो जाएंगे इसके तहत किसी भी प्रकार के आवासीय, व्यावसायिक या अन्य निर्माण के लिए प्राधिकरण से नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा। नक्शा पास होने के लिए भूमि की रजिस्ट्री या मालिकाना हक के दस्तावेज अनिवार्य होते हैं मालिकाना हक न होने के कारण नगर की जनता के लिए नक्शा पास कराना पूरी तरह असंभव हो जाएगा।

(03) लोहाघाट के नागरिकों के द्वारा वर्ष 2014 में सरकार के निर्देश पर भूमि को फ्री होल्ड करने के लिए ट्रेजरी से चालान भी जमा करवाया जा चुका है परंतु इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा उस पर आज तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है ऐसे में मालिकाना हक दिए बिना मास्टर प्लान थोपना अन्याय पूर्ण है।

(04) लोहाघाट नगर के समीप स्थित गांव कली गांव ,पाटन ,कोली और पऊ को इस मास्टर प्लान के दायरे में शामिल किया गया है। इन ग्रामीण क्षेत्र की भौगोलिक ,आर्थिक और सामाजिक स्थिति पूरी तरह कृषि आधारित है जिसे बिना ग्रामीणों की अनुमति के नगरीय नियमों से बांधना सर्वथा अनुचित है।

(05) जनता से आपत्ति मांगने की अवधि केवल एक महीने की है जो कि इतने विस्तृत प्लान को समझने और आपत्ति दर्ज करने के लिए बहुत कम है। सरकार द्वारा इसका कोई स्थानीय स्तर पर प्रचार प्रसार नहीं किया गया है जो चिंता का विषय है।

(आम जनता एवं ग्रामीणों को होने वाले नुकसान और दुष्परिणाम)

यदि यह मास्टर प्लान बिना आवश्यक संशोधनों के लागू किया गया तो स्थानीय जनता को निम्नलिखित क्षति और नुकसान उठाना पड़ेगा।

स्वयं की भूमि पर निर्माण कार्य करने पर कठिनाइयां। लोहाघाट नगर क्षेत्र के निवासियों के पास मालिकाना हक न होने के कारण प्राधिकरण उनके मकान दुकान का नक्शा कभी पास नहीं करेगा। इसके परिणाम स्वरुप लोग को अपने ही पुश्तैनी स्थान पर भवन निर्माण या मरम्मत करने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पढ़ सकता है। उनके द्वारा किए गए किसी भी आवश्यक सुधार या निर्माण को अवैध घोषित किया जा सकता है।

मास्टर प्लान 2041 में सम्मिलित किए गए कलीगांव ,पाटन कोली व पऊं की अधिकांश जनता गरीब व मध्यम वर्ग से आती है यदि कोई ग्रामीण मात्र दो कमरों का छोटा मकान भी बनाना चाहेगा तो उसे नक्शा पास कराने और प्राधिकरण के चक्कर काटने में ही हजारों रुपए का अतिरिक्त और व्यर्थ आर्थिक बोझ बहन करना पड़ेगा।

मालिकाना हक के अभाव और जटिल प्राधिकरण नियमों के कारण स्थानीय जनता को छोटे-मोटे निर्माण के लिए भी प्रशासनिक अधिकारियों और बिचौलियों के चक्कर काटने पड़ेंगे।

स्थानीय छोटे व्यापारी जो स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं उनको कमर्शियल निर्माण या विस्तार के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र और नक्शा पास कराने की जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना होगा जिसे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव पड़ेगा।

मालिकाना हक के वैधानिक कागजों के अभाव में पूरा नगरीय क्षेत्र अवैध निर्माण की श्रेणी में आ जाएगा जिससे भविष्य में स्थानीय जनता पर हमेशा ध्वस्तिकरण या बेदखली का खतरा बना रहेगा।

वही मामले में लोगों का कहना है लोहाघाट मास्टर प्लान 2041 अपने वर्तमान स्वरूप में स्थानीय जनता के कल्याण के लिए नहीं बल्कि उन्हें उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित करने वाला प्रतीत होता है। लोगों ने सरकार व प्रशासन से मांग करते हुए कहा। जब तक लोहाघाट नगर की संपूर्ण नजूल भूमि को फ्री होल्ड कर स्थानीय निवासियों के नाम रजिस्ट्री या खाता खतौनी जारी नहीं की जाती है ।तब तक इस मास्टर प्लान पर पूर्णतया रोक लगनी चाहिए। तथा वर्ष 2014 में जमा किए गए चालान पर तुरंत संज्ञान लेकर मालिकाना हक देने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

फिलहाल कल 7 जुलाई को प्रातः 11:00 से नगर पालिका परिषद हाल में लोहाघाट मास्टर प्लान 2041 को लेकर बैठक आयोजित की जा रही है। जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिक , व्यापारी वर्ग अपने-अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

इस मास्टर प्लान की समय सीमा को बढ़ाते हुए इसका स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए तथा प्रत्येक वार्ड और गांव में जनसुनवाई आयोजित कर जनता की लिखित सहमति ली जाए।

कलीगांव, पाटन कोली और पऊ को इस मास्टर प्लान के दायरे से तत्काल बाहर किया जाए ।ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के ग्रामीणों पर नक्शा पास करने का अनावश्यक वित्तीय व प्रशासनिक बोझ न पड़े।

लोगों ने मांग करते हुए कहा जब तक लोहाघाट नगर क्षेत्र की संपूर्ण नजूल भूमि वर्ग 4 को फ्री होल्ड करके स्थानीय निवासियों के नाम रजिस्ट्री या मालिकाना हक जारी नहीं किया जाता है तब तक मास्टर प्लान पर रोक लगाई जाए।

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