रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : उत्तराखंड:बजट के अभाव मे सूख रहा जल जीवन मिशन नही निपट पा रहीं देनदारियां ।केंद्र से नहीं मिल पा रहा है धन।
Laxman Singh Bisht
Mon, May 12, 2025
केंद्र से नहीं मिल पा रहा है धन। ठेकेदारों ने हाथ किए खड़े।
उत्तराखंड में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन केंद्र से बजट न मिलने के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है। जेजेएम के तहत पहले राज्य सरकार ने 4300 करोड़ रुपए का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था लेकिन डीपीआर बनने के बाद यह आंकड़ा 9000 करोड़ रुपये पहुंच गया था। इस हिसाब से केंद्र से बजट आना भी शुरू हो गया था।उत्तराखंड में 9000 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन को आखिरी दौर में केंद्र के द्वारा बूंद-बूंद कर बजट दिया जा रहा है, जिससे कई परियोजनाएं अधर मे ही अटक गई हैं। पिछले करीब आठ महीने में केंद्र से 3900 करोड़ की रुपए मांग के सापेक्ष मात्र 318 करोड़ रुपए ही मिले। अब 3500 करोड़ से ऊपर की दरकार है। जिसके लिए केंद्र को पत्र भेजा गया है।जल जीवन मिशन के तहत राज्य में पहले 4300 करोड़ का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था, लेकिन डीपीआर बनने के बाद यह आंकड़ा 9000 करोड़ रुपये पहुंच गया था। इस हिसाब से केंद्र से बजट आना भी शुरू हो गया था। कोविड काल में हुई देरी के बावजूद राज्य में पांच साल में 14लाख 49 हजार 170 घरों में से 14 लाख 14 हजार 169 घरों में पेयजल के कनेक्शन दिए गए।कनेक्शन के हिसाब से पेयजल योजनाएं बनाई गईं। जिनमें से करीब 70 प्रतिशत पूरी हो गईं और 30 प्रतिशत अधूरी हैं। पिछले आठ माह से इनका निर्माण कार्य बजट के अभाव में अटका है। मार्च में केंद्र को 3900 करोड़ की डिमांड भेजी। पर पेयजल निगम को इसमें से मात्र 198 करोड़ और जल संस्थान को 120 करोड़ का बजट दिया गया। जिससे 40 फीसदी तक देनदारियां ही निपट पाईं। अब जल जीवन मिशन का काम कर रहे कई ठेकेदारों ने बजट न मिलने की वजह से हाथ खड़े कर दिए हैं। ठेकेदारों का कहना है उनके पास इतना बैकअप नहीं बचा जिससे परियोजनाओं का काम जारी रख सके। जो परियोजनाएं छह माह के भीतर पूरी होनी थी वह अब ठप पड़ चुकी हैं। और जनता पानी के लिए परेशान है।प्रदेश में जितनी पेयजल परियोजनाएं बन चुकी हैं अब विभाग के सामने उनका रखरखाव व गुणवत्ता भी चुनौती बन रहा है। बजट न होने से पेयजल विभाग के अफसरों के लिए मुश्किलें पैदा हो रही हैं। अब केंद्र से आर्थिक मदद मिलने के बाद ही रखरखाव हो सकेगा। पेयजल निगम के मुख्य अभियंता संजय सिंह ने बताया राज्य सरकार ने अगले साल 31 दिसंबर तक सभी परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य रखा है।लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला है। शासन स्तर से केंद्र को पत्र भेजा गया है, उम्मीद है जल्द केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल जाएगी। बजट मिलने के बाद ही रुकी हुई योजनाओं में तेजी से कार्य हो पाएगा।