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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट 👹👹 : यूपी निर्माण निगम की लापरवाही छात्रों पर भारी 30 किमी0 दूर चंपावत जाकर पढ़ाई करने को मजबूर आईटीआई दिगालीचौड़ के छात्र

Laxman Singh Bisht

Sun, Jul 20, 2025

10 साल से बन रहा आईटीआई भवन अभी तक नहीं किया गया हस्तांतरित छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़।

4 करोड़ का भुगतान कर चुका विभाग करोड़ों खर्च के बाद भी बच्चों को नहीं मिल पा रही तकनीकी शिक्षा।

क्षेत्र वासियों में आक्रोश आंदोलन की दी चेतावनी।

यूपी निर्माण निगम की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं छात्र।सरकार के द्वारा सीमांत क्षेत्र के छात्रों को तकनीकी शिक्षा देने के उद्देश्य से चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत दिगालीचौड़ में इलेक्ट्रीशियन ट्रेड से आईटीआई की स्थापना की गई थी। वर्ष 2014 में आईटीआई भवन का निर्माण यूपी निर्माण निगम के द्वारा शुरू किया गया ।वर्ष 2014-15 में यूपी निर्माण निगम को एक करोड़ 93 लाख रुपए का भुगतान भी किया गया कार्य भी शुरू हुआ ।लेकिन बीच में धनराशि कम पढ़ने के चलते बरसों भवन निर्माण का कार्य अधर में लटक गया था। जिस पर क्षेत्र वासियों के द्वारा आईटीआई भवन के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए कई बार आंदोलन भी किया गया। जिस पर तत्कालीन सचिव रनजीत सिन्हा ने संज्ञान लेते हुए 2 करोड रुपए की धनराशि भवन निर्माण के लिए जारी की । जिसके बाद वर्ष 2021 में आईटीआई भवन का निर्माण कार्य फिर से शुरू हुआ और भवन बनकर तैयार हो गया लेकिन यूपी निर्माण निगम के द्वारा लगभग 45 लाख रुपए की लागत से बनने वाले लिंक मार्ग का निर्माण अभी तक नहीं किया गया और ना ही भवन विभाग को हस्तांतरित किया गया है। भवन हस्तांतरित होने की आस लगाए विभाग के द्वारा एडमिशन शुरू किए गए और 20 छात्रों का एडमिशन इलेक्ट्रीशियन ट्रेड पर किया गया। लेकिन भवन हस्तांतरित नहीं हुआ। जिसका खामियाजा घर में ही तकनीकी शिक्षा मिलने की आस लगाए 20 छात्रों को भुगतना पड़ रहा है ।उन्हें पढ़ाई करने के लिए 30 किलोमीटर दूर चंपावत आईटीआई की दौड़ लगानी पड़ रही है जिस कारण छात्रो को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और उनकी शिक्षा भी प्रभावित हो रही है तथा अभिभावकों को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मामले में क्षेत्र में काफी आक्रोश है वर्तमान में संस्थान में एडमिशन शुरू हो चुके हैं लेकिन क्षेत्र के छात्र असमंजस में है। विभाग का कहना है यूपी निर्माण निगम को लगभग चार करोड रुपए की पूरी पेमेंट की जा चुकी है ।वर्ष 2024 में भवन संस्थान को हस्तांतरित होना था पर अभी तक नहीं किया गया सड़क का निर्माण कार्य न होने से संस्थान का सामान भवन तक नहीं पहुंच पा रहा है। संस्थान की प्रधानाचार्य उमा जोशी का कहना है कई बार सड़क निर्माण व भवन हस्तांतरित करने को लेकर यूपी निर्माण निगम के अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है पर कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।सीमांत क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता मोहन चंद्र पांडे व क्षेत्र वासियों ने शासन प्रशासन से बच्चों के भविष्य को देखते हुए आईटीआई भवन को जल्द से जल्द संस्थान को हस्तांतरित कर कक्षाएं संचालित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है अगर जल्द कक्षाएं संचालित नहीं की गई तो क्षेत्रवासी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे कहा यूपी निर्माण निगम की लापरवाही छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। अब देखना है शासन प्रशासन मामले पर क्या संज्ञान लेता है। भवन हस्तांतरित होता है या छात्रों को 30 किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ती है।

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