रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : बाराकोट (चंपावत):टूटी छत के नीचे तीन बच्चों के साथ रहने को मजबूर ग्यूनाड़ा की मनीषा जोशी जिलाधिकारी से मदद की गुहार।
Laxman Singh Bisht
टूटी छत के नीचे तीन बच्चों के साथ रहने को मजबूर ग्यूनाड़ा की मनीषा जोशी जिलाधिकारी से मदद की गुहार।

जिलाधिकारी पर ही है भरोसा सिर्फ वही कर सकते हैं उनकी मदद: मनीषा जोशी

आखिर जरूरतमंदों को समय पर क्यों नहीं मिल पाती है सरकारी मदद?

बुजुर्गों ने कहा है गरीबी एक अभिशाप है। जिसका जीता जागता उदाहरण है चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के ग्यूनाड़ा गांव की मनीषा जोशी जो गांव में अपने तीन बच्चों के साथ मकान की टूटी हुई छत के नीचे रहने को मजबूर है। जर्जर हो चुके भवन में कभी भी परिवार के साथ बड़ा हादसा हो सकता है। आखिर शासन प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की नजर जीवन से संघर्ष कर रहे इन लोगों पर क्यों नहीं पड़ती है। सरकारी सुविधाओं का लाभ इन परिवारों को समय से क्यों नहीं मिल पाता है यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है? इस वर्ष मानसून के मौसम में प्रशासन के द्वारा मनीषा जोशी के परिवार को दूसरे के भवन में शिफ्ट कर अपनी जिम्मेदारी निभा दी पर आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार के भवन की मरम्मत की सुध नहीं ली गई। मानसूनी सीजन समाप्त होने के बाद एक बार फिर से मनीष जोशी अपने तीन बच्चों के साथ वापस फिर से अपने जर्जर हो चुके भवन में रहने को मजबूर है। मनीषा का पति उर्वा दत्त जोशी अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए दूसरे शहर में मजदूरी करता है।

परिवार की माली हालत इतनी कमजोर है कि वह अपने भवन की मरम्मत तक नहीं करा पा रहा है किसी तरह परिवार की दिनचर्या चल रही है। जानकारी के मुताबिक इस परिवार का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में चढ़ा हुआ है पर इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं यह कहा नहीं जा सकता। मनीषा जोशी ने बताया उनके मकान की छत पूरी तरह से टूट चुकी है बरसात होने पर पूरा पानी घर के भीतर आ जाता है। डर के साए में उनकी रातें कटती है। मनीष जोशी ने जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार से उनके भवन की मरम्मत कराने की गुहार लगाई है उन्होंने कहा अब जिला अधिकारी ही उनका एकमात्र सहारा बचे हुए हैं जो उनकी मदद कर सकते हैं। मनीषा जोशी ने कहा टूटे हुए भवन में हर वक्त उन्हें हादसे का खतरा बना रहता है टूटी हुई छत से कोई भी जंगली जानवर घर के भीतर घुसकर उन पर हमला कर सकता है। किसी तरह उनके पति परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं। मनीषा जोशी ने कहा सरकार उनकी मदद करें और उनके जर्जर हो चुके भवन की मरम्मत की व्यवस्था करें। अब देखना है शासन प्रशासन क्या इस परिवार की मदद करेगा? या मनीषा को अपने तीन बच्चों के साथ डर के साए में जीवन यापन करना पड़ेगा? फिलहाल मनीषा को अपने जर्जर हो चुके भवन की मरम्मत की सख्त आवश्यकता है। मकान की छत में इतना बड़ा छेद हो चुका है कि उससे रात में आसमान के तारे गिने जा सकते हैं। क्या जनप्रतिनिधि वोट मांगने तक ही सीमित रह चुके है? क्या उन्हें जनता का दुख दर्द दिखाई नही देता है?
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